जय जोहार संगवारी हो , अब के बार ये कोरोना ह तो हद पार करे लागिस हे , उमरदराज लोगन के संगे संग अब तो ये कोरोना हर नौ जवान, किशोर, मन ल घलोक काल बनके खावत हे अइसन म लोगन के मन मं घबराहट, डर , चिंता छाये बर लगत हे मनखे कोरोना बीमारी ले नहीं घबराहट ,डर, चिंता ले घलोक अपन जिनगी के जंग हार जावत हे ,कतको ए डर ले अपन जिनगी अपन हाथ ले गंवात हे कि मोर संग अउ कोनो अउ कोरोना के चपेट में झन आवय त कोनो बीमारी के चिंता अउ कोरोना आइसोलेसन ले उपजे भेदभाव , हीनता (लोगन के जागरूकता के कमी)ले घलोक लोगन अपन जिनगी हार जावत हे, अइसन में हम सब ला एकमत होये के जरूरत हे, हमला कोरोना ल हराना हे, कोरोना अपन गांव, समाज , देश ले दूरिहा भगाना हे एहि ठान के हम सब सुमत ले काम लेवन अउ एक दूसर बर हौसला बढ़ाये के काम घलोक करन, सोशल डिस्टेसिंग के पालन कर समाज में कोरोना के प्रसार ल रोकन, स्वास्थ संबंधी नीक सलाह ल अपनावन एहि मं जम्मो केे भलाई हे...
संगवारी.... हो कोरोना ले न घबराना
एकमत होके हम सबला कोरोना ल हाबे हराना
न ही डरना हाबे खुद ला, न कोनो ल हबे डराना
संगवारी हो कोरोना ले न घबराना
घेरी बेरी हाथ धोवव साबुन ले , सेनेटाइजर घलोक लगाओ ना
मास्क पहिनव घरे मं रहव ,कोरोना ल दूर भगाओ ना
कहूं बात करना हे जरूरी , एक दूसर ल फोन लगाना
कखरो संग झन हाथ मिलावव, कोनो ल गला लगावव ना
सोशल डिस्टेन्सिंग के पालन करव, दूसर ल घलोक बतावव गा
समझे हाबव ये बात जेमन हा, दूसर ल घलो समझाना
उबला पानी कुनकुन कुनकुन, पीवव ताते भात खावव जी
दालचीनी, लौंग काली मिरच संग, तुलसी के काढ़ा बनावव जी
बेरा बेरा मं पीना पिलाना, कोरोना ल हाबे हराना
वैक्सीन लगावव बारी बारी कोनो ह झन हड़बड़ावव ना
करव भरोसा, धीरज रखव मन ल झन हरावव ना
जरूरतमंद ल पहिली संगी हो वेक्सीन के डोज लगाना
करव झन भेदभाव कोनो ले एक दूसर के हौसला बढ़ावव जी
जरूरत होवे मं दवा,पानी, राशन-पानी पहुंचावव जी
सहयोग बर हाथ बढ़ावव, कोरोना ल हबे भगाना

