सुप्रभात
जय माता दी
आज की मंगल कामना के साथ आप सभी को प्रणाम, नमस्ते
सीखे प्रकृति से..
प्रकृति सबसे बड़ा विश्विद्यालय है, नैतिकता का, जीव विज्ञान का, भौतिक विज्ञान का, रसायन विज्ञान का, सामाजिक विज्ञान का, आध्यात्मिक, नैतिकता का यहां आप इन सारी विषयों का अध्ययन कर सकते है, सर्वोच्च सत्ता इस विश्वविद्यालय के संचालक है और हम सभी यहां अध्ययनकर्ता है, सभी प्राणी, पदार्थ, भौगोलिक , संरचनाएं, यहां अध्यापन कर्ता और संसाधन है, सीखने और समझने के ढेरों तरीके और अवसर यहां उपलब्ध है, आप जब चाहें तब यहां प्रवेश ले और अध्ययन शुरू करें,
यहां सीखने के लिए किसी कक्षा में जाकर बैठने की बाध्यता नहीं है पर यदि आपको बेहतर समझ चाहिए तो निर्धारित स्थल पर जाकर आपको अध्ययन करना होगा, अवलोकन, चिंतन, निरीक्षण, परीक्षण, भ्रमण ,प्रश्नोत्तर और अन्य सहायक गतिविधियों से आप अपना ज्ञान पुष्ट कर सकते है, स्व अनुशासन जरूरी है, स्व अनुशासन के बिना आपको यहां परेशानी हो सकती है, अनुशासन हीनता कभी भी, कही भी,किसी को भी सफल नहीं कर सकती इसीलिए अनुशासन बनाए रखना है, जैसे समय की पाबंदी, उचित आहार व्यवहार, उपयुक्त वेशाभूषण, उपयुक्त समय, स्थान के अनुसार उपयुक्त आचरण बेहद जरूरी है,
सीखने के लिए बहती नदिया, स्थिर समुद्र, तालाब, पेड़ पौधे, सूर्य, चंद्रमा, तारे, आसमान, पर्वत, पठार, पशु पक्षी अनगिनत स्त्रोत है जिनसे आप बहुत कुछ सीख सकते है
बहती नदियों से सीखना निरंतर प्रगति करते रहना और अपने लक्ष्य तक पहुंचना,इसके साथ ही अपनी पवित्रता को बनाए रखना ,
समुद्र से धीरता, गंभीरता , अपनी रौद्र रूप को धारण किए हुए भी अनेकों प्राणियों को संरक्षण देना,
नन्हें पौध से लेकर ऊंचे वृक्ष तक के सफर में कितनी तुफानों को झेलकर अपने को स्थिर साधे रखना कितना संघर्ष भरा है, ये ऊंचे लंबे वृक्षों से सीख लो,
फलों से लदी डालियों से सीखो की कैसे संपन्न और धनी होने के बावजूद विनम्रता पूर्वक जीवन जीना है, ओर कैसे अपने धन का उपयोग आवश्यक पड़ने पर परोपकार में लगाने चाहिए,
बेलों और लताओं से सीखो कैसे एक दूसरे पर आश्रित रहकर भी एक दूसरे को क्षति पहुंचाए बिना भी आगे बढ़ा जा सकता है और अपना मूल्य बनाया जा सकता है, यह जरूरी नहीं की अपना मूल्य और महत्व बनाए रखने के लिए दूसरों को जिन पर हम आश्रित है या फिर जो हम पर आश्रित है उन्हें नुकसान पहुंचाए,
अमर बेल परजीवी को देख यह सबक लो की यदि हम जिसके सहयोग से आगे बढ़ रहे है उन्हें नुकसान पहुंचाए तो एक दिन हमारा ही नुकसान होगा
चंद्रमा और तारे पूरे संसार को प्रकाशित करते हैं,
विशाल ह्रदय वाली धरती मां जो पूरे, जीव,प्राणी, पदार्थ , मानव को अपने में धारण की है, और जो दुनिया की तमाम अत्याचारों, पापों को सहती हुई भी अपनी कर्तव्य निभा रही है...
सीखना जरूरी है
सीखना चाहिए
सीखना ही होगा
बेहतर जीवन के लिए
मानवीय संस्कार के लिए
मानवीय व्यवहार के लिए
अपने जीवन के अमूल्य समय को खर्च कर आपने पढ़ा और इस लेख को मूल्यवान बनाया इसके लिए आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद,
मां का आशीर्वाद आप सब पर बना रहे..
वास्तव में किसी विचार,लेख का मूल्य तब होता है जब वह लोगों के जीवन में कोई मूल्य बनाएं,
आप पढ़े और औरों को भी पढ़ाए
लिखेश्वर साहू
9669874209
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