गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

मनके जोड़ने का प्रयास, माला बन मिली सफलता..


अक्सर ऐसा होता है की जब हम कुछ कार्य कर रहे होते है और अकेले ही कर रहे होते है और कार्य बहुत बड़ा होता है और सामूहिक रूप से करने पर ही पूर्णता संभव हो,उस समय हमारे मन में उथल पुथल होते रहता है की करूं या ना करूं , मैं अकेला कैसे यह कर पाऊंगा, नहीं हो पाएगा, और कोई अन्य व्यक्ति जब यह कहता है की ये क्या कर रहे हो, ऐसे नहीं हो सकता ,ये अकेले का काम नहीं है, सबको सुधारना तेरे से नहीं हो पाएगा किसको किसको सुधारते रहोगे, सबका दिमाग एक जैसा नहीं होता, तब उस समय तो स्थिति एकदम और समझ से बाहर होने लगता है हताशा छा जाती है और हम उस कार्य को छोड़ने की सोच लेते है और छोड़ भी देते है, तब होता क्या है, आपका प्रयास असफल हो जाता है, लेकिन यदि आप उस कार्य को करते रहते है तो आपका प्रयास जारी रहता है,
देखिए कोई बात आप को समझ आया, आपने दूसरे को समझाया वो नहीं समझा, तीसरे को समझाया,वो भी नहीं समझा और चौथे को समझाया, उसे लगा इनकी बात तो ठीक है ये बिल्कुल सही कह रहा है, ऐसा कह कर वो आपके साथ हो जाता है ,ऐसे ही हरेक चौथा भी आपकी बात मान कर आपके साथ हो लेता है तो आपको आपका कार्य पूर्ण हो जाता है,
एक उदाहरण से आप इसे समझने का प्रयास करें कि आपको एक माला बनाने की जिम्मेदारी दी गई है और आपको फूलों के ढेर से फूल बिनकर माला बनाने होंगे,तो आप क्या करेंगे? आप एक एक फूल उठाकर माला बनाने शुरू करेंगे, आपने माला बनाना शुरू किया एक एक फूल को बड़े लगन से आप पिरो रहे है, कुछ फूल टूट टूट कर नीचे गिर रहे है आप क्या करेंगे,आप उनकी जगह फिर नए फूल डालेंगे और उस माला पिरोने के कार्य को पूर्ण कर लेंगे...

ठीक इसी तरह अपने जीवन को भी समझिए यहां भी आपको वही जिम्मेदारी है, आप,हताश निराश होकर कार्य नहीं छोड़िए , एक एक फूल पिरोते रहिए , माला बनकर तैयार हो जाएगा...


लिखेश्वर साहू
9669874209


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