जय माता की
प्रणाम
शक्ति की भक्ति, आराधना और उपासना का पर्व जगत जननी प्रकृति स्वरूपा माता दुर्गा पूजन का पावन पर्व शारदेय नवरात्र आज प्रारंभ हो रहा है, आप सभी को शुभकामनाएं मां की भक्ति और आशीर्वाद आप सभी को मिलती रहे इस कामना के साथ आज का चिंतन आपके समक्ष ..
आज से लेकर नौ दिन तक लोग सुबह शाम मां अम्बे की पूजन अर्चन कर मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लेंगे, ये शक्ति की भक्ति, और भक्ति की शक्ति ही है जो पूरे नौ दिन और रात लोगों को निष्कलंक और पावन रखती है, नौ दिन की नवरात्रि का यह पावन पर्व मात्र नौ दिन में ही लोगों के मन से सारे राग, द्वेष बैर और बुरे कर्म, व्यसनों को तन मन से दूर कर शरीर और मन को पवित्र कर डालती है , काश जब तलक ये दुनिया हो तब तक भक्ति की शक्ति में लोगों का मन लगा रहे तो निश्चित ही संसार के सारे लोग निष्कपट और पवित्र हो जायेंगे, कोई किसी का दिल न दुखायेगा, कोई किसी से बैर न रखेंगे, लोग सात्विक भोजन ग्रहण करते रहेंगे, तमस को अपने तन मन से दूर रखेंगे,पर वे ही लोग शायद नहीं चाहते की हम पूरे जीवन काल मां की भक्ति करें, तन,मन, और आंगन को पावन रखे,अक्सर यह सोचता हूं की क्या व्यसनों को छोड़ना बहुत मुश्किल भरा काम है?, मुझे नहीं लगता यह बहुत मुश्किल भरा काम है, यदि मुश्किल भरा काम होता तो लोग शायद नौ दिन तक भी अपने को रोक कर नहीं रख पाते, यदि नौ दिन के पर्व तक अपने मन पर जिन लोगों ने काबू पा रखा है उस पर भला ऐसी कौन सी बुरी शक्ति है जो उन्हें पुनः अपने मार्ग से विचलित कर सकती है, मैं कहता हूं की ऐसी कोई भी बाह्य शक्ति नहीं है जिनकी इतनी साहस की वो किसी को अपने मार्ग से विचलित कर सके!
यदि आप प्रकृति, दैवीय शक्ति, मातृ शक्ति पर विश्वास रखते है तो भी और यदि आप अपने विचारों की शक्ति पर विश्वास रखते है तो भी आपको को कोई बाह्य बुरी शक्ति प्रभावित नहीं कर सकती, ऐसा नवरात्र के नौ दिन की व्रत और उपासना से देखने को मिलता है,लोग अक्सर कह देते है की मैं बुरे कर्म छोड़ना चाहता हूं पर इसने मुझे ऐसे जकड़ा है कि छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा, मैं कहूं तो बुरी लत उन लोगों को नहीं, बल्कि बुरी लत को लोगों ने पकड़ रखा है, और लोगों में इतनी क्षमता और शक्ति है की वे जब चाहे तब बुरी आदतों को छोड़ सकता है, सिर्फ मन में विचार हो और प्रबलता से हो जैसे नौ दिन के नवरात में होता है, यदि बुरे लतों को छोड़ना है तो पूरे जीवन को नवरात जैसा पावन मानों और अपने तन ,मन ,आंगन को पवित्र रखो, जिस श्रद्धा और विश्वास के साथ नौरात्रि में लोग सुबह 4 बजे उठकर स्नान ध्यान में लग जाते है और बिना अन्न जल ग्रहण किए ही नौ दिन रात्रि तक भजन सत्संग में रम जाते है वैसे ही पूरा जीवन को नवरात्रि माने और कर्म की पूजा, जन सेवा, जन कल्याण को ही मातृ सेवा माने, प्रत्येक प्राणी मात्र में प्रकृति शक्ति का दर्शन कर उनसे सद्भावना पूर्वक आचरण करें....
मां का आशीर्वाद आप सभी को मिलती रहे
जय माता दी
लिखेश्वर साहू
सौंगा , मेघा
9669874209
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें