रविवार, 31 दिसंबर 2023

नव वर्ष मंगलमय हो!

अरे कहा जा रहे हो? रूको तो सही, अरे मेरे ख्वाब जो मैंने देखे थे, पूरे नहीं हुए और तुम जा रहे हो? मैंने सोचा था तुम्हारे रहते ही तुम्हारे साथ ही मैं वो सारे ख्वाब पूरा कर लूंगा पर ये क्या तुम तो मेरे ख्वाबों पर पानी फेर कर जा रहे हो, मैंने सोचा नहीं था की इस तरह चले जाओगे. हां मालूम तो था 31 को चले जाओगे पर ध्यान ही नहीं गया की इतनी आसानी से चले जाओगे, ऐसा लगा जैसे अभी रुकोगे कुछ और दिन..
                                       अरे! देखो वे चले गए, छोड़ कर चले गए, सब कुछ बिखर गया सा लग रहा है,अब नहीं आएगा वो, कभी नहीं आएगा, बड़े अरमान थे मेरे उनसे, अरमानों पर पानी फिर गया, परिवार से दूर कर गया, मेरे सारे जमा पूंजी ले गया, पर हां अनुभव और सीख दे गया, त्याग का, तपस्या का, बिछड़ने का अहसास, जीवन का अनुभव दे गया, बहुत कुछ सीखा मैने उसके साथ और बहुत कुछ पाया भी, खोने और पाने, लाभ और हानि, सफलता और असफलता, सुख और दुख , कभी सुखों के सागर में गोते लगाए तो कभी दुःख की अग्नि से तन मन भी जला, जब तक उनका साथ रहा बिखरता रहा, बिखर बिखर मैं निखरता भी रहा, गम तो है उसके जाने का पर खुशी भी है की उसने मेरा साथ देने किसी और को भेजा है , मैं धन्यवाद देता हूं, मैं कृतज्ञ हूं उसके प्रति, मैं आभारी हूं की उसने मेरा साथ दिया, मुझे अनुभव दिया, मुझे सीख दी, मैं कृतज्ञ हूं, मैं कृतज्ञ हूं, मैं कृतज्ञ हूं, और इस कृतज्ञता के साथ मैं स्वागत करता हूं इस नए आगंतुक का जो पूरे 1 वर्ष, 12 माह, 52 सप्ताह और 365 दिन सर्दी, गर्मी,बरसात में मेरा साथ देने वाले हैं, आशा करता हूं की यह पिछले से बेहतर हो,  मेरे अधूरे ख्वाब इसके साथ पूरे हो, इसके रहते ही मैं उन बुलंदियों को छू लूं जो मैं चाहता हूं और मुझे पूरा विश्वास है मुझे इनका साथ पूरा मिलेगा. अंत में मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा की आप सभी को भी धन्यवाद मैं आपके प्रति भी कृतज्ञ हूं, और आप सभी से निवेदन भी है मुझसे हुए छोटी से छोटी बातें जिनसे आपका दिल दुखा है, तो क्षमा कीजिएगा, आप सभी की शुभकामनाएं मेरे साथ रहे, मेरी शुभकामना हमेशा यही है की आप सभी स्वस्थ रहे, खुश रहे, आपकी आशाएं पूरी हो, यह वर्ष 2024 आपके लिए शुभ हो..
नए वर्ष की हृदय से बधाई...


लिखेश्वर साहू
9669874209

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023

बच्चों पर लेबललगाने से पहले सोचे

नहीं बेटा ये मत कर, नहीं बोला ना, नहीं मतलब नहीं,अरे ये तुम्हारे बस की बात नहीं है, अरे तू नहीं कर पाएगा, तू तो मूर्ख है, चल छोड़, रहने दे बोला ना, चल भग उधर, कुछ समझता ही नहीं है, डरपोक कहीं का, ये तो दब्बू है दब्बू, जीवन भर कुछ नहीं कर पाएगा तू, कुछ भी करते रहते हो, पढ़ाई तो करते नहीं हो कभी ,तू क्या करेगा जीवन में, तू तो गधा है गधा, जब देखो तब खाली डिस्टर्ब करते रहता है, बातूनी हो गया है, कम बोला कर, काम की बात बोला कर, मुंह बंद रखा कर, दिन भर खेलना बंद कर, ये सारे खिलौने बिखरा रखे है, बंद कर ये बाजार, दिन भर धमाचौकड़ी लगा रखी है, मुझे परेशान कर रखे हो, पागल है क्या, कुछ भी करता है, तुझमें अकल नहीं है, दिमाग में गोबर भर रखा है,इन शब्दों को बहुत बार सुना हुआ सा लगता है, अरे हां ये तो वही शब्द है जो कभी जानबूझकर,तो कभी आदतन, तो कभी अनायास ही अनजाने में अधिकांश माता पिता या पालकों के मुख से अधिकतर या कहे तो सामान्यतः मुख से निकल जाता है, औरों के ही नहीं अपने ही बच्चे जिनको हम यह बातें कह देते है , पालक होने के नाते हम किसी गलत मंशा से नहीं अपितु हम बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए सोचकर ही ऐसा बोल जाते है, पर सोचने वाली बात है की क्या सिर्फ ऐसे ही शब्दों का प्रयोग किया जाना आवश्यक है, क्या और कोई शब्द नहीं जिनका उपयोग सुझाव के लिए करें, क्या कोई विकल्प मौजूद नहीं जिनसे अपने बच्चों से बेहतर तरीके से व्यवहार कर पाएं, विकल्प तो ढेरों है पर हम ही सजग नहीं है उन विकल्पों के लिए, शब्दों का विस्तृत और समृद्ध भंडार भी है सबके पास क्योंकि सभी अपना काम निकलवाने बड़े रोचक और लुभावनी, चुटीले बातों,शब्दों का उपयोग कर ही जाते है, नेताओं और अधिकारी, संत और व्यापारियों से कैसे बातें करने है सभी जानते है, विनम्र बातें करना सभी जानते है, सभी रोज़ाना अपने अपने कार्यक्षेत्रों अच्छे अच्छे संवाद, मनोरंजक और दिलखुश करने वाली बातें कहते है सुनते है, संतो के प्रवचन, गुरुवाणी, मीठे भजन, सुविचार देख रहे है सुन रहे है, पर ऐसी कौन सी बाधाएं बांध जाती है जिनसे हम ऐसे ऐसे शब्द कह जाते है या ऐसा व्यवहार कर जाते है जो शायद अहितकर हो बच्चों के लिए , क्या  कभी आपका इस तरफ ध्यान गया है, क्या आप सुधार की मंशा रखते है, यदि ध्यान गया है, तो अच्छी बात है आप सोच रहे है सुधार की तो यह बड़ी बात है, बड़ी बात इसलिए की आपका ध्यान इस तरफ जाता है, और जिस तरफ हमारा ध्यान जाता है हम उनके लिए प्रयास करते है,हम जो बातें बच्चों को बोलते है उनका प्रभाव क्या होता है आइए जांचे, बच्चे को हम बोलना सिखाते है ,कैसे ,? उनके साथ ज्यादा से ज्यादा बातें बोलकर, ज्यादा से ज्यादा शब्दों को उनके शब्दकोश में भरने का काम रोज़ कर रहे है, हम जो बोल रहे है उनके शब्दकोश में भी शामिल हो रहा है और दिमाग में भी, जैसे वे अपने बड़ो को सुनेंगे वैसा उनके मुंह से भी निकलेगा फिर चाहे माता पिता, घर के कोई सदस्य या , गुरूजी जो भी हो उनके बोलने का प्रभाव पड़ता ही है, शब्दकोश से वाणी पर प्रबल प्रभाव पड़ता है, दिमाग़ में डाले गए सुझाव व्यवहार को निर्देशित करता है, ऐसे में यदि हम किसी बच्चे को कोई भी बात बोलते है जैसे रोजाना यदि हम उसे किसी एक ही बात को दुहराते रहे तो वे वैसा ही करते है, अनुभव करने की बात है, करके देखिए, रोज़ाना गाली डांट फटकार सुनने वाले बच्चे के मुंह से भी गाली या डांट सुनने को मिलेगा, उनके हाव भाव में  झिझक, क्रोध, भय बना रहेगा, सहमा सहमा सा रहेगा , प्रेम, स्नेह,दुलार पाने वाले का आत्मविश्वास बना रहता है, वह खुलकर बातें कहता है, बोलता है, अपनी अभिव्यक्ति कर पाता है,शायद आपने गौर भी किया हो , तो इस मामले में हमें सजग रहने की आवश्यकता है, और लोगों को भी सजग करने की आवश्यकता है, खुद भी समझे औरों को भी समझाएं....
यह विचार मुझे आया अपने विचारों को साझा करना मुझे उचित लगा तो मैंने किया,मेरी बातों से आप सहमत होते है या असहमत होते है ये आपकी बात है, वैसे इस तरह के विचारों पर मंथन किया जाना चाहिए बच्चों और बच्चों के विकास की बात है,
आपने समय निकाल कर पढ़ा आप जागरूक हैं,जागरूक होना चाहते हैं, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद..........

लिखेश्वर साहू
9669874209

मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

क्या आप भी...

एक बात सोचकर देखिए शायद आपको लगे या न लगे अक्सर इस दुनिया में लोग वही कर रहे है जो किसी और ने किया है या फिर कर रहे हो, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ ही हुआ और शायद अभी भी हो रहा है, आप माने ना माने पर मुझे लगता है शायद आप भी वैसा ही कर रहे है ,देखा देखी में ही लोग काम किए जा रहे हैं, आप शिक्षक हो या विद्यार्थी या फिर धन के लाभार्थी,नेता हो या अधिकारी या मंदिर के पुजारी, सब देख कर ही किए जा रहे है, हम सब एक दूसरे को देखकर ही कर रहे है, हम एक दूसरे को देखकर नकल ही तो कर रहे है, बचपन से लेकर आज तक, घर हो या ऑफिस, स्कूल हो या मंदिर,गली हो या सड़क जहां, खाने पीने, सोने, उठने बैठने सबमें हम नकल ही तो कर रहे है, यदि आप शिक्षक हो तो आपका पहनावा किसी विशेष शिक्षक को देखकर उसके हिसाब से होगा, कैसे पढ़ाते है बच्चों को यह भी तो दूसरों को देख सीखें है, वकील कपड़े के ऊपर कोट लगाकर टाई बांधता होगा, ये सब क्या है नकल ही तो है, डॉक्टर सफेद जैकेट पहनते है,हमें नकल करना सिखाया भी तो गया है, बाद में हम खुद भी सीख गए और दूसरों को भी सिखाने लगे, आपको याद होगा जब बचपन में पाठशाला गए तो गुरूजी ने स्लेट पर अ आ लिखकर इनका नकल बनाने कहा यानि उसको कॉपी करने कहा हम नकल कर लिखते गए और सीखते गए, नकल करने की इस प्रक्रिया में हम आज इतना दक्ष हो गए है की अब तक वो हमारा जीवन का हिस्सा बन चुका है, सायकिल चलाना सीखा, या फिर कोई काम धंधे सीखे, यदि आप पहले पहल किसी ऑफिस में आप काम करने गए होंगे तब आपने अनुभव भी किया होगा हमारे सीनियर को देखकर ही हमने काम सीखा, वे कहते रहे होंगे की जैसा मैं करते जा रहा हूं वैसा ही करो, और जब आप थोड़ी चुक किए होंगे तो शायद डांट भी लगी हो और बॉस ने कहा हो यार ये आदमी देखकर भी नहीं कर पा रहा,सोचकर देखिए क्या ऐसा नहीं होता, नकल से ही सीखते है ये बात और है की नकल के लिए अकल की जरूरत पड़ती है पर सभी बातों पर नहीं, एक कहानी बंदर की सभी जानते होंगे, एक बंदर टोपी वाले का टोपी लेकर ऊपर चढ़ जाता है,बंदर से टोपी लेने के लिए नीचे से टोपी से फेंकने से बंदर भी टोपी से फेंक मारता है और टोपी वापस मिल जाता है, शायद  तब से नकलची बंदर वाली कहावत चल पड़ी है, बस इसी तरह हम सब किसी खास मकसद के लिए नकल कर रहे है, जिंदगी के हर पल में खुशियां हो दुःख की घड़ियां सब देखा देखी और नकल ही तो है,शादी हो या सगाई, पहुनाईं हो या बिदाई सबमें नकल, जीवन के आरंभ से लेकर अंत तक नकल का सिलसिला चलता रहता है, अंत में जब अंतिम यात्रा पर ले जाया जाएगा तब भी नकल, वैसे नकल करना कोई गलत आदत नहीं है यदि वह सीखकर और समझ कर अपनाई जाए , लेकिन देखा देखी और नकल के इस सिलसिले में कईयों लोग ऐसे है जिन्हें पता भी नहीं की वे नकल क्यों कर रहे हैं और किनका कर रहे है, वे नकल के चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेते है, प्रत्येक व्यक्ति का नकल नहीं किया जाना चाहिए, सफल और आदर्श लोगों की नकल और उनके अच्छे आदर्शो की नकल करने चाहिए, सफल और महान चरित्र वाले लोगों की अनुकरण करने की बात संत और गुरूजी लोग भी बताते  है, संतो और महान आदर्शों में भी बहुत लोग बहुत सारे खामियां बताते है ऐसे खामियों को फिल्टर कर जो सही हो उसी का अनुकरण करने चाहिए....

लिखेश्वर 

यदि ऐसा है तो...

आपका इस जिंदगी के बारे में क्या राय है
1.जिंदगी में सुख ही सुख है
2.जिंदगी में सुंदर ही सुंदर दृश्य मुझे दिखते है 
3.जिंदगी में मुझे अच्छे ही अच्छे लोग मिलते है
4.मैं तो शारीरिक रूप स्वस्थ ही रहता हूं
4.मैं कभी बीमार ही नहीं रहता हूं 
5. मेरे पास बहुत ज्ञान है, मैं सबकुछ जानता हूं
6. मैं बहुत धनवान हूं
7. मै बहुत ताकतवर हूं
8. मुझे किसी की जरूरत नहीं
9.मुझे किसी से कोई मतलब नहीं
10. होनी को कौन टाल सकता है
यदि इस बारे में सोचे तो आपको सारे जवाब मालूम है,
शायद आप बता पाए या नहीं भी,इसके एक नहीं कई सारे जवाब आप दे भी सकते है, और बिलकुल सही है ,
सवाल नंबर एक जिंदगी में सुख ही सुख है तो इस चीज़ का अहंकार आप न करें, कभी भी किसी भी वक्त दुःख का पहाड़ टूट सकता है, सुखी होने के प्रयास हमेशा करते रहना है, हमेशा सुंदर ही सुंदर दृश्य दिखते है तो आप कभी न कभी बुरे दृश्य भी देखने वाले हो ऐसी स्थिति में स्वयं पर नियंत्रण करने का प्रयास करते रहो, यदि आपके साथ जो लोग है अच्छे ही अच्छे हो, जो आपको हमेशा सपोर्ट करते है पर आप उनके किए सहयोग का अहसान नहीं मानते उनके प्रति कृतज्ञ नहीं है तो यह आपको समझने चाहिए और स्वयं को इतना मजबूत बना लेना चाहिए की कभी वो सहयोग करना छोड़ दे तो मैं क्या करूंगा, मैं हमेशा शारीरिक रूप से स्वस्थ हूं यह सोच करके आप अपने ही शरीर को अकर्मण्य बना रहे है और नशा पान में लिप्त है, खाट में अधिकतर समय बिता रहे है तो आप सतर्क हो जाइए, मेहनत और एक्सरसाइज में ध्यान दीजिए शरीर का मेंटेन होता है, नशा में शरीर और दिमाग खराब होता है, खान पान का विशेष ध्यान रखे. मैं कभी भी बीमार नहीं पड़ता सोचकर, इसको स्थाई न समझे हमेशा स्वस्थ रहने के लिए उपाय करते रहे औरों को भी इसके लिए सतर्क रहें
मेरे पास बहुत ज्ञान है, मैं बहुत जानकार हूं यह न सोचे ये अहम है और वहम है, अहम और वहम दोनों ठीक नहीं है, ज्ञान लेते रहे, पुस्तक पढ़े, सत्संग करें, ज्ञान लेवे, मिली ज्ञान को जांचे परखे, अमल करें, ज्ञान बांटे . मैं बहुत धनवान हूं ऐसा सोचकर पैसे अनावश्यक न खर्च करें,लत ना डाले किसी भी चीज़ का ,न तो अच्छी चीज़ का और न बुरी चीज़ का , मन को यह समझाए सारा चीज यही रहना है, आपका भी और दूसरों का भी इसलिए ये संसार में सबके लिए पर्याप्त उपलब्ध है, मैं बहुत ताकतवर हूं यह सोचते हो तो बल का सही दिशा में उपयोग करें निर्बलो की सहायता करें. यदि आप सोचते है मुझे किसी की जरूरत नहीं तो इस पर पुनः विचार करें, ना तो कोई अकेला रह सका है, न रह पायेगा, सबको सहयोग चाहिए, आपको भी औरों को भी, सहयोग लेना और देना सीखें, सबके साथ मिलकर रहे, बुरे लोगों से बचके रहे.
मुझे किसी से कोई मतलब नहीं ये अहम का सूचक है,ये संसार के सभी लोग एक दूसरे पर निर्भर है, गलतफहमी में ना रहे मुझे किसी से कोई मतलब नहीं,सबके साथ मिलकर रहे, बातें करें, सुख दुःख के सहभागी बनें,होनी को कौन टाल सकता है, इस वाक्य को समझे, अधिकतम प्रयास करते रहे, सुधार के,परिवर्तन के प्रयास करते रहे, प्रयास से संभव हो सकता है..

आप हर कार्य को संभव कर सकते हो, आपके अंदर अच्छाई बुराई दोनों है , देखना है आप किस दिशा में जाते हो, आपका स्वभाव अपने सहयोगी पर कैसा है ये देखना है, अपने आश्रित के लिए आप क्या सोंच रखते है इस पर विचार करें....

बेहतर होने का प्रयास करते रहे, एक न एक दिन बेहतर होगा
बेहतरीन पल जल्द ही आने वाला है निराश हताश न होए आशा बनाएं रखें।

धन्यवाद 
लिखेश्वर साहू
9669874209

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

सफलता के सूत्र

सफलता के सूत्र

क्या आप सफल होना चाहते है
क्या अपने मंजिल को प्राप्त करना चाहते है
क्या आपको पता है की सफलता कैसे मिलती है
क्या आपको तलास है ऐसे राह की को आपको सफलता के शिखर पर पहुंचा दे तो हम बताएंगे आपको की आप सफल कैसे होंगे..
आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी में ऐसा कौन होगा जो सफल होना नहीं चहते है, यदि मैं ऐसा कहूं की कोई भी नहीं होगा जो सफल होना नहीं चाहते, इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहते है और चाहे भी क्यों नहीं सफलता से ही तो हमारी पहचान है, सफलता में ही जीवन की खुशियां है, जो अपने जीवन में सफल हुए है वही तो जीवन का असल मतलब जानते है और जो असफल हुए है वे निराश,हताश जीवन से हारे है, क्या आपके साथ भी कुछ ऐसी ही समस्या है, अधिकांश लोगों के जीवन में यह समस्या है लोग सफल होना चाहते है पर उन्हें नहीं पता की सफल कैसे हुआ जाता है कुछ समय पहले तक मुझे भी मुझे भी यह बिल्कुल एहसास नहीं होता था या इस बात से मैं अनभिज्ञ था कि सफल कैसे हुआ जाता है पर धीरे-धीरे मुझे इस बात का ज्ञान होते गया मैं इस बात से अवगत होते गया की सफलता कैसे पाई जाती है और तब से मैं इस सूत्रों को आत्मसात करते हुए इस राह पर चलना शुरू किया आप यकीन माने मैं सफलता पाई और अब मैं वही सफलता के रहस्य आप सभी को बताने जा रहा हूं मैं नहीं चाहता कि मैंने जो कठिनाइयों को झेला है जो डर-डर की ठोकी रे मैंने खाई है वह आप भी खाएं उसे डांस को आप भी जिले में यह नहीं चाहता और शायद इसीलिए मैं आपको यह सारी सूत्र आपके समक्ष आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं तो बिल्कुल आप सभी ध्यान से ध्यानपूर्वक इस सफलता के सूत्र को पढ़े समझे जाने और आभूषण करें ताकि आप भी शीघ्र अति शीघ्र सफलता को प्राप्त हो सफलता से मन में खुशियां छा जाती है मन आनंदित हो जाता है अलादीन हो जाता है और हमारा जीवन खुशियों से भर जाता है हमारा आत्मविश्वास ऊपर हो जाता है सफलता की जींस सूत्रों की मैं बात कर रहा हूं उन सूत्रों को मैं यहां आपके लिए नीचे लिखकर बता रहा हूं हो सकता है कि उनके जो कम है ऊपर नीचे हो जाए पर जो वास्तविक क्रम मुझे लगा कि यह होना चाहिए तो मैंने उसको उसी क्रम में यहां पर रखा है यह आपकी मर्जी है कि आप उसे किस क्रम में अनुसरण करते हैं मैं यूं हो का क्यों इसे अनुसरण करने आपको नहीं कहूंगा हो सकता है कि आप इसका भिन्न तरह से उपयोग कर सकते हैं और सफलता को प्राप्त कर सकते हैं आई अब हम बात करें सफलता के सूत्रों की तो सफलता के हुए सूत्र हैए
1. लक्ष्य सफलता के सूत्रों में जो आगरा रूप से या प्रथम दृष्टि या जो महत्वपूर्ण बात है वह है लक्ष्य का निर्माण जब तक कि हम यह नहीं जानेंगे कि हमारा लक्ष्य क्या है हमें जाना कहां है हमें प्राप्त क्या करना है हम क्या पाना चाहते हैं तब तक हम किसी भी राह पर जाने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो पहले और महत्वपूर्ण बात है लक्ष्य को तय करना जब हम एक बार अपना लक्ष्य तय कर कि हमें जाना कहां है तो हमारा आगे की जो कदम है वह आसान हो जाता है
2 समय प्रबंधन समय प्रबंधन दूसरा अति महत्वपूर्ण बात है जब हम तय कर सकते हैं कि हमें जाना कहां है हमारा लक्ष्य कहां है तो हम फिर अपने समय को व्यवस्थित करते हैं हमें निर्धारित समय में अपने लक्षण को प्राप्त करना है इसके लिए हमें कौन से कार्य कितने समय में करने हैं और किसी विशेष कार्य को करने के लिए हमें कितना समय देना है इस चीज के बारे में हमें पूरी जानकारी हो जानी चाहिए तय समय पर ते कार्य को करते हुए ही हम अपने लक्षण को प्राप्त कर सकते हैं
3 सीखना और नया सीखना तीसरी जो महत्वपूर्ण बात है सीखना और नया सीखना जो काम हम करना चाहते हैं जिस लक्ष्य को हम पाना चाहते हैं उसे लक्ष्य से संबंधित हमको जानकारी होनी चाहिए उसके बारे में हमें सीखना चाहिए कि किस कौशल से हम उसे लक्ष्य को आसानी से अर्जित कर सकते हैं पा सकते हैं और जब हम एक बार उसे चीज को सीख लेते हैं फिर उनसे जुड़ी कुछ नई बातें भी हमको सीखनी चाहिए होती है और यदि आवश्यक पड़े तो हमें अपने सीखे हुए में नए अद्यतन की जरूरत भी होती है तो सीखना और नया सीखना यह बहुत ही आवश्यक और महत्वपूर्ण बात है जो हमें याद रखनी चाहिए
4 बढ़ते रहना जब हम एक बार किसी चीज के बारे में सीख लेते हैं जान लेते हैं तो हमें फिर आगे कदम बढ़ाकर उसे राह पर बढ़ते रहना चाहिए और तब तक बढ़ते रहना चाहिए जब तक कि हम अपने लक्ष्य को प्राप्त न करें निरंतर बढ़ते रहना निरंतर अपने कदमों को आगे बढ़ते रहना मंजिल को प्राप्त करने की दिशा में या बहुत ही महत्वपूर्ण है या बात कभी नहीं भूलनी चाहिए की निरंतर पढ़ते रहने से हमें हमारे लक्ष्य प्राप्त करने सरलता होती है
5 निरंतर अभ्यास हमें किसी भी कार्य को निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए जब हम कोई भी कार्य की निरंतर अभ्यास करते हैं तो उसे कार्य में हमारी दक्षता बढ़ती जाती है हम उसे विशेष कार्य को कितनी आसानी से कर सकते हैं यह हमारे निरंतर अभ्यास पर निर्भर करता है किसी कार्य को करने के लिए हमारा अभ्यास यदि नहीं है तो हम उसे कार्य को ज्यादा आसानी से नहीं कर सकते अभ्यास से रिपुणता आती है किसी कार्य में दक्षता बढ़ती है हम इसलिए हमें निरंतर अभ्यास की आदत डालनी चाहिए जिस कार्य को हम दक्षता से करना चाहते हैं आसानी से करना चाहते हैं और बड़ी सफाई से करना चाहते हैं तो उसे कार्य के लिए हमें निरंतर अभ्यास करने की जरूरत होती है जिससे कोई चिकित्सक बनना चाहता है योग्य चिकित्सक बनना चाहता है तो उसे चिकित्सा की प्रैक्टिस रोजाना करनी चाहिए कोई हारमोनियम अच्छे बजाना चाहता है तो उसे हारमोनियम बजाने की जो अभ्यास है वह रेगुलर नहीं करनी होगी तभी तो वह बेहतर तरीके से संगीत का अभ्यास कर सकता है
      तो साथियों आप लोगों को समझ में आया होगा कि किस तरीके से आप सफलता की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं और कैसे आप अपने लक्षण को प्राप्त कर सकते हैं निश्चित ही यह बात आपको पूर्व से ही जानकारी रही हो पर मैं समझा कि यह जानकारी आप तक साझा की जाए तो शायद आपके लिए यह जो है पुनर स्मृति का काम हो सकता है और दोस्तों मुझे यह भी पूर्ण विश्वास है कि मेरे द्वारा साझा कीजिए जानकारी आपके जीवन में कुछ अहम भूमिका निभा सकती है इसलिए मैं आपको यह जानकारी साझा कर रहा हूं और मुझे यह भी आशा है और विश्वास है कि यदि यह जानकारी से आप संतुष्ट होते हैं या आपको कुछ विशेष लाभ होता है तो आप भी औरों के जीवन को बेहतर करने के लिए यह जानकारी सजा कर सकते हैं
धन्यवाद

सोमवार, 13 नवंबर 2023

बातों बातों में बनती बात


मैं कहता हूं बात करो 

बातों बातों में बनती बात
बातों बातों में कटते दिन रात
बातों बातों में मिलता साथ
उलझे को सुलझाए
बड़े बड़े झंझट निपटाए
सबसे सहज से बात करो
मैं कहता हूं बात करो 

बीती बातें जो बुरी हुई
समेट लो जो है बिखरी हुई
नहीं दोबारा बिखराना
बातों से कभी न घबराना
बातों से न दूर भागो तुम
बातों में मजा ,हो जाओ गुम 
औरों से भी और खुद से भी
चलो सार्थक संवाद करो
मैं कहता हूं बात करो 

सतयुग द्वापर त्रेता हो
कलयुग में जगत विजेता हो 
चाहे अधिकारी ,नेता हो
फिल्मों का अभिनेता हो
करते बातें बनाते काम
बातों का वकील लेते है दाम 
बाप हो चाहे बेटा ,मिल बैठ सब साथ करो 
मैं कहता हूं बात करो 

संत,मुनि,ज्ञानी, ध्यानी भी 
बड़े बड़े विज्ञानी भी 
उद्बोधक और प्रबोधक भी
मंचो का उद्घोषक भी
मीठी मीठी बातें करते है
बातों से काम चलाते
नाम और दाम कमाते है
चलो सही अभ्यास करो
 मैं कहता हूं बात करो....


लिखेश्वर साहू
9669874209









शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

नहीं कठिन आसान बहुत ही बच्चे को सिखाना

 नहीं कठिन, है आसान बहुत ही

बच्चों को सिखाना  

चाहो जो तुम उसमें

करके दिखाना

देखेंगे , सीखेंगे, करके दिखाएंगे

 

देख देख कर सीखे बच्चे वो तो नकलची होते है

नाचो गाओ सामने उनके वो भी नाचते गाते है

सही सही से बातें तो तुम  

उनको सिखाना 

चाहो जो तुम उसमें करके दिखाना

देखेंगे , सीखेंगे, करके दिखाएंगे

 

संस्कार सिखलाना है तो संस्कार दिखलाओ

करके आदर से बातें , आदर ही उनसे पाओ

मुस्कान भरी बातें जो चाहो

उन्हे देख मुस्कराना                

चाहो जो तुम उसमें करके दिखाना

देखेंगे , सीखेंगे, करके दिखाएंगे

 

घर मे करोगे झगड़े तो बच्चे भी झगड़े सीखेंगे

होगी बड़ी परेशानी बाद में , जब वो झगड़ते दिखेंगे

छोटी छोटी बातों को

झगड़े ना बनाना

चाहो जो तुम उसमें करके दिखाना

देखेंगे , सीखेंगे, करके दिखाएंगे









लिखेश्वर साहू 

9669874209

 

 

 

 

 

 

अब हो जाओ तैयार...

बाज रही रण की भेदी
अब हो जाओ तैयार
उठा लो अब हथियार सत्य का,
करो असत संहार
कब तक सहते जाओगे 
यूं ही चुप रहते जाओगे

सत्य नहीं वो, तुम जो कहते
जरा स्वयं को झांको तो 
सही नहीं जो करते हो तुम 
अपने कर्मों को आँकों तो
टूट रहा विश्वास स्वयं से
कैसे बच पाओगे 

घोर घमंड में रहते हो
और व्यर्थ विवाद में पड़ते हो 
चिंता की चार दिवारी में फंस
मर मर के फिर तुम मरते हो
होती बुद्धि नाश 
अब कैसे चल पाओगे

डरते हो सबलो से तुम
निर्बल को आंख दिखाते हो
पिछुआ होकर चलते हो
स्वयं को आगे बताते हो
तुझे है अब धिक्कार 
कैसे तुम रह पाओगे 

साहस नहीं अब मेरा 
जो कुछ मैं कर पाऊंगा
जीवन की लंबी  राहों पर
अब मैं चल पाऊंगा
निकाल दो यह विचार कब तलक 
यही कहते जाओगे

ऐसी पारी खेलो कि
चहुंओर गूंजे जयकारे 
जय हो, विजय हो, जय हो, विजय हो 
लगते रहे सदा नारे 
बनकर कब पतवार 
नईया पार लगाओगे


खुद से खुद को अब लड़ना है 
औरों से नहीं लड़ाई है
सकार मन से, नकार मन की
सत और असत की लड़ाई है 
जोरों से ललकार स्वयं को,
स्वयं ही जीत के आओगे
देखे सारा संसार
ऐसा पहचान बनाओगे....

बाज रही रण की भेदी
अब हो जाओ तैयार
उठा लो अब हथियार सत्य का,
करो असत संहार
कब तक सहते जाओगे 
यूं ही चुप रहते जाओगे



लिखेश्वर साहू 
9669874209




















मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023

आ मेरे बेटू तुझे चलना सीखा दूं मैं

आ मेरे बेटू तूझे चलना सीखा दू मैं

जिन्दगी की राह में , मंजिलों की चाह में

आगे तुझे बढ़ना सीखा दूं मैं,

आ मेरे बेटू तूझे चलना सीखा दूं मैं


हाथ में किताब लेकर

मन में सुंदर ख़्वाब लेकर 

सपनों की दुनिया को

हकीकत में बदलना सीखा दूं मैं 

आ मेरे बेटू तुझे पढ़ना सीखा दूं मैं


लाखों आंधी आएगी, राह से भटकाएगी

मन कभी विचलित न करना ,सदा ही तुम आगे बढ़ना..

तूफानों की राह से , आंधी की अफवाह से

आ मेरे बेटू तूझे उबरना सीखा दूं मैं


काम,लोभ बनके बाधा, कर्तव्य पथ पर आते हैं

क्रोध, मोह , बैर, ईर्ष्या ये सभी भी सताते हैं

क्रोध मोह के जाल से , शत्रुओं की चाल से

निकलना सीखा दूं मै

आ मेरे बेटू तुझे चलना सीखा दूं मैं,


कठिन डगर है,जाना मगर है

पार हो खुशियों का घर है

हंसके पार करना सिखा दूं मैं 

आ मेरे बेटू तुझे चलना सीखा दूं मैं 


राह में बढ़ते रहो 

स्वदेश सेवा करते रहो 

धर्म गुनते , कर्म करते

पथ प्रदर्शक बन तुम्हें चलना सीखा दूं मैं

आ मेरे बेटू तुझे चलना सीखा दूं मैं…


हम है माली जग है बगिया

खिली कलियां, फूल बढ़िया 

तितली और भंवरो के जैसा 

फूलों को चुनना सीखा दूं मैं 

लिखेश्वर साहू
9669874209






सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे

बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे 
पूछे है मुझसे सवाले ढेर सारे 
ये चाँद क्यूँ आसमान में रहता है 
संग हमारे क्यूँ न खेले 
दूर से ही देखता है 
ठंडी ठंडी चली क्यूँ ये हवा रे 
बच्चे बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे 
पूछे है मुझसे सवाले ढेर सारे  

जहाज जो उड़ता है यहाँ पर 
वो उतरता है कब कहाँ पर 
जाके बोलो पापा उनसे 
कभी आए घर हमारे 
बच्चे बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे 
पूछे है मुजसे सवाले ढेर सारे 

पेड़ में क्या दिखता तुम्हें 
भोर मे मुझसे कहे 
खुद बताए मुस्करा के
अ आ इ ई की मात्रा रे  
बच्चे बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे 
पूछे है मुझसे सवाले ढेर सारे  

उड़ती हुई तितली को 
देखे और मुस्कराए 
पूछे मुझसे किसने है 
इसे रंग में रंगा रे  
बच्चे बच्चे प्यारे प्यारे न्यारे न्यारे
पूछे है मुझसे सवाले ढेर सारे 

रविवार, 29 अक्टूबर 2023

बनाओ न बहाने बहाने बनाने से क्या मिलेगा

दुनिया भर के पैतरे आजमाने से क्या मिलेगा

बनाओ न बहाने, बहाने बनाने से क्या मिलेगा

 

न करो काम कोई ऐसा जिससे तू शर्मिंदा हो

नाम करो ऐसा की युगों तक तेरा नाम जिंदा हो

करो समय का सदुपयोग समय को व्यर्थ गँवाने से क्या मिलेगा

बनाओ न बहाने बहाने बनाने से क्या मिलेगा

 

छोड़ो वो बातें जो तुमसे हो सकता था

अभी तुम बताओ तुझसे क्या हो सकता है

बीत गई जो बातें उन्हें बताने से क्या मिलेगा

बनाओ न बहाने बहाने बनाने से क्या मिलेगा

 

न कहो तुम मैं बेचारा हूँ परिस्थितियों का मारा हूँ

नहीं कर सकते तुम कुछ भी क्या तुम नाकारा हो 

बैठ घड़ियाली आँसू बहाने से क्या मिलेगा

बनाओ न बहाने बहाने बनाने से क्या मिलेगा

 

जीतना है जो जंग इस जग में जगमगाते रहो टिमटिमाते रहो

ढँक जाए कुहरा घनेरा तो फिर भी रोशनी तुम अपनी बिखराते रहो

न दबाओ आभाओं को अपने, आभाओं को दबाने से क्या मिलेगा

न बनाओ बहाने ,बहाने बनाने से क्या मिलेगा

 

दूर नहीं है मंजिल जितना तुम समझते हो

चढ़ते रहो सीढ़ी पर निरंतर क्यूँ चढ़ते और उतरते हो

घबराते हो बेवजह क्यूँ घबराने से क्या मिलेगा

बनाओ न बहाने बहाने बनाने से क्या मिलेगा

  


लिखेश्वर साहू 

9669874209 




शनिवार, 28 अक्टूबर 2023

मानव तन अनमोल,बनाओ न कचरा

सोचो तो जरा
विचारो तो जरा
मानव तन अनमोल प्यारे 
बनाओ न कचरा

लोहे के मोटर यानों में ईंधन ठीक डलाई 
महीने महीने में चेकअप कराते, करते रोज सफाई 
तन  गाड़ी में कूड़ा डाले , यह तो नहीं चतुराई 
बाहर से साबुन पानी लगाया अंदर की नहीं धुलाई 
विचारो तो जरा सोचो तो जरा 
मानव तन अनमोल न बनाओ कचरा
सोचो तो जरा
विचारो तो जरा
मानव तन अनमोल प्यारे 
बनाओ न कचरा

लोहे के मोटर यानों में ईंधन ठीक डलाई 
महीने महीने में चेकअप कराते, करते रोज सफाई 
तन  गाड़ी में कूड़ा डाले , यह तो नहीं चतुराई 
बाहर से साबुन पानी लगाया अंदर की नहीं धुलाई 
विचारो तो जरा सोचो तो जरा 
मानव तन अनमोल न बनाओ कचरा

मांसाहार न खाओ जी 
गुटखा ना चबाओ जी
शराब हाथ ना लगाओ जी
धुआं ना उड़ाओ जी 
गांजा बीड़ी से दूर रहो 
व्यसन को दूर भगाओ जी
सोचो तो जरा
विचारो तो जरा 

घर आंगन में गंदी चीज़े कभी नहीं बिखराते 
कागज, पन्नी, धूल पड़ी हो झाड़ू खूब लगाते
मन मंदिर को सजग नहीं भाई क्यूं गंदा कर जाते 
दुनिया भर के कचरे इसमें क्यूं तुम भरते जाते
निकालो कचरा रखो साफ सुथरा 
सोचो तो जरा विचारो तो जरा 

गंदी बाते सोचो ना 
गंदी बाते बोलो ना 
गंदी चीज़े देखो न
गंदी संग में जाना ना 
समय समय पर सत्संग करके
मन की सफाई कर लेना
सोचो तो जरा
विचारो तो जरा 

http://likhansahu.blogspot.com/2023/10/blog-post_4.html

लिखेश्वर साहू
9669874209

 








शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

सोचकर देखे

सोचकर देखे...
कोई भी एक वाहन के बारे में सोचे , निर्माता कंपनी द्वारा वाहन से संबंधित सारे नियम व मार्गदर्शन होते है, आपको कौन सी ईंधन गाड़ी में उपयोग करने है, कैसी सावधानी से आपको अपनी गाड़ी का ध्यान रखना है, निर्धारित समय में अपने गाड़ी का सर्विसिंग कराना है, उसमें डालने वाला ईंधन निर्धारित है, निर्धारित ईंधन को डाले बगैर ईंजन चालू नहीं होता, किसी अन्य पदार्थ को डालने पर ईंजन खराब हो जाता है या शायद अन्य ईंधन से भी यदि चले तो भी उनकी दक्षता खराब हो जाती है, बहुत ही जल्द वह वाहन खराब होकर उपयोगी नहीं रह जाता, उनकी कीमत नही रह जाता, कबाड़ हो जाता है, ईंजन और वाहन सही सही कार्य करे और दक्षता उनकी बनी रहे इसलिए समय समय पर ईंजन में मेंटनेस का कार्य कराना पड़ता है, और इस चीज़ का हम बहुत खयाल रखते है समय समय पर मेंटनेंस कराते है,कभी कभी मैकेनिक के कहने पर हम अपने वाहन को मैकेनिक के पास ही एक दिन, दो दिन या हफ्ते पर भर छोड़ देते है, और फिर मेंटनेंस हो जाने पर पुनः हम जांच करते है की ठीक हुआ या नहीं, ठीक हो जाने पर हम ले जाते है और उसे उपयोग में लाते है,ठीक इसी तरह हमारा यह शरीर भी वाहन जैसा ही मानिए और जरा सोचिए इस ईंजन में निर्धारित ईंधन के अलावा हम क्या क्या डाल रहे है, रोज रोज हम गलत तरीके से ईंधन डालकर अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहे है, और फिर मेंटनेंस के लिए चिकित्सक के पास ले जाते है,
डॉक्टर कहता है इतना खर्च है ये ये दवाई लगेगा, ले आइए हम दवाई भी ले आते है, जब डॉक्टर कहते है की कुछ परहेज करना पड़ेगा, मिर्च मसाला छोड़ो, दारू, गुटखा, बीड़ी,सिगरेट तंबाकू छोड़ दो, हम हां बोल देते है हां, पर होता क्या है, हम छोड़ने को तैयार ही नहीं है, हम वो सारी चीज़े जो नहीं करनी होती है वे करते जाते है, और फिर बाद में जब हमारा शरीर बीमार हो जाता है, इन्हें समझे प्रकृति में हमारे खाने,पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में बढ़िया चीजें चीजें मौजूद है, जो हमारे शरीर व स्वास्थ्य को ठीक रखता है, फिर भी हम घटिया और हानिकारक, अहितकर चीजों का सेवन करते है,
चलो यहां तक ठीक है अब थोड़ा और समझे हमारे मस्तिष्क को समझे इसे कंप्यूटर मशीन माने,हमारे शरीर को रोबोट, कंप्यूटर द्वारा जो रोबोट को निर्देश मिलता है, वही ये शरीर द्वारा किया जाता है, यहां समझने का प्रयास करें की हमारा मस्तिष्क द्वारा अच्छे कार्यों के लिए निर्देशित किया जाए तो हम अच्छे कार्य करेंगे और बुरे कार्य में निर्देशित करे तो हम बुरे कार्य में संलग्न हो जायेंगे, हमारे मस्तिष्क में जो विचार है वे ही निर्देश है, सोचिए अपने विचार को, क्या ये अच्छे और सही है ,प्रत्येक परिस्थिति के लिए इन विचारों को देखे और प्रत्येक परिस्थिति में सही विचार ही मस्तिष्क में लाने का प्रयास करें,यदि ऐसा होता है है तो हम सही सही से कार्य संपादित कर पाते है और इसका परिणाम सही होता है, यदि हमारे विचार गलत हो रहे है तो हमारे कार्य और परिणाम सही नहीं हो सकता, सही कार्यों के प्रतिपादन के लिए सही विचार बहुत आवश्यक और अनिवार्य है, नौकरी, व्यवसाय, संकट, बीमारी, संबंध या किसी भी संदर्भ में आप देखिए आप के विचार कैसे आ रहे है, गलत विचार आ रहे है तो सतर्क हो जाए, गलत विचार से आपके  द्वारा गलत कार्य होगा, और नतीजे आपके लिए गलत होंगे ही होंगे, इसलिए सदैव, सभी परिस्थिति में अच्छे विचार के बीज अपने मस्तिष्क पर बोए, कुछ लोग तो हमेशा गलत सोचते है अपने बारे में भी और दूसरे के बारे में भी , जैसे अक्सर कुछ लोगों को आपने कहते सुना होगा की मैं फेल हो जाऊंगा लगता है, मैं गिर जाऊंगा, मैं हार जाऊंगा, मुझे डर लग रहा है, कही मैं बीमार न हो जाऊं,ये विचार गलत है, बुरे है, अपने बारे में हो चाहे दूसरे के बारे में, कुछ लोग कहते है की मैं कुछ नहीं सोचता, गलत बोलते है वे लोग जो कुछ नहीं सोचता हूं कहते है, ऐसा हो ही नहीं सकता की कोई किसी भी चीज़, व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में कुछ ना सोचे, सोच की प्रक्रिया तो अनवरत जारी रहता है, पल पल में में हमारी सोच बदलती रहती है, ऐसा भले ही होता है की हम ध्यान नहीं दे पाते, इस सोच को हमें ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि सोच से ही हम कार्य संपादित कर परिणाम प्राप्त करते है, यथा सोच तथा परिणाम इस बात को समझे ओर अपनी मस्तिष्क को सही निर्देश दे, सही कार्य करे, सही परिणाम पाए....

लिखेश्वर साहू

बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

बच्चों का खेल में बड़ो का झगड़ा

बच्चे खेल रहे थे, आपस में बातें भी कर रहे थे, बड़े सुंदर सुंदर प्यारे प्यारे बच्चे, शरारत भरे उनके खेल बड़ा ही मनमोहक, रेत से घर बनाना, रेत ऊपर से नीचे गिराना, हवा चल रही थी, हवा के झोंको से रेत के कुछ कण एक बच्चे के आंख में चला गया, बच्चा रोने लगा आंख को खोलता, बंद करता अपने हाथों से आंखो को रगड़ता, बच्चे की रोने की आवाज पास के मकान में गृहकार्य करती हुई एक स्त्री के कानों पर पड़ी उसे लगा बाहर कोई रो रहा है, खिड़की से झांककर देखा तो दौड़ती दौड़ती घर से बाहर आई शायद रो रहा बच्चा उनका ही हो, चिल्लाते हुए वो आई किसने मारा कौन है वो जिनको मेरे बच्चे का खेलना पसंद नहीं आया, खेलना है तो शांति से खेलो ना ऐसे मारा पीटी क्यों कर रहे हो,
आकर उसने अपने बच्चे से पूछा क्यों रो रहे हो, बच्चा आंख रगड़ रहा था, महिला आंख में रेत देखकर महिला परेशान हो गई, गुस्से से उसने पुछा किसने मेरे बेटे के आंखो पर रेत डाला ,बच्चे ने उंगली उठाकर एक बच्चे की तरफ इशारा किया , बस क्या था फिर महिला बड़बड़ाती हुई पड़ोस के मकान में पहुंच गई और और भला बुरा कहने लगी, कहने लगी सम्हाल के रख अपने बच्चे को , किसी को भी मारता रहता है देखो तो क्या हाल कर दिया मेरे बच्चे का, कितना रो रहा है, आंख में रेत डाल दिया, उनकी बात सुनकर इनको भी गुस्सा आया कान मरोड़ते अपने बेटे का उसने पुछा की क्या ये जो बोल रही है वो सच है, बच्चे ने बोला मैंने कुछ नहीं किया, बस क्या था फिर वो महिला भी अपने बेटे को बेकसूर जान भीड़ गई, तू क्या सोच के बोलती है, मेरे बेटे को झगड़ालू बोलती है, उसे बदमाश समझती है, मेरे दरवाजे चढ़ मुझसे लड़ने आई है, झगड़ालू औरत, लड़ने और झगड़ने में तुम्हें मजा आता है, कोई काम धाम नहीं क्या तेरे घर जो हमेशा झगड़ने में लगी रहती है, ऐसा सुनते ही पहली महिला का माथा गरम हुआ, उसने फिर उन्हें गाली देना शुरू कर दिया, काली कलूटी जैसी तेरी शकल वैसी तेरी अकल, कुछ भी बोलती है, मुझे झगड़ालू बोलती है, मुझे काम नहीं बोलती है, दिन भर तो तू दरवाजे में बैठ क्या करती है, क्या दरवाजे में बैठ तू दिन भर काम करती है, गाली में आने जाने वाले लोगों को गिनती रहती है, पहली महिला के ताने सुनकर दूसरी महिला का फिर शुरू हुआ उसने कहा, अरे जा जा मोटी भैंस कहीं की, तेरी बुद्धि तो भैंस जैसी मोटी है, तू क्या करती है दिन भर मोबाइल में, पटर पटर लगी रहती हो,और फुर्सत मिल गया तो इसके बारे में उसके बारे चारी चुगली में लगी रहती हो और मुझे बोलती हो , बस क्या था बात बढ़ता जा रहा था, इतने में उसका पति अंदर से आया उनका बल और बढ़ गया उसने दो कदम आगे निकल कर उंगली दिखाकर गाली गलौज शुरू कर दी, सामने से जवाब मिला अपने घरवाले को बुला लाई झगड़ने वो भी क्या कर लेगा देखती हूं, अजी सुनो तो आओ देखो देखो इन लोगों को, पति पत्नी मिलकर मुझे झगड़ा कर रहे है, मुझे मारने के लिए आए है, ऐसा कह खींचते हुए अपने पति को ले आई बात बढ़ गई, आस पास खड़े लोगों ने भी अपने अपने तरफ खाद पानी देना शुरू किया, अरे देख तो तुझे उसने ऐसा कहा, जा तू जा तो देख उनको उनकी हिम्मत की तेरे रहते तेरी पत्नी को ऐसा बोले,फिर क्या था दोनों के पतियों ने भी हल्ला शुरू कर दिया एक ने दूसरी की पत्नी की बुराई दूसरे ने पहले पत्नी की बुराई की आसपास के लोग दर्शक बन देखने लगे, एक ने शांत कराने की कोशिश की बात नहीं बनते देख उसने वहां से अपना रास्ता चल दिया,  कुछ लोग आग में घी डालने का काम करने लगे, बात मारा पीटी में आ पहुंची, हाथ मुक्को से दोनों तरफ दे दनादन शुरू दोनों तरफ के बच्चे रो रहे थे , जिनके आंख में रेत घुसा था  हाथापाई करते बच्चे को और जोर से लग गया , बच्चा और जोर से रोने लगा, दोनों परिवारों में लड़ाई बढ़ गई थी आवाज सुनकर समाज के मुखिया लोग पहुंचे जैसे तैसे करके उन्होंने दोनों परिवारों को शांत कराया, मुखिया ने पूछा तो पहली महिला ने बताया इनके बच्चे ने मेरे बेटू को रुला दिया, एक ने कहा मेरे बेटे ने कुछ नहीं किया, वही फिर शुरू दोनो महिला लड़ने, मुखिया ने जोर से चिल्लाया और कहा बंद करो लड़ने, पहले ये तो बताओ तुम दोनों ने देखा क्या अपने बच्चों को रोते रुलाते , दोनों ने कहा नहीं, तो मुखिया ने कहा देखो बच्चे है, बच्चे आपस में खेलते दौड़ते भागते है, खेल में हार जीत होती है, कुछ बच्चे हारते है कुछ जीत जाते है , कभी कभी हारने वाला बच्चा रो पड़ता है, जितने वाला खुशी मनाता है, पहली महिला ने कहा पर मेरे बच्चे के आंख में रेत डाल दिया था इस बच्चे ने, मुखिया ने कहा रूको थोड़ा, बच्चों बताओ कौन कौन तुम्हारे साथ खेल रहे थे,उन बच्चों को अपने साथ मुखिया ने बिठाया बड़े प्यार से पूछा फिर एक बच्चे ने बताया हम सभी खेल रहे थे, रेत उड़ा और इनकी आंख में घुस गया, फिर ये रोने लगा, चिल्लाती हुई आंटी आई और इसके घर चली गई, फिर झगड़ा होने लगा, मुखिया ने समझाया देखो बात बहुत बड़ी नहीं है, रेत हवा में उड़कर आंख में पड़ा तो बच्चा रोने लगा, बच्चा है रोएगा ही, तुम्हें चुप कराना चाहिए था, बच्चों को समझा देती ऐसा मत खेलो, अपने बच्चे के आंख को धो देने के बजाय समझाने चली गई, और तुम भी जब तुम्हारे घर आई तो तुम अपने बच्चे के बिना गलती के भी इनसे माफी मांग कर कह सकती थी की बच्चा है हो गया होगा, मैं समझा दूंगा, अगली बार ऐसा नहीं होगा तो बात वही शांत हो जाता पर ऐसा नहीं करके झगड़ना शुरू कर दिए, छोटी बात को आपने बड़ा बना दिया, मुखिया के समझाने से दोनो ने ही अपनी गलती के लिए माफी मांग अगली बार ऐसा नहीं होने का वादा किया, मामला शांत हो गया पर दो परिवारों का मनभेद बना ही रह गया....

देखिए ऐसे ही होती है हमारे आसपास की भी कुछ घटनाएं जो छोटी छोटी बातों को विवादों, झगड़ो और पारिवारिक दुश्मनी में बदल देती है, हमें अपनी सोच, और समझ को बदलनी होगी, हमें अपने मुंह से निकलने वाले शब्दों को समझना होगा हम क्या बोल रहे है, हमारे बोलने का अर्थ क्या होगा, उसका प्रभाव सामने वाले पर क्या होगा, क्या इससे उसको अच्छ लगेगा, मामला सुलझेगा की उलझ जायेगा , यह प्रत्येक को समझना होगा, सामाजिक सद्भावना ,आपसी सहयोग एक दूसरे का सम्मान बना रहे ऐसे, मधुर वचन बोले , मधुर व्यवहार करें....



लिखेश्वर साहू
9669874289

सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

जिंदगी एक सफर



अक्सर लोग यह सोचते है की मेरी जिंदगी में दुःख ही दुख क्यों है मैं इस दुख के साथ कैसे जिऊं मैंने क्या गलती है जो मुझे दुःख ही दुःख मिलता रहता है सुख तो मुझे नसीब ही नही होता, वे दिन भर यही सोचते रहते है और बस सोचते रहते हैं और जिंदगी का आनंद नहीं ले पाते उन्हें लगता है ऐसी जिंदगी ही बेकार है आगे जाने पर भी दुःख पीछे जाने पर भी दुःख यह सोचता रहता है, भविष्य में भी दुख की आशंका और भूतकाल के दुःख से हताश निराश वह व्यक्ति करे तो करे क्या समझ ही नहीं पाता, सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है, दिन भर चिंता में डूबा रहता है और थककर बैठ जाता है वही उसी जगह जहां पर वह बैठा है वह निर्णय करता है की वह वैसा ही रहेगा जिस हालत में है, वह उस जगह से आगे जाने की हिम्मत नहीं करता केवल जिंदगी में आने वाली अंजान तकलीफ और कष्टों को सोचकर दुखी होता है, पर क्या हमेशा यह सही हो सकता है की भविष्य केवल दुख और निराशा  से भरा हो, हो सकता है की आगे सुख भरे जिंदगी भी मिले,वैसे भी जिस हाल में अभी हो वहां भी तो केवल दुखी ही हो, तो इससे अच्छा आगे बढ़े ,क्या पता आगे का जीवन पूरा 
सुखमय हो 
      जरा  सोचकर देखे जिंदगी एक खूबसूरत सफर की तरह है जो बेहतरीन और खूबसूरत तथा कष्टकारी और बदसूरत सड़कों से होकर गुजरती है, कभी रास्ते में बड़े गड्ढे तो छोटे छोटे गड्ढे मिलते है, आपको कभी तेज चलना होता है कभी बहुत धीमा तो कहीं रास्ते पैदल पार करना होता है ,कहीं पर आपको ठहर कर रास्ते खाली होने का इंतजार करना पड़ता है, तो कभी आपको चाय पानी नाश्ता के लिए रुकना भी पड़ता है ,पर फिर भी आप चलते है अंततः आपको कभी ऐसा टर्निंग पॉइंट भी मिलता है जहां पर आपको अपना रूट डायवर्ट करना पड़ता है चाहे आप खुद से रास्ते को भांप कर डायवर्ट करे या फिर सामने रखी साइन बोर्ड को देखकर, आपको केवल सफर आनंद लेते रहना है और राह में आने वाली हर एक परिस्थितियों को सहना है आनंद लेना है, आपका मंजिल वही है जहां आपको जाना है पर राह में कष्ट भी मिलेंगे और मजा भी आयेगा अपनी मंजिल आपको बदलना नहीं है, राह की सारी परिस्थितियों का आनंद लेते उस खूबसूरत सी जगह आप पहुंच जायेंगे जहां आप जाने का सपना संजोए थे , उस खूबसूरत सी जगह पर पहुंच आप केवल और केवल सुख का अनुभव करेंगे ,आपको भरपूर आनंद आएगा, सारी थकावट दूर हो जायेगी सारी तकलीफे उस क्षण मिलने वाली सुख की तुलना में नगण्य हो जायेगा, और फिर जब आप पीछे रास्ते को देखेंगे तो आपको पुनः कष्ट का अनुभव होने लगेगा, पर आप अब यह सोचे की जिंदगी के उस कीमती सुख की कीमत क्या है, उस सुख की कीमत है, रास्ते के पूरे गड्ढे, बाधाएं, रूकावटे, अनगिनत मोड़, यही सब सफर को यादगार बनाता है इस सफर की तरह ही जिंदगी के कष्टों का भी आनंद ले और अपनी मंजिल को पाने के लिए चल पड़े पूरे उत्साह के साथ कि जिंदगी में आने वाली हर दुःख, सुख को अनुभव में शामिल करते हुए अपने जीवन का आनंद लेना है और अपने जीवन के सफर को रोमांचक और यादगार बनाना है ताकि औरों को भी यह सीख मिले की अनगिनत कष्टों और परेशानियों को झेलकर भी जीवन जीने में कितना आनंद है...



लिखेश्वर साहू
9669874209

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023

अच्छी आदतों से मिलेगी सफलता

प्रणाम
नमस्ते
आप सभी का आज का दिन मंगलमय हो इस शुभकामना के साथ, आज की अच्छी बातें..

चलिए आज आदत बनाने की बात करते है अच्छी आदतें बनाना हमारी सफलता के लिए बहुत आवश्यक है, सफलता चाहे किसी भी क्षेत्र में हो,अध्ययन , करियर, या फिर जीवन की सफलता के लिए अच्छी आदतें सभी को बनानी ही चाहिए, अच्छी आदतों को बनाने से वे काम स्वाभाविक रूप से होने लगते है, अपने आप होने लगते है, जैसे आपने समय पर नहाने और समय पर खाने की आदत बनाई है तो उस कार्य को स्वाभाविक रूप से करते है उसमें आप टालमटोल नहीं करते, इसके अलावा यदि पढ़ने की बात करें तो आप कहेंगे नहीं, नहीं होगा मेरी आदत नहीं है, मैं नहीं कर पाऊंगा बोर हो जाऊंगा, यदि आप को कहा जाए की आधे घंटे आपको टीवी पर प्रवचन सुनना है तो आपको आदत नहीं हो तो आप शायद यह कह सकते है आधा घंटा प्रवचन और मैं ,नहीं ये मेरे से नहीं होगा,
तो जिन चीजों की आदत हमें नहीं है हम उसमें टालमटोल करते है हम उसको करना पसंद नहीं करते वे हमारे लिए बोझिल लगते है, पर कुछ अच्छी आदतें है जो हमारी सफलता के लिए बहुत जरूरी है और यदि वे आप नहीं कर पाते तो शायद आप सफलता से दूर रहते है, इसलिए हम सभी को अच्छी आदतें बनानी चाहिए,
अच्छी आदतें बनाने से हमारे कार्य स्वचालित हो जाते है उनके लिए हमें बहुत यत्न नहीं करना पड़ता है, और किसी कार्य के पूर्ण हो जाने पर हमें खुशी मिलती हम उस कार्य के लिए उत्साहित रहते है, और हम उस कार्य को करना पसंद करते है, पूरे ईच्छा, उत्साह और खुशी के साथ कोई कार्य किए जाए तो उसमें सफलता मिलने की उम्मीद निश्चित होती है, 
अब बात आती है की आदत कैसे बनाएं हमें तो आदत बनाना नहीं आता, आदत बनता ही नहीं,कुछ लोग कहते है की मैं अच्छे काम करने की आदत बनाना चाहता हूं पर हो नहीं पाता , मुझे समझ नहीं आता की मैं कैसे करूं, जैसे मैं सुबह उठकर फ्रेश होकर पढ़ना चाहता हूं, पर ऐसा नहीं कर पाता हूं, देखिए ये कार्य भी उतना ही आसान है जितना दूसरे काम की आदत ,आपने नहाने की आदत कैसे बनाई, आपने खाने की आदत कैसे बनाई,  क्या इसके लिये बहुत प्रयास करना पड़ा?नहीं, किसी बच्चे को पहली बार स्कूल जाते समय रोते देख सकते है, वे स्कूल जाना नहीं चाहते, पालक उन्हें जबरदस्ती स्कूल में छोड़ आता है, बच्चे का जब आदत बन जाता है तो वे स्वतः ही स्कूल जाना शुरू कर देते है, किसी कार्य की आदत तब बनती है जब उस कार्य को रोज रोज दोहराया जाए ,जब रोज रोज किसी कार्य को दोहराया जाता है तो हमारे मस्तिष्क में वो दर्ज हो जाते है और हमारे व्यवहार में शामिल हो जाते है, हमारे व्यवहार का हिस्सा बन जाते है ,
अक्सर आपने लोगों को यह कहते सुना होगा की आज मैं नहाया नहीं हूं तो मुझे चैन नहीं है, आज मैं काम पर नहीं गया तो अच्छा नहीं लग रहा,मेरा दिन नहीं बीत रहा है, व्यायाम करने की आदत है और किसी दिन व्यायाम ना करे तो सुस्ती लगता है किसी कार्य को करने का मन ही नहीं लगता और अन्य कार्यों में भी इसका प्रभाव दिखता है स्फूर्ति के साथ कार्य नहीं कर पाते,  अधूरा अधूरा लगता रहता है.
इसीलिए सभी को अच्छी अच्छी आदतें बनानी ही चाहिए,
अच्छी चीजों के आदत के लिए महत्वपूर्ण बात है अच्छी आदतों का चयन जो आप अपने व्यवहार में लाना चाहते है, आप निर्णय ले की आप आदत बनाना चाहते है और दृढ़ संकल्पित हो जाए की मुझे यह आदत बनानी ही है और तब तक अपने को उसके लिए अनुशासित रखें जब तक उस कार्य की आदत आपको ना पड़ जाए यह कार्य शुरु में थोड़ा मुश्किल लगेगा पर धीरे धीरे आपको आसान लगते जाएगा और फिर कुछ समय बाद देखेंगे की आप अपने आप वो काम स्वाभाविक रूप से कर पा रहे है और आप खुश रहते है, उत्साहित रहते है, जब एक अच्छी आदतें बन जाए तो आप फिर दूसरी आदतें बनाना शुरू करें या फिर जितने अच्छी आदतें आपको बनानी है एक साथ शुरू करें...
अंत में इस शुभकामनाओं के साथ की आप अच्छी आदतों को अपना कर सफलता और प्रगति की ओर अग्रसर हो,
आपने अपने अमूल्य समय देकर इस लेख को पढ़कर अच्छी आदतों को बनाने का निर्णय लिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद 
आप खुश है तो हम भी खुश है...



लिखेश्वर साहू
9669874209


गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

विचारों की शक्ति


प्रणाम,
आप सभी को ,
इस आशा के साथ कि आप सभी कुशल मंगल होंगे आज का चिंतन साझा करूं, हमारे विचार बड़े ही शक्तिशाली होते है, बड़े से बड़े निर्माण और बड़े से बड़े विनाश का कारण हो सकता है हमारे विचार , चाहे तो आप महान कार्यों को करके महान बन सकते हो और चाहे तो ओछे काम करके ओछे और नीच हो सकते हो,ये पूरी तरह आपकी सोच(विचार) पर निर्भर करता है, लोग भले ही इस बात को कहते है की सोचने से क्या होगा? यदि मैं यह कहूं की सोचने से बहुत कुछ हो सकता है, आप चांद पर भी पहुंच सकते हो तो , आप नेता,मंत्री, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक वो सबकुछ बन सकते हो जो आप चाहते हो तो यह अतिसंयोक्ति नहीं होगी,आप उस पल को याद करिए, कुछ दिनों पहले ही हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिक लोग सैटेलाइट, चांद पर भेजे थे ये क्या था, क्या ये बिना सोचे किया गया था, हवाई जहाज जो उड़ रहा है, बिजली जो आपके दैनिक जीवन पर अपना अधिकार जमाए हुए है, आपके हाथों में जो स्मार्ट फोन है जो आपको स्मार्ट और कभी कभी मूर्ख भी बना देती है वे क्या है, क्या वे बिना विचार के हुआ है, वो भी तो किसी ने सोचा था, ये बड़ी बड़ी बातों को छोड़ो, आप सभी अपने अपने घरों में ही देख लीजिए,आपका घर बनने से पहले आपके दिमाग में घर बनाने का विचार बनता है, आप कोई काम शुरू करते है उनसे पहले आपका उस कार्य के लिए विचार आता है, क्या मैं सही कह रहा हूं? आप सोच कर देखिए क्या आपने मोटर सायकिल लेने से पहले मोटर साइकिल पर सवार हो सड़क पर अपने साथियों, परिवारों के साथ यात्रा करने की तस्वीर नहीं देखे थे ,ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जो आपको बता सकता हूं ,पर एक बार आप खुद ही सोचकर देखे की क्या ये सही है, यदि सही है तो आप विचारों पर गौर करें कि आपके विचार कैसे है क्या आपके विचार आपको ऊपर उठा रहे है या आपको नीचे धकेल रहे है और फिर उसके अनुसार अपना कार्य करे यदि आपके विचार आपको उत्साहित कर रहे है आपको ऊपर उठा रहे है तो आप और बेहतर से बेहतर कार्य करें ,अपने विचार को और ऊंचे उठाए और यदि आपके विचार नीचे धकेल रहे हो तो ठहर जाए और अपने विचारों को परिवर्तन करें, आप जो चाहें बन सकते है मैं फिर कहना चाहूंगा, आप जो है वे भी अपने विचारों से है, आप नेता, अभिनेता, शिक्षक, जो कुछ भी हो आपके विचारों के बल पर हो, समाज को नई दिशा , अपने घर परिवार रिश्तों को नई दिशा दिखा सकते हो किसी को बेहतर जीवन जीने में सहायक हो सकते हो, नए युग का आगाज़ कर सकते हो, विकास की नई गाथा लिख सकते हो, आपके भीतर वो शक्ति है, क्षमता है बस उसे पहचानने की जरूरत है, आपके भीतर दुनिया की वे सारी शक्तियां है जो तुम्हें दुनिया भर की खुशियां दे सकती है, आप जो चाहे पा सकते हो, आप अपनी सोच को, अपने विचार को बदलो, पूरी दुनिया अपने आप आपके अनुसार बदलती नज़र आयेगी....

      इस लेख को लिख रहा हूं तो इस विचार के साथ की मेरे विचार के साथ ही जो इस विचार को पढ़ रहा होगा उनके विचार भी परिवर्तन हो रहे होंगे, पुष्ट हो रहे होंगे और पढ़ने वाले के दिमाग में भी परिवर्तन की लहरें हिलोरे मार रही होगी, कुछ करने का विचार आ रहा होगा, यदि आपके साथ ऐसा हो रहा होगा तो आप दुनिया के बेहतर व्यक्ति होने जा रहे हो, यदि नहीं तो एक बार नहीं बार बार इस विचार को पढ़े जब तक की आप अपने विचारों की ताकत को न समझो....


विचारों को समझों
बदल सकती है ये तुम्हारी तकदीर
ना रखो जंजीरों में जकड़े खुद को 
सोचों तो दुनिया का राजा हो,  
सोचों तो राह का फकीर 

आपने अपने अमूल्य समय को निकालकर इस लेख को पढ़कर अपने जीवन को बेहतर करने का विचार किया इसके लिए देने आपको बहुत बहुत धन्यवाद 
धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद 

आपका दिन शुभ हो


लिखेश्वर साहू
9669874209

मनके जोड़ने का प्रयास, माला बन मिली सफलता..


अक्सर ऐसा होता है की जब हम कुछ कार्य कर रहे होते है और अकेले ही कर रहे होते है और कार्य बहुत बड़ा होता है और सामूहिक रूप से करने पर ही पूर्णता संभव हो,उस समय हमारे मन में उथल पुथल होते रहता है की करूं या ना करूं , मैं अकेला कैसे यह कर पाऊंगा, नहीं हो पाएगा, और कोई अन्य व्यक्ति जब यह कहता है की ये क्या कर रहे हो, ऐसे नहीं हो सकता ,ये अकेले का काम नहीं है, सबको सुधारना तेरे से नहीं हो पाएगा किसको किसको सुधारते रहोगे, सबका दिमाग एक जैसा नहीं होता, तब उस समय तो स्थिति एकदम और समझ से बाहर होने लगता है हताशा छा जाती है और हम उस कार्य को छोड़ने की सोच लेते है और छोड़ भी देते है, तब होता क्या है, आपका प्रयास असफल हो जाता है, लेकिन यदि आप उस कार्य को करते रहते है तो आपका प्रयास जारी रहता है,
देखिए कोई बात आप को समझ आया, आपने दूसरे को समझाया वो नहीं समझा, तीसरे को समझाया,वो भी नहीं समझा और चौथे को समझाया, उसे लगा इनकी बात तो ठीक है ये बिल्कुल सही कह रहा है, ऐसा कह कर वो आपके साथ हो जाता है ,ऐसे ही हरेक चौथा भी आपकी बात मान कर आपके साथ हो लेता है तो आपको आपका कार्य पूर्ण हो जाता है,
एक उदाहरण से आप इसे समझने का प्रयास करें कि आपको एक माला बनाने की जिम्मेदारी दी गई है और आपको फूलों के ढेर से फूल बिनकर माला बनाने होंगे,तो आप क्या करेंगे? आप एक एक फूल उठाकर माला बनाने शुरू करेंगे, आपने माला बनाना शुरू किया एक एक फूल को बड़े लगन से आप पिरो रहे है, कुछ फूल टूट टूट कर नीचे गिर रहे है आप क्या करेंगे,आप उनकी जगह फिर नए फूल डालेंगे और उस माला पिरोने के कार्य को पूर्ण कर लेंगे...

ठीक इसी तरह अपने जीवन को भी समझिए यहां भी आपको वही जिम्मेदारी है, आप,हताश निराश होकर कार्य नहीं छोड़िए , एक एक फूल पिरोते रहिए , माला बनकर तैयार हो जाएगा...


लिखेश्वर साहू
9669874209


समाज की भूमिका एवं सदस्यों की जिम्मेदारी

प्रणाम
आप सभी को
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
मां का आशीष आप को मिलता रहे...




प्रत्येक मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक समाज में रहकर विकास करता है, निश्चित रूप से समाज और खुद का विकास करता है, परिवार समाज का छोटा रूप होता है, समाज में सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक उन्नति व विकास हेतु विभिन्न प्रयास किए जाते है, एक दूसरे के परस्पर सहयोग से यह कार्य संपन्न होता है, प्रत्येक व्यक्ति की समाज के प्रति निष्ठा ,समर्पण का भाव, उनके नेक विचार और कार्य समाज में परिवर्तन ला सकते हैं, समाज का प्रत्येक सदस्य कोई न कोई विशेषता , प्रतिभा, रखता है , जो जिस तरीके से समाज की सेवा करना चाहे  करता है, अपनी विशेषताओं, दक्षताओं का, अपनी नेतृत्व क्षमता का नेकी और समझदारी से उपयोग करते हुए समाज के उतरोत्तर विकास में अपनी जिम्मेदारी निभाता है, और निभाना भी चाहिए , वह इसीलिए भी जरूरी है कि हम जिस समाज में रहते है वही पर रहकर ही हम अपने और अपने परिवार के लिए एक बेहतर जीवन मूल्य देने की सोचते है, प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि उनके परिवार ,बच्चे अच्छे व्यवहार, अच्छे संस्कार, अच्छे रीति रिवाजों को जाने समझे, अच्छी परंपराओं को जाने, मानवीय मूल्यों को समझे , परिवार में यह सब बातें सभी अपनी समझ व जानकारी अनुसार बताते है ,समझाते हैं और आचरण भी करते है पर ऐसा क्या हो जाता है की जब वही बच्चा समाज के बीच आता है तो उनके आदत,व्यवहार, संस्कार भिन्न हो जाते, सम्मान का भाव, बातें करने का लहज़ा, उपयुक्त बर्ताव, चाल चलन सब बदल जाते है, यह बदलाव कभी सकारात्मक होता है तो कभी नकारात्मक , नकारात्मक बदलाव शायद किसी को भी पसंद नहीं किसी बच्चे का अनुचित व्यवहार जब किसी के साथ होता है तब फिर प्रश्न उठता है कि इस तरीके के व्यवहार के लिए जिम्मेदार कौन है, अधिकतर कह दिया जाता है , बच्चों के मां बाप को समझाना चाहिए ऐसे बच्चों को,इनके मां बाप कुछ नहीं बोलते होंगे इनको, बड़ा ही उद्दंड बालक हो गया है, पर ये रवैया आई कहां से, उन्हें ये संस्कार मिले कहां से सोचिए और गंभीरता से सोचिए..
अधिकतर लोगों को गली मोहल्ले चौक चौराहे जहां पर बच्चे खेल रहे होते है उनके सामने कभी कभी उनके साथ ही अभद्र व्यवहार करते देखे जा सकते है, गंदी गलियां उन्हें दे देते है, या उनके सामने ही किसी की मां बहन जैसे अश्लील गालियां , दी जाती है, अब इन सभी व्यवहारों का उन अबोध बालकों का प्रभाव क्या होगा, और वे सभी बच्चों जो कुछ जानने समझने लगे है उन्हें लगता है की बड़े लोग जो कर रहे है वे सही है, वे फिर अनुकरण करने लगते है, कोई भी कार्य ऐसे ही सीखा जाता है देखकर, सुनकर और फिर उनका प्रयोग कर गंदी भाषाओं, गंदे व्यवहार घरों में तो नहीं किया जाता, ये तो घर के बाहर ही चौक चौराहे, बाजारों कही पर भी हो जाता है, इसके जिम्मेदार कौन? देखिए हम इस बात से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते है की हमारा प्रत्येक कार्य व्यवहार समाज में अमूल चूल परिवर्तन करता है, हमारा प्रत्येक कार्य अच्छे और बुरे परिवर्तन लाते है, समाज में रहते हुए हमारा रवैया कैसा है, इन्हें प्रत्येक व्यक्ति सोचे समझे, उपयुक्त सुझाव, दे सलाह दे,
समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वे अपने समाज के प्रत्येक बच्चों को बेहतर संस्कार, बेहतर सीख दे ताकि आने वाले पीढ़ी बेहतर नागरिक और बेहतर सामाजिक प्राणी बन सके, बिलकुल इस बात से यह सोचकर पीछे न हटे की बच्चों को बेहतर संस्कार देना सिर्फ मां बाप का कर्तव्य है , इन्हें सामाजिक चुनौती स्वीकार करें समाज के लोग इस बात से अवगत हो जाए की हमें हमारे समाज को बेहतर नागरिक की जरूरत है, और आने वाले प्रत्येक नागरिक को हम ही अच्छे संस्कारों, अच्छे विचारों से पुष्ट करेंगे, बेहतर नेतृत्व प्रदान करेंगे..

आशा है सभी को यह लेख समझ आए, समझना सभी चाहते है विशेष बातों की जानकारी के मिले बिना उन बातों की जानकारी व समझ पाना मुश्किल है,
जानकारी मिलने पर सोच विचार किया जा सकता है, सुधार के प्रयास भी किए जा सकते है....

सोच बदले, समाज बदले 
जिस तरीके से समाज की सेवा कर सको करते रहो...
बदलाव का मेरा एक प्रयास....


लिखेश्वर साहू
9669874209

बच्चों को समझे..

प्रणाम

आप सभी को सुबह का नमस्कार...

चित्र देखिए -एक बच्चा रेत उठाकर नीचे गिरा रहा है, दूसरा बच्चा डिब्बे में डालकर तीसरे को दे रहा है,तीसरा वाला ले जाकर दूसरी जगह रेत का ढेर बनाकर वापस आता है, दूसरे ढेर के पास एक बच्चा बैठा है और वहां से कंकड़ पत्थर उठाकर दूसरी जगह पर फेंक रहा है, उसके फेंकने से एक बच्चे को लग गया, उसने चिल्लाया,उनके ये खेल बड़े सुंदर लग रहे थे, मन आनंदित हो रहा था, उनकी चीख सुनकर  उधर से चिल्लाती हुई बच्चे की मां आई और अपने बच्चे को यह कहते हुई की तुझे कितनी बार कहा है की इन बच्चों के साथ मत खेला कर ये बच्चे बहुत शैतान है शैतान
इसके साथ रहोगे तो मारा पीटी  करते है, चलो घर चलो, बच्चा नहीं जाऊंगा करके रोने लगा, खेलूंगा, घर नहीं जाऊंगा ,बच्चा जिद्द करने लगा, मां ने बच्चे को एक थप्पड़ दिया, मर जा खेलता रह, मार खा इधर,धकेल दिया , बच्चे की मां को इस तरह कहते सुन व ऐसे करते देख बाकी बच्चे भाग खड़े हुए,और फिर थोड़ी देर बाद मां अपने बच्चे को गोद में उठाकर ले गई,मनाने लगी, बड़े प्रेम से उसके आंसू पोछने लगी और चुप कराते हुए यह कहने लगी की बेटे उनके साथ मत खेला करो वे बहुत गंदे बच्चे है मारा पीटी करते है, ऐसा अपने बच्चे को समझाने लगी...

पूरे दृश्य को देखिए

यहां बच्चे सभी मजे से खेल रहे थे उनके खेल बड़े ही मजेदार, सहयोगात्मक ढंग से लग रहे थे वे एक दूसरे से बिलकुल तालमेल बिठाकर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे,जिस तरीके से किसान लोग या अन्य काम करने वाले लोग करते है उसी तरीके से काम कर रहे थे, बहुत मजा भी आ रहा था उनकी कल्पनाओं का आनंद ही कुछ और था उनके संवाद सुनकर भी दिल गदगद हुआ जा रहा था, मजे और आनंद के साथ वे कार्य के तरीके, कार्य के दौरान की जाने वाली संवाद सीख रहे थे, बड़े ही अच्छे ढंग से वास्तविक तरीके से जो होता है अपने ढंग से वे कर रहे थे, अब उस बच्चे की मां को क्या मालूम की बच्चे क्या कर रहे है उन्हें लगा कि ये लोग तो धूल मिट्टी खेल रहे है सोच के बच्चे को जबरदस्ती की और रुला दिया,

 बच्चे खेल खेल में सीख रहे थे, उनकी मम्मी ने सीखने की प्रक्रिया पर व्यवधान डाला बच्चा रोने लगा, बच्चे की मां को यह देखना चाहिए था की बच्चे क्या कर रहे है, कही वे लड़ झगड़ तो नहीं रह रहे है, उनकी गतिविधियों का अवलोकन कर सकते थे,पर उन्हें बच्चे की, रुचि और की और उनके गतिविधियों की क्या परवाह उन्हें तो बच्चे का ब्राइट फ्यूचर चाहिए था जो एक जगह बिठाकर कॉपी और पेंसिल से होमवर्क कराकर हो सकता था, बच्चे इस तरीके से किताबी ज्ञान के लिए अपनी सृजनात्मकता को अपनी मौलिकता को खो देते है....

दूसरी बात अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए दूसरे बच्चों को नीचा क्यों दिखाए क्यों उन बच्चों को शैतान बोले, उनकी मानसिकता क्यों विकृत करें, हां उन बच्चों के साथ अपने बच्चे का आदत गलत हो रहा है तो अपने बच्चे को समझाओ उनसे दूर रखने का प्रयास प्रेम स्नेह से कीजिए उनको वो माहौल दीजिए और बच्चो को शैतान, गंदा ना बताए, नकारात्मकता ना फैलाए
उन बच्चों को भी सकारात्मक ढंग से बात कहा जा सकता है की अरे बच्चों अब तक खेल ही रहे हो, चलो आज के लिए हो गया, कल खेलेंगे सभी के मम्मी पापा चिंता कर रहे होंगे जाओ अपने अपने घर जाओ , होम वर्क करो ऐसा कहने से शायद आप बेहतर तरीके से बच्चों के मन में जगह भी बना लेंगे, और आपकी बात को बच्चे सुनेंगे भी, पर जबरदस्ती से बच्चे जबरदस्ती सीखेंगे, जिद्दी बनेंगे....

बच्चों से किसी कार्य को कराने के दो तरीके प्रेम या डर, प्रोत्साहन या सजा,  पुरस्कार  या दंड बेहतर हो की सब प्रेम, प्रोत्साहन से ही बच्चे को सिखाए, समझाए, बर्ताव करें, इनसे बच्चों के व्यवहार में सुधार संभव है....


लिखेश्वर साहू
9669874209

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

सकारात्मक रहे

एक दिन हम साथी लोग काम से फुर्सत हो कर सुस्ता रहे थे ,बात हो रही थी कुछ विशेष पदभार संभालने की, सभी लोग शायद मन में नई जिम्मेदारी मिलने को लेकर उत्साहित हो रहे थे, और हो भी क्यों ना ,नई जिम्मेदारी में नई उत्साह तो होगा ही ,कितना रोमांचक होगा नई जिम्मेदारी का वो सफर, कितना रोमांचक होगा वो दौर जब बहुत से लोगों के बीच एक नए ओहदे पर सम्मान पाएंगे, सभी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाने का जज्बा दिल में लिए तैयार थे, सभी को लगभग इंतजार था कि कब मिलेगी नई जिम्मेदारी , पर उस बीच एक ऐसा बंदा भी बैठा था जो उत्साहित तो था ही नही बल्कि उनकी बातों को सुनकर ऐसा लग रहा था कि ये व्यक्ति बिलकुल नकारात्मक विचार को लेकर बैठे हुए है और अपनी आने वाली जिम्मेदारियों से अभी से घबरा रहे है और जिम्मेदारी से मुक्त रहना चाहते है वे नहीं चाहते है की उसे नई जिम्मेदारी अतिरिक्त मिले, उसने कहा कि यदि मुझे उच्च पद दे दिया जाए तो मैं कैसे करूंगा, ये तो मेरा पहली बार होगा,हमने कहा अरे भाई आप तो जिम्मेदारी मिलने से पहले ही घबरा जाते है, हार मान लेते है ऐसे बोलोगे तो कैसा चलेगा फिर उसका जवाब आया भाई सोचों जिस काम को कभी किए नहीं रहोगे उसे कैसे कर पाओगे ,कर ही नहीं सकते, और यदि हमारे सहयोगी भी बिल्कुल अनभिज्ञ हो उस कार्य से तो हमारा और भी सिर दर्द हो जायेगा, उसने कहना जारी रखा मैं तो ये बात उच्च अधिकारी को बोल दूंगा की मैं तो कभी इस काम को किया नहीं हूं, और सहयोगी भी बिलकुल अंजान है, हो ही नहीं पायेगा करके,
हमने कहा यार ऐसे नकारात्मक विचार रखोगे तो कैसे चलेगा,
और इसके बाद जब आदेश आया तो उस बन्दे को उस पद से जिससे वह घबरा रहा था से मुक्त रखा गया ..
शायद उनके विचार वास्तविक रहे हो वो उस जिम्मेदारी के काबिल न रहे हो,उसके इस विचारों और उनके कई बार के बातों को सोचा तो लगा की ये घोर नकारात्मकता से घिरे हुए है और असल में वे इससे निकलना भी नहीं चाहते, जीवन के प्रत्येक छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बातों में उनकी नकारात्मकता झलकती है, उनके कार्य की गति बहुत धीमी पड़ चुकी है, चेहरे से तेज भी गायब हो चुकी है , ऊर्जा तो मानों शरीर से गायब ही हो रही है...
किसी भी कार्य के प्रति हमारे विचार सकारात्मक होने चाहिए
नकारात्मकता से भय, चिंता, गैर जिम्मेदारी आती है, जीवन नीरस होता है,
और सकारात्मकता से ऊर्जा,उत्साह, जिम्मेदारी, जीवन सुखद होता है...


लिखेश्वर साहू
9669874209

प्रकृति से सीखो

सुप्रभात
जय माता दी
आज की मंगल कामना के साथ आप सभी को प्रणाम, नमस्ते
सीखे प्रकृति से.. 
प्रकृति सबसे बड़ा विश्विद्यालय है, नैतिकता का, जीव विज्ञान का, भौतिक विज्ञान का, रसायन विज्ञान का, सामाजिक विज्ञान का, आध्यात्मिक, नैतिकता का यहां आप इन सारी विषयों का अध्ययन कर सकते है, सर्वोच्च सत्ता इस विश्वविद्यालय के संचालक है और हम सभी यहां अध्ययनकर्ता है, सभी प्राणी, पदार्थ, भौगोलिक , संरचनाएं, यहां अध्यापन कर्ता और संसाधन है, सीखने और समझने के ढेरों तरीके और अवसर यहां उपलब्ध है, आप जब चाहें तब यहां प्रवेश ले और अध्ययन शुरू करें,
यहां सीखने के लिए किसी कक्षा में जाकर बैठने की बाध्यता नहीं है पर यदि आपको बेहतर समझ चाहिए तो निर्धारित स्थल पर जाकर आपको अध्ययन करना होगा, अवलोकन, चिंतन, निरीक्षण, परीक्षण, भ्रमण ,प्रश्नोत्तर और अन्य सहायक गतिविधियों से आप अपना ज्ञान पुष्ट कर सकते है, स्व अनुशासन जरूरी है, स्व अनुशासन के बिना आपको यहां परेशानी हो सकती है, अनुशासन हीनता  कभी भी, कही भी,किसी को भी सफल नहीं कर सकती इसीलिए अनुशासन बनाए रखना है, जैसे समय की पाबंदी, उचित आहार व्यवहार, उपयुक्त वेशाभूषण, उपयुक्त समय, स्थान के अनुसार उपयुक्त आचरण बेहद जरूरी है,

सीखने के लिए बहती नदिया, स्थिर समुद्र, तालाब, पेड़ पौधे, सूर्य, चंद्रमा, तारे, आसमान, पर्वत, पठार, पशु पक्षी अनगिनत स्त्रोत है जिनसे आप बहुत कुछ सीख सकते है

बहती नदियों से सीखना निरंतर प्रगति करते रहना और अपने लक्ष्य तक पहुंचना,इसके साथ ही अपनी पवित्रता को बनाए रखना ,
समुद्र से धीरता, गंभीरता , अपनी रौद्र रूप को धारण किए हुए भी अनेकों प्राणियों को संरक्षण देना, 
नन्हें पौध से लेकर ऊंचे वृक्ष तक के सफर में कितनी तुफानों को झेलकर अपने को स्थिर साधे रखना कितना संघर्ष भरा है, ये ऊंचे लंबे वृक्षों से सीख लो,
फलों से लदी डालियों से सीखो की कैसे संपन्न और धनी होने के बावजूद विनम्रता पूर्वक जीवन जीना है, ओर कैसे अपने धन का उपयोग आवश्यक पड़ने पर परोपकार में लगाने चाहिए,
बेलों और लताओं से सीखो कैसे एक दूसरे पर आश्रित रहकर भी एक दूसरे को क्षति पहुंचाए बिना भी आगे बढ़ा जा सकता है और अपना मूल्य बनाया जा सकता है, यह जरूरी नहीं की अपना मूल्य और महत्व बनाए रखने के लिए दूसरों को जिन पर हम आश्रित है या फिर जो हम पर आश्रित है उन्हें नुकसान पहुंचाए,
अमर बेल परजीवी को देख यह सबक लो की यदि हम जिसके सहयोग से आगे बढ़ रहे है उन्हें नुकसान पहुंचाए तो एक दिन हमारा ही नुकसान होगा 
चंद्रमा और तारे पूरे संसार को प्रकाशित करते हैं,
विशाल ह्रदय वाली धरती मां जो पूरे, जीव,प्राणी, पदार्थ , मानव को अपने में धारण की है, और जो दुनिया की तमाम अत्याचारों, पापों को सहती हुई भी अपनी कर्तव्य निभा रही है...

सीखना जरूरी है 
सीखना  चाहिए 
सीखना ही होगा
बेहतर जीवन के लिए
मानवीय संस्कार के लिए
मानवीय व्यवहार के लिए

अपने जीवन के अमूल्य समय को खर्च कर आपने पढ़ा और इस लेख को मूल्यवान बनाया इसके लिए आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद,
मां का आशीर्वाद आप सब पर बना रहे..

वास्तव में किसी विचार,लेख का मूल्य तब होता है जब वह लोगों के जीवन में कोई मूल्य बनाएं, 
आप पढ़े और औरों को भी पढ़ाए 


 लिखेश्वर साहू
9669874209

रविवार, 15 अक्टूबर 2023

चिंतन

जय माता की
प्रणाम
शक्ति की भक्ति, आराधना और उपासना का पर्व जगत जननी प्रकृति स्वरूपा माता दुर्गा पूजन का पावन पर्व शारदेय नवरात्र आज प्रारंभ हो रहा है, आप सभी को शुभकामनाएं मां की भक्ति और आशीर्वाद आप सभी को मिलती रहे इस कामना के साथ आज का चिंतन आपके समक्ष ..
आज से लेकर नौ दिन तक लोग सुबह शाम मां अम्बे की पूजन अर्चन कर मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लेंगे, ये शक्ति की भक्ति, और भक्ति की शक्ति ही है जो पूरे नौ दिन और रात लोगों को निष्कलंक और पावन रखती है, नौ दिन की नवरात्रि का यह पावन पर्व मात्र नौ दिन में ही लोगों के मन से सारे राग, द्वेष बैर और बुरे कर्म, व्यसनों को तन मन से दूर कर शरीर और मन को पवित्र कर डालती है , काश जब तलक ये दुनिया हो तब तक भक्ति की शक्ति में लोगों का मन लगा रहे तो निश्चित ही संसार के सारे लोग निष्कपट और पवित्र हो जायेंगे, कोई किसी का दिल न दुखायेगा, कोई किसी से बैर न रखेंगे, लोग सात्विक भोजन ग्रहण करते रहेंगे, तमस को अपने तन मन से दूर रखेंगे,पर वे ही लोग शायद नहीं चाहते की हम पूरे जीवन काल मां की भक्ति करें, तन,मन, और आंगन को पावन रखे,अक्सर यह सोचता हूं की क्या व्यसनों को छोड़ना बहुत मुश्किल भरा काम है?, मुझे नहीं लगता यह बहुत मुश्किल भरा काम है, यदि मुश्किल भरा काम होता तो लोग शायद नौ दिन तक भी अपने को रोक कर नहीं रख पाते, यदि नौ दिन के पर्व तक अपने मन पर जिन लोगों ने काबू पा रखा है उस पर भला ऐसी कौन सी बुरी शक्ति है जो उन्हें पुनः अपने मार्ग से विचलित कर सकती है, मैं कहता हूं की ऐसी कोई भी बाह्य शक्ति नहीं है जिनकी इतनी साहस की वो किसी को अपने मार्ग से विचलित कर सके!
 यदि आप प्रकृति, दैवीय शक्ति, मातृ शक्ति पर विश्वास रखते है तो भी और यदि आप अपने विचारों की शक्ति पर विश्वास रखते है तो भी आपको को कोई बाह्य बुरी शक्ति प्रभावित नहीं कर सकती, ऐसा नवरात्र के नौ दिन की व्रत और उपासना से  देखने को मिलता है,लोग अक्सर कह देते है की मैं बुरे कर्म छोड़ना चाहता हूं पर इसने मुझे ऐसे जकड़ा है कि छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा, मैं कहूं तो बुरी लत उन लोगों को नहीं, बल्कि बुरी लत को लोगों ने पकड़ रखा है, और लोगों में इतनी क्षमता और शक्ति है की वे जब चाहे तब बुरी आदतों को छोड़ सकता है, सिर्फ मन में विचार हो और प्रबलता से हो जैसे नौ दिन के नवरात में होता है, यदि बुरे लतों को छोड़ना है तो पूरे जीवन को नवरात जैसा पावन मानों और अपने तन ,मन ,आंगन को पवित्र रखो, जिस श्रद्धा और विश्वास के साथ नौरात्रि में लोग सुबह 4 बजे उठकर स्नान ध्यान में लग जाते है और बिना अन्न जल ग्रहण किए ही नौ दिन रात्रि तक भजन सत्संग में रम जाते है वैसे ही पूरा जीवन को नवरात्रि माने और कर्म की पूजा, जन सेवा, जन कल्याण को ही मातृ सेवा माने, प्रत्येक प्राणी मात्र में प्रकृति शक्ति का दर्शन कर उनसे सद्भावना पूर्वक आचरण करें....

मां का आशीर्वाद आप सभी को मिलती रहे 

जय माता दी



लिखेश्वर साहू
सौंगा , मेघा 
9669874209



चिंतन

प्रणाम आप सभी को , 
आप सभी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ कहना चाहता हूं कि आप सभी के स्नेह आशीर्वाद और शुभकामनाओं से मैं भी ठीक हूं और इस वक्त हूं आप सभी के साथ ,जीवन चिंतन लेकर ,आपके साथ साझा करना चाहूंगा, आशा है सभी अपने जीवन का आनंद ले रहे है, खुशियों भरा जीवन जी रहे हैं , और क्यों ना जिए, जीवन जीने के लिए ही तो मिला है, जैसे चाहे जिए, मजे से जिए, हंसी खुशी जिए, सफलता को प्राप्त करते हुए जिए, हर दिन उत्साह से जिए, उन्नति करते रहे, खूब पैसा कमाएं, सहयोग करें, दान दे...
कुछ लोग तो ऐसे जीवन जीते है जैसे बिलकुल निराश हताश ,
कुछ पल की हताशा से हम पूरी जीवन की आशा क्यूं खोए, किसी परिस्थिति, किसी व्यक्ति की वजह से यदि आपको दुख तकलीफ है, तो उस दुःख को दूर करने का प्रयत्न करे, अक्सर लोग दुख दूर करने का प्रयास नहीं करके उस परिस्थिति को दोष देने लगते है, परिस्थिति को दोष देने से दुःख दूर नहीं हो सकता, इससे उस परिस्थिति के प्रति हमारे मन में खिन्नता और बढ़ती जायेगी और तकलीफ भी बढ़ता जायेगा,
सुख और दुःख दोनों भावनाएं है वस्तु नहीं, जिसे तोड़ा मरोड़ा जाएं ,फेंका जाए, ताला लगाकर छोड़ दिया जाए,
सुख और दुख मानसिकता की उपज है , सुख और दुख की अनुभूति हमें अपने मन से होती है, अपने मन को प्रशिक्षित करें, मन को समझाए,  विषम परिस्थिति में भी सम रहना सिखाएं बहुत खर्च और बहुत मेहनत की बात नहीं है, बस थोड़ा प्रयास करने से ये आसान होता जायेगा,


मन को समझने और समझाने का प्रयास जरूरी है....

आपने अपना अमूल्य समय लगाकर इस लेख को पढ़ा,
बहुत बहुत धन्यवाद 

लिखेश्वर साहू 





बुधवार, 22 मार्च 2023

शिक्षा का जोत जलाना है

अब ना तम रहने देंगे

अब ना जुल्म सहने सहने देंगे

हर बालक को दिव्य पुरूष, देवी बाला को बनाना है

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


जब पढ़ लेगा भारत का , 

हर बालक और बाला

 ज्येष्ठ बनेंगे ,श्रेष्ठ बनेंगे, 

होगा नव उजाला

अज्ञान को मिटाना है

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


मन में सबकी यह आशा, 

युग परिवर्तक हो भारत माता

विश्व गुरू कहलाना है

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


नवरात्रि की यह बेला सी, 

हर दिन हो नवरात यहाँ

आदर हो मातृ शक्ति का नीत , 

पूजे बालक बन भक्त यहाँ

यह भाव सबमें लाना है

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


जगमग दीपों सा “यश”, 

भारत का जगमग रहे सदा

हरे जंवारो सा लहराये , 


धरती की उर्वर संपदा

संकल्प हमें दोहराना है

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


रह ना जाए पीछे एक भी

पीने शिक्षा का अमर प्याला

कोने कोने में फैला दो

शिक्षा नीर की यह धारा

नव विकास जो लाना है 

लेकर किताब हाथों में शिक्षा का जोत जलाना है


लिखेश्वर साहू

ग्राम -सौंगा, पोष्ट-गिरौद

तह-मगरलोड़, 9669874209