प्रणाम
आप सभी को सुबह का नमस्कार...
चित्र देखिए -एक बच्चा रेत उठाकर नीचे गिरा रहा है, दूसरा बच्चा डिब्बे में डालकर तीसरे को दे रहा है,तीसरा वाला ले जाकर दूसरी जगह रेत का ढेर बनाकर वापस आता है, दूसरे ढेर के पास एक बच्चा बैठा है और वहां से कंकड़ पत्थर उठाकर दूसरी जगह पर फेंक रहा है, उसके फेंकने से एक बच्चे को लग गया, उसने चिल्लाया,उनके ये खेल बड़े सुंदर लग रहे थे, मन आनंदित हो रहा था, उनकी चीख सुनकर उधर से चिल्लाती हुई बच्चे की मां आई और अपने बच्चे को यह कहते हुई की तुझे कितनी बार कहा है की इन बच्चों के साथ मत खेला कर ये बच्चे बहुत शैतान है शैतान
इसके साथ रहोगे तो मारा पीटी करते है, चलो घर चलो, बच्चा नहीं जाऊंगा करके रोने लगा, खेलूंगा, घर नहीं जाऊंगा ,बच्चा जिद्द करने लगा, मां ने बच्चे को एक थप्पड़ दिया, मर जा खेलता रह, मार खा इधर,धकेल दिया , बच्चे की मां को इस तरह कहते सुन व ऐसे करते देख बाकी बच्चे भाग खड़े हुए,और फिर थोड़ी देर बाद मां अपने बच्चे को गोद में उठाकर ले गई,मनाने लगी, बड़े प्रेम से उसके आंसू पोछने लगी और चुप कराते हुए यह कहने लगी की बेटे उनके साथ मत खेला करो वे बहुत गंदे बच्चे है मारा पीटी करते है, ऐसा अपने बच्चे को समझाने लगी...
पूरे दृश्य को देखिए
यहां बच्चे सभी मजे से खेल रहे थे उनके खेल बड़े ही मजेदार, सहयोगात्मक ढंग से लग रहे थे वे एक दूसरे से बिलकुल तालमेल बिठाकर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे,जिस तरीके से किसान लोग या अन्य काम करने वाले लोग करते है उसी तरीके से काम कर रहे थे, बहुत मजा भी आ रहा था उनकी कल्पनाओं का आनंद ही कुछ और था उनके संवाद सुनकर भी दिल गदगद हुआ जा रहा था, मजे और आनंद के साथ वे कार्य के तरीके, कार्य के दौरान की जाने वाली संवाद सीख रहे थे, बड़े ही अच्छे ढंग से वास्तविक तरीके से जो होता है अपने ढंग से वे कर रहे थे, अब उस बच्चे की मां को क्या मालूम की बच्चे क्या कर रहे है उन्हें लगा कि ये लोग तो धूल मिट्टी खेल रहे है सोच के बच्चे को जबरदस्ती की और रुला दिया,
बच्चे खेल खेल में सीख रहे थे, उनकी मम्मी ने सीखने की प्रक्रिया पर व्यवधान डाला बच्चा रोने लगा, बच्चे की मां को यह देखना चाहिए था की बच्चे क्या कर रहे है, कही वे लड़ झगड़ तो नहीं रह रहे है, उनकी गतिविधियों का अवलोकन कर सकते थे,पर उन्हें बच्चे की, रुचि और की और उनके गतिविधियों की क्या परवाह उन्हें तो बच्चे का ब्राइट फ्यूचर चाहिए था जो एक जगह बिठाकर कॉपी और पेंसिल से होमवर्क कराकर हो सकता था, बच्चे इस तरीके से किताबी ज्ञान के लिए अपनी सृजनात्मकता को अपनी मौलिकता को खो देते है....
दूसरी बात अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए दूसरे बच्चों को नीचा क्यों दिखाए क्यों उन बच्चों को शैतान बोले, उनकी मानसिकता क्यों विकृत करें, हां उन बच्चों के साथ अपने बच्चे का आदत गलत हो रहा है तो अपने बच्चे को समझाओ उनसे दूर रखने का प्रयास प्रेम स्नेह से कीजिए उनको वो माहौल दीजिए और बच्चो को शैतान, गंदा ना बताए, नकारात्मकता ना फैलाए
उन बच्चों को भी सकारात्मक ढंग से बात कहा जा सकता है की अरे बच्चों अब तक खेल ही रहे हो, चलो आज के लिए हो गया, कल खेलेंगे सभी के मम्मी पापा चिंता कर रहे होंगे जाओ अपने अपने घर जाओ , होम वर्क करो ऐसा कहने से शायद आप बेहतर तरीके से बच्चों के मन में जगह भी बना लेंगे, और आपकी बात को बच्चे सुनेंगे भी, पर जबरदस्ती से बच्चे जबरदस्ती सीखेंगे, जिद्दी बनेंगे....
बच्चों से किसी कार्य को कराने के दो तरीके प्रेम या डर, प्रोत्साहन या सजा, पुरस्कार या दंड बेहतर हो की सब प्रेम, प्रोत्साहन से ही बच्चे को सिखाए, समझाए, बर्ताव करें, इनसे बच्चों के व्यवहार में सुधार संभव है....
लिखेश्वर साहू
9669874209
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