नन्हें हाथों से चित्रित नन्हा हाथ — और हाथ में पेड़: एक सीख, एक संदेश
“Save Tree”
आज मेरे बेटे ने एक चित्र की नकल की — मोबाइल पर देखे गए एक चित्र को अपने हाथों से दोहराया। यह केवल नकल नहीं थी, बल्कि नकल से अकल की ओर पहला कदम था। उस चित्र में एक हरा-भरा वृक्ष है, जिसे एक हाथ सहेज रहा है — जीवन का प्रतीक, और संरक्षण, स्नेह व जिम्मेदारी का संदेश।
नीचे लिखा है: “Save Tree” — एक छोटा सा वाक्य, लेकिन बड़ा संदेश।
मेरे बेटे ने यह चित्र ध्यानपूर्वक देखा, रंगों को समझा, और अपने हाथों से उसे दोहराया। यह प्रक्रिया अनुकरण से आत्मसात की ओर बढ़ती है।
“हर कलाकार कभी नकल से शुरू करता है — लेकिन जब भाव जुड़ते हैं, तो वही नकल रचना बन जाती है।”
जब मैंने यह चित्र देखा, तो मुझे गर्व हुआ — कि मेरा बेटा न केवल कला सीख रहा है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी महसूस कर रहा है। उसने जो देखा, उसे अपने हाथों से दोहराया — और उस प्रक्रिया में उसने संवेदना को छुआ।
एक पिता और शिक्षक के नज़रिए से, यह चित्र केवल एक नकल अभ्यास नहीं — बल्कि एक संकेत है कि बच्चे कैसे सीखते हैं, कैसे सोचते हैं, और कैसे धीरे-धीरे नकल से मौलिकता की ओर बढ़ते हैं। आइए हम बच्चों की हर कोशिश को सराहें — क्योंकि हर रेखा, हर रंग, एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।
इस चित्र को साझा करने का मेरा सिर्फ़ इतना स्वार्थ है — मैं चाहता हूँ कि इसका संदेश “Save Tree” अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। साथ ही, यह संदेश उन अभिभावकों तक भी पहुँचे जो अपने बच्चों को सही राह पर ले जाना चाहते हैं।
आप ही हैं जो अपने बच्चों को उस पथ पर ले जा सकते हैं जहाँ वे पहुँचना चाहते हैं — या जहाँ आप उन्हें पहुँचाना चाहते हैं। उन्हें अभिव्यक्ति का अवसर दें, उनके कार्यों को सराहें, उनकी त्रुटियों पर मार्गदर्शन करें, और उनमें आत्मविश्वास जागृत करें।
लिखेश्वर साहू
ग्राम – सौंगा, पोस्ट – गिरौद
तहसील – मगरलोड, जिला – धमतरी
छत्तीसगढ़