मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

क्या आप भी...

एक बात सोचकर देखिए शायद आपको लगे या न लगे अक्सर इस दुनिया में लोग वही कर रहे है जो किसी और ने किया है या फिर कर रहे हो, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ ही हुआ और शायद अभी भी हो रहा है, आप माने ना माने पर मुझे लगता है शायद आप भी वैसा ही कर रहे है ,देखा देखी में ही लोग काम किए जा रहे हैं, आप शिक्षक हो या विद्यार्थी या फिर धन के लाभार्थी,नेता हो या अधिकारी या मंदिर के पुजारी, सब देख कर ही किए जा रहे है, हम सब एक दूसरे को देखकर ही कर रहे है, हम एक दूसरे को देखकर नकल ही तो कर रहे है, बचपन से लेकर आज तक, घर हो या ऑफिस, स्कूल हो या मंदिर,गली हो या सड़क जहां, खाने पीने, सोने, उठने बैठने सबमें हम नकल ही तो कर रहे है, यदि आप शिक्षक हो तो आपका पहनावा किसी विशेष शिक्षक को देखकर उसके हिसाब से होगा, कैसे पढ़ाते है बच्चों को यह भी तो दूसरों को देख सीखें है, वकील कपड़े के ऊपर कोट लगाकर टाई बांधता होगा, ये सब क्या है नकल ही तो है, डॉक्टर सफेद जैकेट पहनते है,हमें नकल करना सिखाया भी तो गया है, बाद में हम खुद भी सीख गए और दूसरों को भी सिखाने लगे, आपको याद होगा जब बचपन में पाठशाला गए तो गुरूजी ने स्लेट पर अ आ लिखकर इनका नकल बनाने कहा यानि उसको कॉपी करने कहा हम नकल कर लिखते गए और सीखते गए, नकल करने की इस प्रक्रिया में हम आज इतना दक्ष हो गए है की अब तक वो हमारा जीवन का हिस्सा बन चुका है, सायकिल चलाना सीखा, या फिर कोई काम धंधे सीखे, यदि आप पहले पहल किसी ऑफिस में आप काम करने गए होंगे तब आपने अनुभव भी किया होगा हमारे सीनियर को देखकर ही हमने काम सीखा, वे कहते रहे होंगे की जैसा मैं करते जा रहा हूं वैसा ही करो, और जब आप थोड़ी चुक किए होंगे तो शायद डांट भी लगी हो और बॉस ने कहा हो यार ये आदमी देखकर भी नहीं कर पा रहा,सोचकर देखिए क्या ऐसा नहीं होता, नकल से ही सीखते है ये बात और है की नकल के लिए अकल की जरूरत पड़ती है पर सभी बातों पर नहीं, एक कहानी बंदर की सभी जानते होंगे, एक बंदर टोपी वाले का टोपी लेकर ऊपर चढ़ जाता है,बंदर से टोपी लेने के लिए नीचे से टोपी से फेंकने से बंदर भी टोपी से फेंक मारता है और टोपी वापस मिल जाता है, शायद  तब से नकलची बंदर वाली कहावत चल पड़ी है, बस इसी तरह हम सब किसी खास मकसद के लिए नकल कर रहे है, जिंदगी के हर पल में खुशियां हो दुःख की घड़ियां सब देखा देखी और नकल ही तो है,शादी हो या सगाई, पहुनाईं हो या बिदाई सबमें नकल, जीवन के आरंभ से लेकर अंत तक नकल का सिलसिला चलता रहता है, अंत में जब अंतिम यात्रा पर ले जाया जाएगा तब भी नकल, वैसे नकल करना कोई गलत आदत नहीं है यदि वह सीखकर और समझ कर अपनाई जाए , लेकिन देखा देखी और नकल के इस सिलसिले में कईयों लोग ऐसे है जिन्हें पता भी नहीं की वे नकल क्यों कर रहे हैं और किनका कर रहे है, वे नकल के चक्कर में फंस कर जीवन बर्बाद कर लेते है, प्रत्येक व्यक्ति का नकल नहीं किया जाना चाहिए, सफल और आदर्श लोगों की नकल और उनके अच्छे आदर्शो की नकल करने चाहिए, सफल और महान चरित्र वाले लोगों की अनुकरण करने की बात संत और गुरूजी लोग भी बताते  है, संतो और महान आदर्शों में भी बहुत लोग बहुत सारे खामियां बताते है ऐसे खामियों को फिल्टर कर जो सही हो उसी का अनुकरण करने चाहिए....

लिखेश्वर 

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