रविवार, 31 दिसंबर 2023

नव वर्ष मंगलमय हो!

अरे कहा जा रहे हो? रूको तो सही, अरे मेरे ख्वाब जो मैंने देखे थे, पूरे नहीं हुए और तुम जा रहे हो? मैंने सोचा था तुम्हारे रहते ही तुम्हारे साथ ही मैं वो सारे ख्वाब पूरा कर लूंगा पर ये क्या तुम तो मेरे ख्वाबों पर पानी फेर कर जा रहे हो, मैंने सोचा नहीं था की इस तरह चले जाओगे. हां मालूम तो था 31 को चले जाओगे पर ध्यान ही नहीं गया की इतनी आसानी से चले जाओगे, ऐसा लगा जैसे अभी रुकोगे कुछ और दिन..
                                       अरे! देखो वे चले गए, छोड़ कर चले गए, सब कुछ बिखर गया सा लग रहा है,अब नहीं आएगा वो, कभी नहीं आएगा, बड़े अरमान थे मेरे उनसे, अरमानों पर पानी फिर गया, परिवार से दूर कर गया, मेरे सारे जमा पूंजी ले गया, पर हां अनुभव और सीख दे गया, त्याग का, तपस्या का, बिछड़ने का अहसास, जीवन का अनुभव दे गया, बहुत कुछ सीखा मैने उसके साथ और बहुत कुछ पाया भी, खोने और पाने, लाभ और हानि, सफलता और असफलता, सुख और दुख , कभी सुखों के सागर में गोते लगाए तो कभी दुःख की अग्नि से तन मन भी जला, जब तक उनका साथ रहा बिखरता रहा, बिखर बिखर मैं निखरता भी रहा, गम तो है उसके जाने का पर खुशी भी है की उसने मेरा साथ देने किसी और को भेजा है , मैं धन्यवाद देता हूं, मैं कृतज्ञ हूं उसके प्रति, मैं आभारी हूं की उसने मेरा साथ दिया, मुझे अनुभव दिया, मुझे सीख दी, मैं कृतज्ञ हूं, मैं कृतज्ञ हूं, मैं कृतज्ञ हूं, और इस कृतज्ञता के साथ मैं स्वागत करता हूं इस नए आगंतुक का जो पूरे 1 वर्ष, 12 माह, 52 सप्ताह और 365 दिन सर्दी, गर्मी,बरसात में मेरा साथ देने वाले हैं, आशा करता हूं की यह पिछले से बेहतर हो,  मेरे अधूरे ख्वाब इसके साथ पूरे हो, इसके रहते ही मैं उन बुलंदियों को छू लूं जो मैं चाहता हूं और मुझे पूरा विश्वास है मुझे इनका साथ पूरा मिलेगा. अंत में मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा की आप सभी को भी धन्यवाद मैं आपके प्रति भी कृतज्ञ हूं, और आप सभी से निवेदन भी है मुझसे हुए छोटी से छोटी बातें जिनसे आपका दिल दुखा है, तो क्षमा कीजिएगा, आप सभी की शुभकामनाएं मेरे साथ रहे, मेरी शुभकामना हमेशा यही है की आप सभी स्वस्थ रहे, खुश रहे, आपकी आशाएं पूरी हो, यह वर्ष 2024 आपके लिए शुभ हो..
नए वर्ष की हृदय से बधाई...


लिखेश्वर साहू
9669874209

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023

बच्चों पर लेबललगाने से पहले सोचे

नहीं बेटा ये मत कर, नहीं बोला ना, नहीं मतलब नहीं,अरे ये तुम्हारे बस की बात नहीं है, अरे तू नहीं कर पाएगा, तू तो मूर्ख है, चल छोड़, रहने दे बोला ना, चल भग उधर, कुछ समझता ही नहीं है, डरपोक कहीं का, ये तो दब्बू है दब्बू, जीवन भर कुछ नहीं कर पाएगा तू, कुछ भी करते रहते हो, पढ़ाई तो करते नहीं हो कभी ,तू क्या करेगा जीवन में, तू तो गधा है गधा, जब देखो तब खाली डिस्टर्ब करते रहता है, बातूनी हो गया है, कम बोला कर, काम की बात बोला कर, मुंह बंद रखा कर, दिन भर खेलना बंद कर, ये सारे खिलौने बिखरा रखे है, बंद कर ये बाजार, दिन भर धमाचौकड़ी लगा रखी है, मुझे परेशान कर रखे हो, पागल है क्या, कुछ भी करता है, तुझमें अकल नहीं है, दिमाग में गोबर भर रखा है,इन शब्दों को बहुत बार सुना हुआ सा लगता है, अरे हां ये तो वही शब्द है जो कभी जानबूझकर,तो कभी आदतन, तो कभी अनायास ही अनजाने में अधिकांश माता पिता या पालकों के मुख से अधिकतर या कहे तो सामान्यतः मुख से निकल जाता है, औरों के ही नहीं अपने ही बच्चे जिनको हम यह बातें कह देते है , पालक होने के नाते हम किसी गलत मंशा से नहीं अपितु हम बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए सोचकर ही ऐसा बोल जाते है, पर सोचने वाली बात है की क्या सिर्फ ऐसे ही शब्दों का प्रयोग किया जाना आवश्यक है, क्या और कोई शब्द नहीं जिनका उपयोग सुझाव के लिए करें, क्या कोई विकल्प मौजूद नहीं जिनसे अपने बच्चों से बेहतर तरीके से व्यवहार कर पाएं, विकल्प तो ढेरों है पर हम ही सजग नहीं है उन विकल्पों के लिए, शब्दों का विस्तृत और समृद्ध भंडार भी है सबके पास क्योंकि सभी अपना काम निकलवाने बड़े रोचक और लुभावनी, चुटीले बातों,शब्दों का उपयोग कर ही जाते है, नेताओं और अधिकारी, संत और व्यापारियों से कैसे बातें करने है सभी जानते है, विनम्र बातें करना सभी जानते है, सभी रोज़ाना अपने अपने कार्यक्षेत्रों अच्छे अच्छे संवाद, मनोरंजक और दिलखुश करने वाली बातें कहते है सुनते है, संतो के प्रवचन, गुरुवाणी, मीठे भजन, सुविचार देख रहे है सुन रहे है, पर ऐसी कौन सी बाधाएं बांध जाती है जिनसे हम ऐसे ऐसे शब्द कह जाते है या ऐसा व्यवहार कर जाते है जो शायद अहितकर हो बच्चों के लिए , क्या  कभी आपका इस तरफ ध्यान गया है, क्या आप सुधार की मंशा रखते है, यदि ध्यान गया है, तो अच्छी बात है आप सोच रहे है सुधार की तो यह बड़ी बात है, बड़ी बात इसलिए की आपका ध्यान इस तरफ जाता है, और जिस तरफ हमारा ध्यान जाता है हम उनके लिए प्रयास करते है,हम जो बातें बच्चों को बोलते है उनका प्रभाव क्या होता है आइए जांचे, बच्चे को हम बोलना सिखाते है ,कैसे ,? उनके साथ ज्यादा से ज्यादा बातें बोलकर, ज्यादा से ज्यादा शब्दों को उनके शब्दकोश में भरने का काम रोज़ कर रहे है, हम जो बोल रहे है उनके शब्दकोश में भी शामिल हो रहा है और दिमाग में भी, जैसे वे अपने बड़ो को सुनेंगे वैसा उनके मुंह से भी निकलेगा फिर चाहे माता पिता, घर के कोई सदस्य या , गुरूजी जो भी हो उनके बोलने का प्रभाव पड़ता ही है, शब्दकोश से वाणी पर प्रबल प्रभाव पड़ता है, दिमाग़ में डाले गए सुझाव व्यवहार को निर्देशित करता है, ऐसे में यदि हम किसी बच्चे को कोई भी बात बोलते है जैसे रोजाना यदि हम उसे किसी एक ही बात को दुहराते रहे तो वे वैसा ही करते है, अनुभव करने की बात है, करके देखिए, रोज़ाना गाली डांट फटकार सुनने वाले बच्चे के मुंह से भी गाली या डांट सुनने को मिलेगा, उनके हाव भाव में  झिझक, क्रोध, भय बना रहेगा, सहमा सहमा सा रहेगा , प्रेम, स्नेह,दुलार पाने वाले का आत्मविश्वास बना रहता है, वह खुलकर बातें कहता है, बोलता है, अपनी अभिव्यक्ति कर पाता है,शायद आपने गौर भी किया हो , तो इस मामले में हमें सजग रहने की आवश्यकता है, और लोगों को भी सजग करने की आवश्यकता है, खुद भी समझे औरों को भी समझाएं....
यह विचार मुझे आया अपने विचारों को साझा करना मुझे उचित लगा तो मैंने किया,मेरी बातों से आप सहमत होते है या असहमत होते है ये आपकी बात है, वैसे इस तरह के विचारों पर मंथन किया जाना चाहिए बच्चों और बच्चों के विकास की बात है,
आपने समय निकाल कर पढ़ा आप जागरूक हैं,जागरूक होना चाहते हैं, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद..........

लिखेश्वर साहू
9669874209

मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

क्या आप भी...

एक बात सोचकर देखिए शायद आपको लगे या न लगे अक्सर इस दुनिया में लोग वही कर रहे है जो किसी और ने किया है या फिर कर रहे हो, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ ही हुआ और शायद अभी भी हो रहा है, आप माने ना माने पर मुझे लगता है शायद आप भी वैसा ही कर रहे है ,देखा देखी में ही लोग काम किए जा रहे हैं, आप शिक्षक हो या विद्यार्थी या फिर धन के लाभार्थी,नेता हो या अधिकारी या मंदिर के पुजारी, सब देख कर ही किए जा रहे है, हम सब एक दूसरे को देखकर ही कर रहे है, हम एक दूसरे को देखकर नकल ही तो कर रहे है, बचपन से लेकर आज तक, घर हो या ऑफिस, स्कूल हो या मंदिर,गली हो या सड़क जहां, खाने पीने, सोने, उठने बैठने सबमें हम नकल ही तो कर रहे है, यदि आप शिक्षक हो तो आपका पहनावा किसी विशेष शिक्षक को देखकर उसके हिसाब से होगा, कैसे पढ़ाते है बच्चों को यह भी तो दूसरों को देख सीखें है, वकील कपड़े के ऊपर कोट लगाकर टाई बांधता होगा, ये सब क्या है नकल ही तो है, डॉक्टर सफेद जैकेट पहनते है,हमें नकल करना सिखाया भी तो गया है, बाद में हम खुद भी सीख गए और दूसरों को भी सिखाने लगे, आपको याद होगा जब बचपन में पाठशाला गए तो गुरूजी ने स्लेट पर अ आ लिखकर इनका नकल बनाने कहा यानि उसको कॉपी करने कहा हम नकल कर लिखते गए और सीखते गए, नकल करने की इस प्रक्रिया में हम आज इतना दक्ष हो गए है की अब तक वो हमारा जीवन का हिस्सा बन चुका है, सायकिल चलाना सीखा, या फिर कोई काम धंधे सीखे, यदि आप पहले पहल किसी ऑफिस में आप काम करने गए होंगे तब आपने अनुभव भी किया होगा हमारे सीनियर को देखकर ही हमने काम सीखा, वे कहते रहे होंगे की जैसा मैं करते जा रहा हूं वैसा ही करो, और जब आप थोड़ी चुक किए होंगे तो शायद डांट भी लगी हो और बॉस ने कहा हो यार ये आदमी देखकर भी नहीं कर पा रहा,सोचकर देखिए क्या ऐसा नहीं होता, नकल से ही सीखते है ये बात और है की नकल के लिए अकल की जरूरत पड़ती है पर सभी बातों पर नहीं, एक कहानी बंदर की सभी जानते होंगे, एक बंदर टोपी वाले का टोपी लेकर ऊपर चढ़ जाता है,बंदर से टोपी लेने के लिए नीचे से टोपी से फेंकने से बंदर भी टोपी से फेंक मारता है और टोपी वापस मिल जाता है, शायद  तब से नकलची बंदर वाली कहावत चल पड़ी है, बस इसी तरह हम सब किसी खास मकसद के लिए नकल कर रहे है, जिंदगी के हर पल में खुशियां हो दुःख की घड़ियां सब देखा देखी और नकल ही तो है,शादी हो या सगाई, पहुनाईं हो या बिदाई सबमें नकल, जीवन के आरंभ से लेकर अंत तक नकल का सिलसिला चलता रहता है, अंत में जब अंतिम यात्रा पर ले जाया जाएगा तब भी नकल, वैसे नकल करना कोई गलत आदत नहीं है यदि वह सीखकर और समझ कर अपनाई जाए , लेकिन देखा देखी और नकल के इस सिलसिले में कईयों लोग ऐसे है जिन्हें पता भी नहीं की वे नकल क्यों कर रहे हैं और किनका कर रहे है, वे नकल के चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेते है, प्रत्येक व्यक्ति का नकल नहीं किया जाना चाहिए, सफल और आदर्श लोगों की नकल और उनके अच्छे आदर्शो की नकल करने चाहिए, सफल और महान चरित्र वाले लोगों की अनुकरण करने की बात संत और गुरूजी लोग भी बताते  है, संतो और महान आदर्शों में भी बहुत लोग बहुत सारे खामियां बताते है ऐसे खामियों को फिल्टर कर जो सही हो उसी का अनुकरण करने चाहिए....

लिखेश्वर 

यदि ऐसा है तो...

आपका इस जिंदगी के बारे में क्या राय है
1.जिंदगी में सुख ही सुख है
2.जिंदगी में सुंदर ही सुंदर दृश्य मुझे दिखते है 
3.जिंदगी में मुझे अच्छे ही अच्छे लोग मिलते है
4.मैं तो शारीरिक रूप स्वस्थ ही रहता हूं
4.मैं कभी बीमार ही नहीं रहता हूं 
5. मेरे पास बहुत ज्ञान है, मैं सबकुछ जानता हूं
6. मैं बहुत धनवान हूं
7. मै बहुत ताकतवर हूं
8. मुझे किसी की जरूरत नहीं
9.मुझे किसी से कोई मतलब नहीं
10. होनी को कौन टाल सकता है
यदि इस बारे में सोचे तो आपको सारे जवाब मालूम है,
शायद आप बता पाए या नहीं भी,इसके एक नहीं कई सारे जवाब आप दे भी सकते है, और बिलकुल सही है ,
सवाल नंबर एक जिंदगी में सुख ही सुख है तो इस चीज़ का अहंकार आप न करें, कभी भी किसी भी वक्त दुःख का पहाड़ टूट सकता है, सुखी होने के प्रयास हमेशा करते रहना है, हमेशा सुंदर ही सुंदर दृश्य दिखते है तो आप कभी न कभी बुरे दृश्य भी देखने वाले हो ऐसी स्थिति में स्वयं पर नियंत्रण करने का प्रयास करते रहो, यदि आपके साथ जो लोग है अच्छे ही अच्छे हो, जो आपको हमेशा सपोर्ट करते है पर आप उनके किए सहयोग का अहसान नहीं मानते उनके प्रति कृतज्ञ नहीं है तो यह आपको समझने चाहिए और स्वयं को इतना मजबूत बना लेना चाहिए की कभी वो सहयोग करना छोड़ दे तो मैं क्या करूंगा, मैं हमेशा शारीरिक रूप से स्वस्थ हूं यह सोच करके आप अपने ही शरीर को अकर्मण्य बना रहे है और नशा पान में लिप्त है, खाट में अधिकतर समय बिता रहे है तो आप सतर्क हो जाइए, मेहनत और एक्सरसाइज में ध्यान दीजिए शरीर का मेंटेन होता है, नशा में शरीर और दिमाग खराब होता है, खान पान का विशेष ध्यान रखे. मैं कभी भी बीमार नहीं पड़ता सोचकर, इसको स्थाई न समझे हमेशा स्वस्थ रहने के लिए उपाय करते रहे औरों को भी इसके लिए सतर्क रहें
मेरे पास बहुत ज्ञान है, मैं बहुत जानकार हूं यह न सोचे ये अहम है और वहम है, अहम और वहम दोनों ठीक नहीं है, ज्ञान लेते रहे, पुस्तक पढ़े, सत्संग करें, ज्ञान लेवे, मिली ज्ञान को जांचे परखे, अमल करें, ज्ञान बांटे . मैं बहुत धनवान हूं ऐसा सोचकर पैसे अनावश्यक न खर्च करें,लत ना डाले किसी भी चीज़ का ,न तो अच्छी चीज़ का और न बुरी चीज़ का , मन को यह समझाए सारा चीज यही रहना है, आपका भी और दूसरों का भी इसलिए ये संसार में सबके लिए पर्याप्त उपलब्ध है, मैं बहुत ताकतवर हूं यह सोचते हो तो बल का सही दिशा में उपयोग करें निर्बलो की सहायता करें. यदि आप सोचते है मुझे किसी की जरूरत नहीं तो इस पर पुनः विचार करें, ना तो कोई अकेला रह सका है, न रह पायेगा, सबको सहयोग चाहिए, आपको भी औरों को भी, सहयोग लेना और देना सीखें, सबके साथ मिलकर रहे, बुरे लोगों से बचके रहे.
मुझे किसी से कोई मतलब नहीं ये अहम का सूचक है,ये संसार के सभी लोग एक दूसरे पर निर्भर है, गलतफहमी में ना रहे मुझे किसी से कोई मतलब नहीं,सबके साथ मिलकर रहे, बातें करें, सुख दुःख के सहभागी बनें,होनी को कौन टाल सकता है, इस वाक्य को समझे, अधिकतम प्रयास करते रहे, सुधार के,परिवर्तन के प्रयास करते रहे, प्रयास से संभव हो सकता है..

आप हर कार्य को संभव कर सकते हो, आपके अंदर अच्छाई बुराई दोनों है , देखना है आप किस दिशा में जाते हो, आपका स्वभाव अपने सहयोगी पर कैसा है ये देखना है, अपने आश्रित के लिए आप क्या सोंच रखते है इस पर विचार करें....

बेहतर होने का प्रयास करते रहे, एक न एक दिन बेहतर होगा
बेहतरीन पल जल्द ही आने वाला है निराश हताश न होए आशा बनाएं रखें।

धन्यवाद 
लिखेश्वर साहू
9669874209