बुधवार, 5 नवंबर 2025

एक सीख, एक संदेश” "Save Tree"


नन्हें हाथों से चित्रित नन्हा हाथ — और हाथ में पेड़: एक सीख, एक संदेश

“Save Tree”

आज मेरे बेटे ने एक चित्र की नकल की — मोबाइल पर देखे गए एक चित्र को अपने हाथों से दोहराया। यह केवल नकल नहीं थी, बल्कि नकल से अकल की ओर पहला कदम था। उस चित्र में एक हरा-भरा वृक्ष है, जिसे एक हाथ सहेज रहा है — जीवन का प्रतीक, और संरक्षण, स्नेह व जिम्मेदारी का संदेश।

नीचे लिखा है: “Save Tree” — एक छोटा सा वाक्य, लेकिन बड़ा संदेश।

मेरे बेटे ने यह चित्र ध्यानपूर्वक देखा, रंगों को समझा, और अपने हाथों से उसे दोहराया। यह प्रक्रिया अनुकरण से आत्मसात की ओर बढ़ती है।

“हर कलाकार कभी नकल से शुरू करता है — लेकिन जब भाव जुड़ते हैं, तो वही नकल रचना बन जाती है।”

जब मैंने यह चित्र देखा, तो मुझे गर्व हुआ — कि मेरा बेटा न केवल कला सीख रहा है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी महसूस कर रहा है। उसने जो देखा, उसे अपने हाथों से दोहराया — और उस प्रक्रिया में उसने संवेदना को छुआ।

एक पिता और शिक्षक के नज़रिए से, यह चित्र केवल एक नकल अभ्यास नहीं — बल्कि एक संकेत है कि बच्चे कैसे सीखते हैं, कैसे सोचते हैं, और कैसे धीरे-धीरे नकल से मौलिकता की ओर बढ़ते हैं। आइए हम बच्चों की हर कोशिश को सराहें — क्योंकि हर रेखा, हर रंग, एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।

इस चित्र को साझा करने का मेरा सिर्फ़ इतना स्वार्थ है — मैं चाहता हूँ कि इसका संदेश “Save Tree” अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। साथ ही, यह संदेश उन अभिभावकों तक भी पहुँचे जो अपने बच्चों को सही राह पर ले जाना चाहते हैं।

आप ही हैं जो अपने बच्चों को उस पथ पर ले जा सकते हैं जहाँ वे पहुँचना चाहते हैं — या जहाँ आप उन्हें पहुँचाना चाहते हैं। उन्हें अभिव्यक्ति का अवसर दें, उनके कार्यों को सराहें, उनकी त्रुटियों पर मार्गदर्शन करें, और उनमें आत्मविश्वास जागृत करें।


लिखेश्वर साहू  
ग्राम – सौंगा, पोस्ट – गिरौद  
तहसील – मगरलोड, जिला – धमतरी  
छत्तीसगढ़



मंगलवार, 4 नवंबर 2025

चित्र में समाया पृथ्वी और जल चक्र का संदेश"

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"मेरे बेटे ने बनाया चित्र, चित्र में समाया पृथ्वी और जल चक्र का संदेश"

बच्चों की कल्पनाएं अक्सर हमें जीवन के बड़े संदेश सरलता से समझा देती हैं। आज मैं आपसे साझा कर रहा हूँ एक खास चित्र — जिसे मेरे बेटे ने अपने हाथों इसे स्वयं बनाया है।  

 इस चित्र में पृथ्वी को एक प्याले की तरह दर्शाया गया है, जिसमें हरियाली उग रही है। ऊपर सूरज, बादल और बारिश के बूंदों के साथ जल चक्र को दर्शाया गया है। यह चित्र न सिर्फ रंगों से भरा है, बल्कि प्रकृति के संतुलन और जीवन के चक्र को भी दर्शाता है।  

 यह चित्र हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी और जल का संरक्षण हम सभी के भविष्य के लिए कितना जरूरी है।   

 CHHAVI art — यही नाम उसने अपने चित्र के नीचे लिखा है, और यही नाम उसकी रचनात्मकता का परिचय है।

अपने पुत्र की इस चित्रकारी पर मैं बहुत प्रसन्न हूं, मैं चाहता हूं कि उनकी ये सृजन यात्रा अनवरत जारी रहे और उनमें कल्पनाशक्ति जागृत हो, प्रकृति, पर्यावरण, राष्ट्र, धरती माता के प्रति मेरे पुत्र के मन में सरल, सजग, सहज सरंक्षण का भाव बना रहे और अन्य लोगों के मन में भी पर्यावरण के प्रति सजगता, सुरक्षा और संरक्षण का भाव जागृत हो 



लिखेश्वर साहू 
ग्राम - सौंगा , पोस्ट- गिरौद 
तह - मगरलोड, जिला - धमतरी 
छत्तीसगढ़ 


मंगलवार, 12 अगस्त 2025

बरखा रानी कब परही तोर बौछार

बरखा रानी कब परही तोर बौछार.. - Read on SahityapediaThe perfect app for writers. https://sahityapedia.com/post/302509/

सावन के संग जइसे, भादो घलो सिरागे
कोन जनी बरखा हा काबर रिसागे
सुक्खा परे खेती, डोली, खार
बरखा रानी कब परही तोर बौछार

बिन पानी के अईला जाही खेती के धान
मुड़ धर के बईठे हे भुईयां के भगवान
रो रो के करत हे पुकार
बरखा रानी कब परही तोर बौछार

गरमी के मारे लागे बाय बियाकुल चोला,
बोहाए पसीना टप- टप, टप-टप जइसे के रेला
बइठे अकास ले सुरुज नारायण बरसावत अंगार
बरखा रानी कब परही तोर बौछार

सांसा चलत ले तोर ऊपर,अटके हे आसा
झन टोरबे हमर आसा, हो जाहि तमासा
बिन बरखा के सुन्ना- सुन्ना भुईयां के सिंगार
बरखा रानी कब परही तोर बौछार

अईसे बरस दे झिमिर झिमिर, छलकय खेती खार
ताल तरैया, नदिया, नरवा, छलकय बहरा नार
टर-टर,टर-टर, मेचका-बेंगवा ल पारन दे गोहार
बरखा रानी कब परही तोर बौछार



लिखेश्वर साहू
ग्राम सौंगा
तह - मगरलोड,
जिला - धमतरी
9669874209



















सोमवार, 5 मई 2025

नशा

साथियों नमस्कार, नशा आज हमारे समाज और देश की गंभीर समस्या बन चुकी है, भारत का भविष्य कहे जाने वाले हमारे युवा वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है, न सिर्फ युवा बल्कि प्रत्येक उम्र के लोग किसी न किसी तरह के नशे के शिकार हैं, नशा पुरुषों के लिए आम बात हो गई है, वही महिला
यें भी नशे से अछूता नहीं है, महिलायें भी कई तरह की नशे में लिप्त , गाँव और शहरों में नशा माहिलाओं मे अलग अलग तरह से व्याप्त हैं , गाँव की महिलायें गुटखा , गुड़ाखू ,तंबाकू का सेवन करती है, जबकि शहरों मे इनके अलावा नशीली दवाई का भी प्रयोग होता हैं, हालांकि गाँव में नशीली दवाई का प्रयोग का चलन नहीं है, 

साथियों नशे की लत से कई गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं, जो शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएँ साझा की जा थी हिय जो नशे से होता हैं:

शारीरिक बीमारियाँ

  • फेफड़ों की बीमारी: सिगरेट और तंबाकू के सेवन से फेफड़ों का कैंसर और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस हो सकता है।

  • हृदय रोग: शराब और तंबाकू का अत्यधिक सेवन दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

  • लीवर की समस्या: शराब के अधिक सेवन से लीवर सिरोसिस और फैटी लीवर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।

  • कैंसर: गुटखा, तंबाकू और शराब से मुंह, गले, फेफड़े और लीवर का कैंसर हो सकता है।

  • गर्भावस्था में जटिलताएँ: गर्भवती महिलाओं द्वारा नशे का सेवन करने से बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

मानसिक बीमारियाँ

  • डिप्रेशन और एंग्जायटी: नशे की लत मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद को बढ़ा सकती है।

  • मेमोरी लॉस: अत्यधिक शराब और ड्रग्स का सेवन याददाश्त कमजोर कर सकता है।

  • नींद की समस्या: नशे के कारण अनिद्रा और नींद से जुड़ी अन्य समस्याएँ हो सकती हैं।

  • मनोवैज्ञानिक विकार: कुछ ड्रग्स का सेवन स्किज़ोफ्रेनिया और अन्य मानसिक विकारों को जन्म दे सकता है।

नशा किसी भी चीज का हद से ज्यादा हो जाता है तो वो व्यक्ति पर काफी बुरा प्रभाव डालता है और कई बार गलत चीज का नशा व्यक्ति को तबाह भी कर देता है। 

कारण क्या है नशे की लत का ?

  • तनाव के चलते कई बार व्यक्ति इससे निजात पाने के लिए खुद से किसी भी नशीली सामग्री य दवाई का प्रयोग कर लेते है। जो बाद में लत की पंक्ति में शामिल हो जाता है।

  • जेनेटिक्स एंड फैमिली हिस्ट्री।

  • पर्यावरणीय कारण।

  • मनोवैज्ञानिक कारण।

  • मानसिक विकार जैसे अवसाद।

  • स्कूल या किसी सामाजिक जगह में दोस्तों की कमी का होना।

  • दर्दनाक घटनाओं का होना।

नशे की लत का लगना क्या है ?

  • नशे की लत का लगना किसी बीमारी से कम नहीं है। यदि नशे की लत व्यक्ति को अपनी वश में फसा ले तो उसका दिमाग सही तरीके से कार्य करने में असमर्थ हो जाता है।

  • नशे की लत एक क्रॉनिक है, जो बार–बार लौटने वाली बीमारी है। इससे दिमाग में लंबे समय तक चलने वाले कैमिकल बदलाव होते हैं, जो नशे की लत को छूटने नहीं देते। लत को सामान्य भाषा में समझे तो दिमाग का एक समय के बाद नशे का आदी हो जाना।

नशे की लत का लक्षण क्या है ?

  • नशीली सामग्रियों का बार–बार उपयोग करने की तीव्र इच्छा महसूस करना।

  • जब आप नशा पर होते हैं तो आप जिंदा महसूस करते हैं। जब नशा बंद हो जाती है, तो आप अस्थिर, उदास और भ्रम महसूस करते हैं।

  • इसके अलावा आपको भूख नहीं लगती और सिरदर्द हो सकता है।

  • आप खुद को नशा लेने से नहीं रोक सकते।

  • आपके व्यक्तिगत स्वास्थ्य में गिरावट आती है। उदाहरण के लिए, आपका वजन बढ़ना या कम होना शुरू हो सकता है। आपकी आंखें लाल हो जाती हैं।

  • आप नशे की सामग्री खरीदने के लिए पैसे भी चुराने लगते हैं।


नशे की लत से बचाव के तरीके क्या है ?

  • खुद को शिक्षित रखें।

  • तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके सीखें।

  • परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित रखें।

  • अपने दोस्तों को ध्यान से चुनें।

  • एक स्वस्थ जीवन शैली विकसित करें, आदि।

  • नशे की लत का इलाज क्या है ?

  • खुद को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग का चयन करे।

  • उपचार की दिशा में पहला कदम यह स्वीकार करना है कि आपको सबसे पहले नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या है।

  • नशे से निजात पाने का कोई इलाज नहीं है बल्कि इसका इलाज तभी संभव है जब आप खुद के मन में ठान ले की आपको इस लत से बाहर निकलना है।

यदि आप गुटखा छोड़ना चाहते है तो इस tollfree नंबर पर call करें – 1800112356

हेल्पलाइन नंबर 14446, 

संकल्प नशा मुक्ति केंद्र रायपुर 9827179103, यहाँ पर आप संपर्क कर सकते हैं निशुल्क ईलाज की सुविधा यहाँ उपलब्ध हैं....

गर आप नशे की लत से छुटकारा पाने के उपाय जानना चाहते हैं, तो नशा aaaaमुक्त भारत अभियान की वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


नशे की लत से व्यक्ति को कई आर्थिक नुकसान हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

1. आय में गिरावट

  • नशे की लत के कारण काम करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति की आय प्रभावित होती है।

  • कई लोग नशे के कारण नौकरी खो देते हैं या व्यवसाय में नुकसान उठाते हैं।

2. अनावश्यक खर्च

  • शराब, सिगरेट, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थों पर हर महीने हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं।

  • नशे की लत बढ़ने पर व्यक्ति महंगे नशीले पदार्थों का सेवन करने लगता है, जिससे आर्थिक संकट गहरा जाता है।

3. स्वास्थ्य पर खर्च

  • नशे से होने वाली बीमारियों के इलाज पर भारी खर्च होता है, जैसे कि कैंसर, हृदय रोग, और मानसिक विकार।

  • अस्पताल के बिल, दवाइयाँ और डॉक्टर की फीस आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं।

4. पारिवारिक और सामाजिक नुकसान

  • नशे की लत के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।

  • कई मामलों में व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है या संपत्ति बेचने के लिए मजबूर हो जाता है।

नशे की लत से प्रति व्यक्ति होने वाले आर्थिक नुकसान की गणना कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि व्यक्ति किस प्रकार का नशा करता है, उसकी आय, स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव, और सामाजिक-आर्थिक स्थिति।

प्रति व्यक्ति संभावित अनुमानित आर्थिक नुकसान

  1. नशे पर खर्च

    • यदि कोई व्यक्ति रोज़ाना ₹100 की शराब, सिगरेट, या गुटखा का सेवन करता है, तो सालभर में यह खर्च ₹36,500 तक पहुँच सकता है।

    • अधिक गंभीर लत वाले लोग इससे कहीं अधिक खर्च कर सकते हैं।

  2. स्वास्थ्य पर खर्च

    • नशे से होने वाली बीमारियों (जैसे कैंसर, हृदय रोग, लीवर सिरोसिस) के इलाज पर ₹50,000 - ₹5,00,000 तक खर्च हो सकता है।

    • दीर्घकालिक इलाज और अस्पताल के खर्च से यह राशि और बढ़ सकती है।

  3. आय में गिरावट

    • नशे की लत के कारण व्यक्ति की उत्पादकता कम हो जाती है, जिससे उसकी नौकरी या व्यवसाय पर असर पड़ता है।

    • कई मामलों में व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है, जिससे उसकी वार्षिक आय में ₹1,00,000 - ₹5,00,000 तक की गिरावट आ सकती है।

  4. संपत्ति और कर्ज

    • कुछ लोग नशे की लत के कारण अपनी संपत्ति बेचने या कर्ज लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

    • यह नुकसान ₹1,00,000 - ₹10,00,000 तक हो सकता है, खासकर अगर व्यक्ति गंभीर लत का शिकार हो।

कुल अनुमानित नुकसान

यदि हम इन सभी कारकों को जोड़ें, तो एक व्यक्ति को नशे की लत के कारण ₹2,00,000 - ₹15,00,000 तक का वार्षिक आर्थिक नुकसान हो सकता है।

यदि हम सामान्य तरीके से भी गणना करते है तो भी हम समझ जाएंगे की नशे के कितने आर्थिक नुकसान है, सबसे बात तो है , स्वास्थ्य खोना, अगर आपका स्वास्थ्य सही भी रहा तो भी आपको आर्थिक नुकसान तो झेलना ही पड़ेगा , हमें ऐसे नहीं पता चलता की हम कितना सारा पैसा फ़िजूल  मे बहा जाते है,, तो चलिए सीधे गणना पर चलते है। 

नशे मे प्रयोग की जाने वाली सामान्य नशीली पदार्थों के उपभोग का अनुमानित गणना इस सारणी से समझ सकते हैं.... 


लत 

प्रतिदिन 

दर 

राशि 

1 माह 

1 वर्ष 

10 वर्ष 

25 वर्ष 

50 वर्ष 


शराब 

0

0

0

0

0

0

0


गुटखा 

20

5

100

3000

36000

360000

900000

1800000


गुड़ाखू 

0

0

0

0

0

0

0


सिगरेट 

0

0

0

0

0

0

0


TOTAL

100

3000

36000

360000

900000

1800000


इस चार्ट से हम अनुमान लगाते है माँ लीजिए कोई व्यक्ति दिनभर में 20 गुटखा कहा जाता हैं प्रति गुटखा 5 रुपये का खर्च होता हैं तो इस दर से 20 गुटखे का कीमत 100 रूपिये ,100 रूपिये कोई व्यक्ति 1 दिन में खर्च करता है तो 1 महीने में 100 x 30 = 3000, 10 वर्ष में 36000 रुपये और 25 वर्ष तक 9 लाख रुपये और जीवित रह गया तो 50 वर्ष तक में लगभग 18 लाख रुपये का गुटखा मात्र चबा जाता हैं, रह गये न दंग, ये 18 लाख रुपये को आप चाहे तो बचा कर अपने और अपने परिवार वालों को खुशियां भी दे सकते उनके लिए , ढेर सारी सुविधाएं आप दे सकते हैं, आप चाहे तो अपना घर बना सकते है, अपने लिए , गाड़ी खरीद सकते है, अपने बच्चों को अच्छे और उच्च शिक्षा दिला सकते हैं।

ये आपको तय करना है की आप क्या चुनेंगे - अपने तन , मन,और धन का नुकसान या फिर होना चाहेंगे नाशमुक्त....

यह जानकारी आगर आपको अच्छी लगी तो अपने साथियों के साथ साझा करें......