बुधवार, 10 जनवरी 2024

आग को बढ़ते रहो.. डिस्टरबेंस को by कहो....

एक समय की बात है दो दोस्त थे एक का नाम हितेश और दूसरे का नाम नितेश, दोनों एक ही साथ पढ़ते थे, हितेश बड़े लगन से पढ़ाई किया करता था स्कूल में और घर में भी हितेश समयानुसार सारे कार्य कर लेता था, यथा समय खेलने कूदने और साथियों से मेल जोल भी रखता था। तब नितेश जो हमेशा इधर उधर गपशप की बातें करता था और हमेशा दूसरे को चिढ़ाने का काम करता था, नितेश हमेशा हितेश को किताबी कीड़ा, रट्टू तोता कह चिढ़ाता पर हितेश उनकी बातों को ध्यान नहीं देता था,समय बीतता गया दोनों ने 12 की पढ़ाई पूरी कर ली और आगे की पढ़ाई के लिए शहर चले गए दोनों अब अलग हो चुके थे। वे अपनी अपनी इच्छानुसार आगे बढ़ने लगे थे, हितेश का रवैया जैसा था वैसे बरकरार रहा, नितेश भी अब तक वही रवैया लिए चल रहा था, नितेश की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद से नितेश 3 साल से नौकरी की तलाश में भटक रहा था, और बेरोजगारी की मार झेल रहा था, वे अब निराश हताश से रहने लगे थे , एक सूचना मिली की एक बड़े कंपनी में नौकरी का ऑफर है वे अपने दस्तावेज लेकर इंटरव्यू देने के लिए निकले वहां जाकर वे अपनी बारी के इंतजार में लग गए उम्मीदवारों की लंबी कतार थी, हताश निराश नितेश के चेहरे पर बेचैनी बढ़ती जा रही थी, अचानक उसे पुराने दोस्त हितेश दिखे, नितेश ने उसे आवाज़ दी उनके पास गए उनसे पूछा आप हितेश हो न?हितेश ने भी उन्हें पहचान लिया उसने कहा हा मैं भीं तुम्हे पहचान लिया तुम नितेश हो नितेश ने कहा। मैं यहां इंटरव्यू देने आया हूं और आप भी, हितेश ने मुस्कराया कहा मैं आप से बाद में मिलता हूं और वहां से चला गया, थोड़ी देर बाद नितेश की बारी आई , हितेश को इंटरव्यूअर की खुर्सी पर देख उनके होश उड़ गए, भौंचक्के रह गए, इंटरव्यू ख़त्म होते ही चेहरे पर मायूसी छा गई, हितेश की कंपनी के लिए इंटरव्यू में नितेश फेल हो गया, उसने रोनी सूरत बनाते हितेश की ओर देखा और नौकरी के लिए विनती की 3 साल से नौकरी की तलाश में हूं कही भी नहीं मिल रहा आपकी बड़ी कृपया होगी, हितेश ने कहा देखो नितेश मुझे अपनी कंपनी के लिए ऐसे लोग चाहिए जो एक दूसरे को प्रोत्साहित करें, वे आपस में सहयोग करते हुए काम करें, किसी को उनके काम से डिस्टर्ब ना करे, किसी को उनके मार्ग से विचलित ना करें.. नितेश का सिर शर्म से झुक गया वह मायूस चेहरा लेकर दफ्तर से निकल पड़ा, उन्हें समझ आ चुका था की किसी दूसरे का मजाक बनाना किसी को किसी के काम में डिस्टर्ब करना किसी को बाधा में डालना अच्छी बात नहीं इनसे हमारा ही नुकसान होगा...



लिखेश्वर
9669874209

सोमवार, 8 जनवरी 2024

कृतज्ञता

कितना अद्भुत है ना यह पूरी श्रृष्टि, कितने मनमोहक है ना यहां के नजारे, सुंदर और मनोरम यहां के नजारे हमें आह्लादित करते है, सोचकर देखे हमें बेहतर जीवन जीने के सारे संसाधन यहां मौजूद है, रहने को घर, खाने को फल, पीने का पानी, पहनने को वस्त्र, श्रृंगार के लिए आभूषण,हमारा जीवन कितना आसान और सुखमय हो गया है प्रकृति की कृपा से, देखने के लिए सुंदर दृश्य, सुनने को प्राकृतिक संगीत, सैर करने के लिए मोहक वादियां भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध है, सहयोगी और सुरक्षा के लिए हमारे परिवार और समाज, संगी साथी है, मार्गदर्शन के लिए हमारे  वरिष्ठ जन और शिक्षक लोग है, पूरी की पूरी श्रृष्टि हमें बेहतरीन और सुखद अनुभव दे रही है ऐसे सुखद और सरस अनुकम्पा के लिए हम प्रकृति को, इस ब्रह्मांड को कुछ देना चाहे तो क्या दे सकते है ?है कुछ चीजें अपने पास जो बदले में दिया जा सके जो इन समस्त बहुमूल्य उपहारों के तुल्य हो , नहीं , पर कृतज्ञता का भाव तो रखा ही जा सकता है, हम कृतज्ञता व्यक्त तो कर ही सकते है जिसके लिए न तो रुपिया, पैसा, साधन संसाधन, ना विशेष जगह, ना विशेष समय की आवश्यकता है और ना ही विशेष, शब्दों की आवश्यकता है, हमें बस धन्यवाद देना है उन सब चीजों के लिए जो हमें हमारे जीवन में मिला है, तो आइए धन्यवाद करें.....

धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
सुखद जीवन के लिए धन्यवाद
सुंदर नजरो और नजारों के लिए धन्यवाद
मधुर वाणी के लिए धन्यवाद जिनसे हम खुद को व्यक्त करते हैं 
सुनने के लिए मिले कानों के लिए धन्यवाद जिनसे हम सुंदर नाद सुन पाते है
सहृदयता के लिए धन्यवाद जिनसे हम किसी के प्रति सहृदय हो जाते हैं 
मस्तिष्क व स्मरण शक्ति के लिए धन्यवाद जिनसे हम कुछ याद कर पाते हैं और भूल जाते हैं 
पैरो के लिए धन्यवाद जो हमें इस धरा पर साधे हुए हैं 
हमारे उन हाथों के लिए धन्यवाद जो हमें किसी कार्य को पूरा करता है 
जिव्हा के लिए धन्यवाद बेहतर स्वाद का आनंद देता है 
नासिका के लिए धन्यवाद जो हमे सुंदर और सुगंध की अनुभूति देता है 
त्वचा के लिए धन्यवाद जो हमें सुरक्षा करता है, हमें स्पर्श का अहसास कराता है..
प्रेम और स्नेह के लिए धन्यवाद जिनसे हम एक दूसरे से जुड़ पाते हैं 
विश्वास के लिए धन्यवाद जिनसे हम एक दूसरे के साथ मिलकर कोई काम पूरा कर पाते हैं 
ऊर्जा के लिए धन्यवाद जो हमारे शरीर को और मन को चलाता है 
प्राणवायु के लिए धन्यवाद जिनसे हमारा जीवन हैं..
उन समस्त संसाधनों, समस्त जीवों, प्राणियों, समस्त मानवों, समस्त घटकों , समस्त ग्रहों, नक्षत्रों,  स्वयं के अंतरभावो व समस्त कारकों का धन्यवाद जिनसे यह जीवन सुचारू रूप से चलता है,  और आशा है आगे भी चलता रहेगा....
एक बार पुनः 
धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
मैं कृतज्ञ हूं, मैं आभारी हूं, मैं ऋणी हूं, 
मेरा यह कृतज्ञता और आभार स्वीकार हो....


लिखेश्वर साहू
9669874209