शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

सोचकर देखे

सोचकर देखे...
कोई भी एक वाहन के बारे में सोचे , निर्माता कंपनी द्वारा वाहन से संबंधित सारे नियम व मार्गदर्शन होते है, आपको कौन सी ईंधन गाड़ी में उपयोग करने है, कैसी सावधानी से आपको अपनी गाड़ी का ध्यान रखना है, निर्धारित समय में अपने गाड़ी का सर्विसिंग कराना है, उसमें डालने वाला ईंधन निर्धारित है, निर्धारित ईंधन को डाले बगैर ईंजन चालू नहीं होता, किसी अन्य पदार्थ को डालने पर ईंजन खराब हो जाता है या शायद अन्य ईंधन से भी यदि चले तो भी उनकी दक्षता खराब हो जाती है, बहुत ही जल्द वह वाहन खराब होकर उपयोगी नहीं रह जाता, उनकी कीमत नही रह जाता, कबाड़ हो जाता है, ईंजन और वाहन सही सही कार्य करे और दक्षता उनकी बनी रहे इसलिए समय समय पर ईंजन में मेंटनेस का कार्य कराना पड़ता है, और इस चीज़ का हम बहुत खयाल रखते है समय समय पर मेंटनेंस कराते है,कभी कभी मैकेनिक के कहने पर हम अपने वाहन को मैकेनिक के पास ही एक दिन, दो दिन या हफ्ते पर भर छोड़ देते है, और फिर मेंटनेंस हो जाने पर पुनः हम जांच करते है की ठीक हुआ या नहीं, ठीक हो जाने पर हम ले जाते है और उसे उपयोग में लाते है,ठीक इसी तरह हमारा यह शरीर भी वाहन जैसा ही मानिए और जरा सोचिए इस ईंजन में निर्धारित ईंधन के अलावा हम क्या क्या डाल रहे है, रोज रोज हम गलत तरीके से ईंधन डालकर अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहे है, और फिर मेंटनेंस के लिए चिकित्सक के पास ले जाते है,
डॉक्टर कहता है इतना खर्च है ये ये दवाई लगेगा, ले आइए हम दवाई भी ले आते है, जब डॉक्टर कहते है की कुछ परहेज करना पड़ेगा, मिर्च मसाला छोड़ो, दारू, गुटखा, बीड़ी,सिगरेट तंबाकू छोड़ दो, हम हां बोल देते है हां, पर होता क्या है, हम छोड़ने को तैयार ही नहीं है, हम वो सारी चीज़े जो नहीं करनी होती है वे करते जाते है, और फिर बाद में जब हमारा शरीर बीमार हो जाता है, इन्हें समझे प्रकृति में हमारे खाने,पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में बढ़िया चीजें चीजें मौजूद है, जो हमारे शरीर व स्वास्थ्य को ठीक रखता है, फिर भी हम घटिया और हानिकारक, अहितकर चीजों का सेवन करते है,
चलो यहां तक ठीक है अब थोड़ा और समझे हमारे मस्तिष्क को समझे इसे कंप्यूटर मशीन माने,हमारे शरीर को रोबोट, कंप्यूटर द्वारा जो रोबोट को निर्देश मिलता है, वही ये शरीर द्वारा किया जाता है, यहां समझने का प्रयास करें की हमारा मस्तिष्क द्वारा अच्छे कार्यों के लिए निर्देशित किया जाए तो हम अच्छे कार्य करेंगे और बुरे कार्य में निर्देशित करे तो हम बुरे कार्य में संलग्न हो जायेंगे, हमारे मस्तिष्क में जो विचार है वे ही निर्देश है, सोचिए अपने विचार को, क्या ये अच्छे और सही है ,प्रत्येक परिस्थिति के लिए इन विचारों को देखे और प्रत्येक परिस्थिति में सही विचार ही मस्तिष्क में लाने का प्रयास करें,यदि ऐसा होता है है तो हम सही सही से कार्य संपादित कर पाते है और इसका परिणाम सही होता है, यदि हमारे विचार गलत हो रहे है तो हमारे कार्य और परिणाम सही नहीं हो सकता, सही कार्यों के प्रतिपादन के लिए सही विचार बहुत आवश्यक और अनिवार्य है, नौकरी, व्यवसाय, संकट, बीमारी, संबंध या किसी भी संदर्भ में आप देखिए आप के विचार कैसे आ रहे है, गलत विचार आ रहे है तो सतर्क हो जाए, गलत विचार से आपके  द्वारा गलत कार्य होगा, और नतीजे आपके लिए गलत होंगे ही होंगे, इसलिए सदैव, सभी परिस्थिति में अच्छे विचार के बीज अपने मस्तिष्क पर बोए, कुछ लोग तो हमेशा गलत सोचते है अपने बारे में भी और दूसरे के बारे में भी , जैसे अक्सर कुछ लोगों को आपने कहते सुना होगा की मैं फेल हो जाऊंगा लगता है, मैं गिर जाऊंगा, मैं हार जाऊंगा, मुझे डर लग रहा है, कही मैं बीमार न हो जाऊं,ये विचार गलत है, बुरे है, अपने बारे में हो चाहे दूसरे के बारे में, कुछ लोग कहते है की मैं कुछ नहीं सोचता, गलत बोलते है वे लोग जो कुछ नहीं सोचता हूं कहते है, ऐसा हो ही नहीं सकता की कोई किसी भी चीज़, व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में कुछ ना सोचे, सोच की प्रक्रिया तो अनवरत जारी रहता है, पल पल में में हमारी सोच बदलती रहती है, ऐसा भले ही होता है की हम ध्यान नहीं दे पाते, इस सोच को हमें ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि सोच से ही हम कार्य संपादित कर परिणाम प्राप्त करते है, यथा सोच तथा परिणाम इस बात को समझे ओर अपनी मस्तिष्क को सही निर्देश दे, सही कार्य करे, सही परिणाम पाए....

लिखेश्वर साहू

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