गुरुवार, 31 दिसंबर 2020
एसो नवा साल मनाव
गुरुवार, 19 नवंबर 2020
दारू,गुटखा के पाछू झन भागव
जागव जी जागव
दारू,गुटखा के पाछू झन भागव
तुमन सोंचथव रमंज के गुटखा दाढ़ा में दाबत हो
फेर मंय कहिंथव गुटखा नहीं तुमन अपन भविश्य ल चाबत हो
एक ठन सौघे मुठिया तो मुंहु में नई हमाथे
फेर कोन %जागव जी जागव
दारू गुटखा के पाछू झन भागव
मंदहा मनके गोठ गजब लहराथे
थोड़किन पीके बड़े बड़े गोठियाथे
बोलना हे त सादा में बोलना
काके टेंसन हे चल भेद खोलना
टेंसन हे कहिके बहाना बनाथो
मेहनत के पइसा दारू में बोहाथो
दारू में बुड़े ले नेक बिचार हर सिराथे
मनखे के बनेे बेवहार हर गंवाथे
मन ल अपन नेक रस्ता मां लावव
जागव जी जागव
दारू गुटखा के पाछू झन भागव
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा, पोस्ट-गिरौद
तह-मगरलोड़, जिला-धमतरी
मो.नं. 9669874209
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020
वाह क्या जमाना है ?
वाह क्या जमाना है ? वाह क्या जमाना है ?
उंचे नीचे मकान पर ,हर चैक चैराहों और दुकान परहो खचाखच भीड़ या ,दूर श्मसान पर
और तो और सबकी ही जुबान पर
हर पल यही तराना है ,वाह क्या जमाना है
मेहनत करे मजदूर किसान
रोटी बनाने गूंथे पिसान
फिर नेता हो या हो अधिकारी
ठगसाधु , दलाल और भिखारी
सबको घूम-घूम के खाना है।
वाह क्या जमाना है ? वाह क्या जमाना है ?
बदमाशों का पहरा है
बदमाशोंका खेल है।
चोर उचक्कों की गद्दी
संतो का जेल है।
यही हकीकत यही फसाना है।
वाह क्या जमाना है ? वाह क्या जमाना है ?
जनता बेहाल
नेता खुशहाल
मेहनत कस किसान गरीब है
भूख से तड़पता मजदूर बदनसीब है।
हर डगर हर राहों पर
झूठ का अफसाना है।
वाह क्या जमाना है ? वाह क्या जमाना है ?
सिनेमा जगत का तो अंदाज ही निराला है
क्यूंकि गुरू गोविंदा ने कहा वक्त बदलने वाला है।
वही बात युवा पीढ़ी ने माना है।
वाह क्या जमाना है ? वाह क्या जमाना है ?
लिखेश्वर साहू
ग्राम -सौंगा, पोष्ट-गिरौद
तह-मगरलोड़, 9669874209
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020
मँय गंवइहा अँव गा
पाठक संगवारी मन ला जय जोहार
प्रस्तुत हे मोर छोटे से प्रयास.....
बासी चटनी के खवइया मँय गँवइहा अँव गा
पेज पसिया के पिवईया मँय गंवइहा अँव गा
`
अन्न उपजावव मँय का नदिया कछार म
सगरो जग के मँय पालन करइया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
गांवव गीत सुघर बइठे तरिया के पार म
बंशी के तान सुनले नरवा नदिया के पार म
धेनु के चरइया मँय कन्हैया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
माड़ी ले पटकु पागा परय मोर माथ म
जग के तकदीर हा हवय मोर हाथ म
सरम, करम ले मँय जग के सिरजइया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
अख्खड़ अनगढ़हा कतको कहिथे अज्ञानी
कखरो बर देहाती हम तो सीधवा परानी
कहि ले ता कहानी सुने ददरिया अँव गाबासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
पेज पसिया के पिवईया मँय गंवइहा अँव गा
लिखेश्वर साहू
ग्राम -सौंगा, पोष्ट-गिरौद
तह-मगरलोड़, 9669874209
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020
तुमन तो नेता हरव गा
तुमन तो नेता हरव गा
तुही मन तो धरती के बेटा हरव गा
जम्मो जिनिस के जनकारी तुमन ला
तुमन तो सरब ज्ञेता हरव गा
तुमन ता नेता हरव गा
ऊंच नीच के भान तुमन ला
जाति-धरम के ज्ञान तुमन ला
अमीर-गरीब के चिन्हईयां तुमन
विकास के रद्दा गढ़ईया तुमन
तुमन तो रण बिजेता हरव गा
तुमन तो नेता हरव गा
प्रजा तुंहर हमन हरन , राजा हमर तुमन
धरके अर्जी फार्म हमन, आघू पीछू हमन
घुमन
हमन हा ठेलहा बइठइया तुही मन तो
करमइता हरव गा
तुमन तो नेता हरव गा
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा,पोस्ट-गिरौद,
तह-मगरलोड़ ,जिला-धमतरी
9669874209
शुक्रवार, 19 जून 2020
मैंने शहर देखा है
मैंने शहर देखा है मैंने शहर देखा है
गांव से दूर ,
शोर गुल से भरपूर
स्वच्छ पानी को तरसता
उद्योगेा से धूल बरसता
लोगेां में प्रदूषण का कहर देखा है.
मैंने शहर देखा है
बिजली की कमी नही ,
सुविधा का मोहताज नहीं
यही है एक वजह
जहां चांदनी रात की जगह
बिजली के बल्बों से चमकता वो रात का पहर देखा है
मैंने शहर देखा है
शहर की नालियों में ,
‘म्युनिसिपल’ की गाडियों में
शराब की दुकान में
लोगेां की जुबान में
भरा मैंने वो जहर देखा है
मैंने शहर देखा है
भीड़ होते हुए भी तनहाई है,
ये कैसी पहुनाई है
पता नहीं कौन, कौन है
सभी चुप सभी मौन है
अविश्वास से भरा वो नगर देखा है
मैंने शहर देखा है
सरपट दौड़ती वो गाड़ियां
वो मोटरसाइकिल की खिलाड़ियां
वो स्टंट के जाबांज
वो पों पे की आवाज
कठिनाइयों भरा वो डगर देखा है
मैंने शहर देखा है
वो मौसम त्यौहारों का
वो हुस्न बहारों का
ईद,क्रिसमस, होली के रंगो में,
हिदु,मुसलमान,सिख ,इसाई के दंगों में
बरसता वो कहर देखा है
मैंने शहर देखा है
लिखेश्वर साहू
बुधवार, 3 जून 2020
यादें बचपन की
शनिवार, 16 मई 2020
ये कइसन हाेथे आज
ये कइसन होथे आज समारू.. संगवारी हो ए कविता मां आज के सामाजिक,राजनितिक दशा रखे के परयास करत हंव, आज गांव ,समाज, में अइसन परिस्थिति देखे सुने बर मिलथे. संगवारी हो कविता ला पढ़व, गुनव , समझव अउ शेयर करव अउ हां ए कविता मं कहूं खंगे होही, कहूं बढ़के लिखाय होही एला बताय बर मत भुलांहू.....
ये कइसन होथे आज ? समारू कुछ समझ नई आये !
कोन रद्दा मां रेंगत हे मनखे, कोन हा रद्दा देखाये?
बंद मुंहु हे,कान मुंदाये, आंखी मां टोपा बंधाये
आज के मनखे गांधी बेंदरा के उलटा अरथ बताये
गांधी कहिस हे बुरा मत देखव, बुरा कहव झन सुनव
होवन दे दुनिया में जे होवत हे , रद्दा अपन रेंगव
मनखे जोड़े गजब के हाना कइथे ज्ञानी मन बताये हे
नशा पान कर गद्दी बइठे दुनिया ल इही समझाये
जो होवत हे अच्छा होवत हे जो होही अच्छा होही
मंय कहिथंव फेर कब तक दुनिया मं अइसन घटना होही?
लबरा, चोरहा, मंदहा, गंजहा बनके चतुर सुजान
आज कइसे ज्ञान बताथे बन गेहे सियान
कहिथे बात गांव विकास के ए विकास का होथे ?
चोरी होवत हे भुईयां घलो हा, का सियान मन सोथे ?
नारी बनगे बिचारी खोवत हे मान सम्मान
चल जवाब ला देबे आके कहां लुकाये सियान?
बुड़त हे बस्ती मंद मउहां में लईका लईका होवत नशेड़ी
तै विकास बर सियान बने हस का ? फेर का बंधाये हे बेड़ी ?
लईका मन पढ़ई छोड़त हे धरत हे अनित के रद्दा
गली खोर मां उछरत रेंगे बकत हे गंदा गंदा
दाई बहिनी के इज्जत हा फोकट मं नई हे आये
कोन समझाये ये लोगन ला जब सियान हबे बउराये
दिखथे पईसा , देखाथे पईसा होगे हे हाय पईसा
मिलगे पईसा, खाके अइड़सा बनके बइठे भईंसा
कतको बोल कतको समझाले तभो समझ नई आये
भइंसा के आघू बिन बजा फेर भईंसा रहे पघुराये
बिन पईसा वाला काम नई होवे ,कछु नई होवय सेवा
तुरते काम होवत हे इहां जब मिलत हे मेवा
जब तक अंधेरगरदी विचार अइसन, ए दुनिया में होही
अंधरा में कनवा राजा होही, परजा जम्मो रोही
चलव रे भईया जागव ,अब अइसन नई करना हे
मिल जुल के सुमत ले हमला विकास के रद्दा धरना हे
लिखेश्वर साहू
9669874209
बुधवार, 6 मई 2020
छत्तीसगढ़ी कविता
बिगन मास्क के कोरोना से लड़े बर तैयार हे
ऐती ओती मत जाव, घेरी बेरी सरकार चेतावथे ,
फेर हुशियार मन एक नई सुने़, जेती नी जाना हे उहितीच जावथे
कतको बरजिस़, कतको हरजिस ,चाैंक में नी सकलाना हे
हम सब ला मिल के कोरोना ला भगाना हे
जनता समझदार हे सब समझगे
सरकार के बात कागज मं अरहजगे
चाैंक चाैराहा में जम्मो सकलावथे
जम्मोझन मिलजुल के कोरोना ला भगावथे
लाॅकडाउन हा मजा होगे ,आलसी अउ अलाल बर,
सजा होगे एहा करमइता रामलाल बर
जेब होगे खाली ,घर में बाई हा खिसियावथे
घर में खुसरे खुसरे चांउर दार हा सिरावथे
लाॅकडाउन में सरकार के नियम कइसा कइसा
फोकट में चांउर ,नून, फोकट में पइसा
थोरको होगे कमी ,नियम कानून ला बतावथे
अपन जिम्मेदारी समझत नइहे
दूसर ला सिखावथे
लाॅकडाउन में सब बेरोजगार हे
बिना पइसा के सब हाहाकार हे
सरकार ला होगे बड़े जिम्मेदारी
एक डहर कोरोना, ता दूसरा बेरोजगारी
बेरोजगारी दूर करे बर ,मनरेगा खोलवाइस
खुलगे गोदी जम्मो एके जगह जुरियाइस
कम नई होहे अभी कोरोना के खतरा
पहिनव मास्क, एके जगा मतरा
कहां मानत हे कोनो कखरो बात ला
कोन हा धोवत हे साबुन में अपन हाथ ला
सुन जी समारू़, तहू सुन जी फिरता
सबके सुवास्थ अउ रोजगार के सरकार ल हे चिंता
फिकर हेाही तुंहला, कहूं अपन परिवार के स्वास्थ्य के
पहिरव मास्क़,एक-दूसर ले दूरी रखव पांच हाथ के
तभे तो भगाबो हमन कोरोना महामारी
गांव, समाज, देश सुरक्षित रहय संगवारी
9669874209
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नन्हें हाथों से चित्रित नन्हा हाथ — और हाथ में पेड़: एक सीख, एक संदेश “Save Tree” आज मेरे बेटे ने एक चित्र की नकल की — मोबाइल पर...
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🌍🌦️ --- "मेरे बेटे ने बनाया चित्र, चित्र में समाया पृथ्वी और जल चक्र का संदेश" बच्चों की कल्पनाएं अक्सर हमें जीवन क...
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साथियों नमस्कार, नशा आज हमारे समाज और देश की गंभीर समस्या बन चुकी है, भारत का भविष्य कहे जाने वाले हमारे युवा वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित...




