बुधवार, 18 दिसंबर 2024

फिनटेश मंत्र

 फिनटेश मंत्र 

 नमस्कार साथियों ,

ऐसा कौन होगा जो स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन नहीं चाहता हो , पर सभी को पता ही नहीं की स्वस्थ कैसे रहा जाएं,  आप चाहते है स्वस्थ रहना तो शुरुआत करें इस फिनटेश टिप्स को....

सबसे पहले तो आप अपना 

1. उद्देश्य तय करें

  • स्वस्थ शरीर चाहिए।
  • वजन कम करना है या मांसपेशियां बनानी हैं।
  • ज्यादा ताकत और ऊर्जा चाहिए।

और फिर शुरूआत करें 

2. आसान एक्सरसाइज करें

  • वार्म-अप (5 मिनट):
    • गर्दन घुमाएं (10 बार)।
    • कंधे और हाथ स्ट्रेच करें।
    • हल्का दौड़ें या जगह पर दौड़ें।
  • 30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज:
    • 10 मिनट चलें।
    • 10 मिनट योग करें (ताड़ासन, वज्रासन)।
    • 10 मिनट हल्का कार्डियो करें (जैसे रस्सी कूदना या साइकिल चलाना)।

3. खाने-पीने पर ध्यान दें

  • सुबह गुनगुना नींबू पानी पिएं।
  • हल्का और हेल्दी नाश्ता करें (जैसे फल, दलिया, या नट्स)।

4. अपनी प्रगति लिखें

  • वजन और माप लिखें।
  • हर हफ्ते इसे चेक करें।

5. धीरे-धीरे आगे बढ़ें और नियमितता बनाए रखें।

साथियों मैं यह समझ सकता हूँ शुरुआत में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, पर धीरे धीरे सब आसान हो जाता है, बस शुरू करने की देर रहती है , एक और बात जो बताना चाहता हूँ,  चौथा टिप्स execute करने में थोड़ा परेशानी हो सकता है पर यदि परिणाम चाहिए तो करना तो पड़ेगा , वैसे इसमें समस्या ज्यादा कुछ नहीं बस इतनी है कि सभी के पास वजन मशीन नहीं है, पर बहुत ज्यादा परेशानी की बात भी नहीं आप जाकर किराने की दुकान में,  हार्डवेयर दुकान में ,स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अपना वजन का माप ले सकते है---
चाहे तो आप योग, व्यायाम, जिम कर सकते है, चाहे तो आप इसके लिए courses जॉइन कर सकते है , या चाहे तो आप अपने घर पर ही youtube , टेलीविजन , या स्वयं से भी कर सकते है । 

शनिवार, 12 अक्टूबर 2024

जय श्री राम, जय जय श्री राम

प्रकांड पंडित वेदों का ज्ञाता, अपने समय का था विद्वान

तप में बल में कीर्ति यश में, त्रिलोक विजेता था महान

दृढ़ तपस्वी सिर काट-काट, प्रसन्न किया भोला भगवान

प्रकट हुए भोले भंडारी , मांगा फिर उनसे वरदान

नर को तज, पर जीवों से, ना हो उनको कोई नुकसान

सोने की लंका का था राजा, घेरा जब उसको अभिमान

नहीं सहन हुआ जब उनको ,अपनी ही बहन का अपमान

भान नहीं, ज्ञान नहीं, विस्मृत हुआ उनका सब ज्ञान

जाकर पंचवटी हर लाया, जगमाता को अबला जान

नष्ट हुआ वैभव सारा, लंका जल हुआ राख समान

बरज नहीं किसी का माना ,दर्प चढ़ा जब परवान

मार निकाला सगे भ्राता को ,जिसने अपना बैरी जान

पर नारी की आश में, भूले स्वनारी का जो सम्मान

लगे डूबने कुल-कुटुब, मरने लगे सेना संतान

खुली नींद जब कुंभकरण की ,देने पहुंचा अग्रज को ज्ञान

नहीं समझ तब भी आया ,मर गये जब कुंभकर्ण पहलवान

समर भूमि, सोने की लंका का राजा ,और उधर श्री भगवान

लंका के राजा की जय इधर गूँजते , उधर गूँजते जय जय श्री राम

सर से, सर-सर दश सर को , काटे रावण के , रण पर श्री रघुनंदन राम

बीस बाहु, बीस बाण से बिलगे, नाभि में आखिरी अग्नि बाण

करूणा सागर की किरपा से, हुआ रावण को तब आत्मज्ञान 

लगे तजने जब दम दसकंधर, मुख से बोले तब हे राम !

यश-बल,धन-वैभव,पद सब में , नहीं ज्ञान में तू मुझसा महान

तू जीता मैं हारा फिर भी, नहीं भ्राता मेरा लखन समान

कहें राम तब अनुज लखन से जाओ सुनो दशानन का ज्ञान

सुने वचन लखन रावण केे, व्यर्थ में सारे दर्प अभिमान

तज सारे अशुभ कर्माें को, देर न करे कोई शुभ काम

शत्रु तुच्छ न जानिए, छोटा हो चाहे सुई समान

दे उपदेश लंकेश लखन को , प्रभु कर पाई परम सुख धाम

तब से अब तक इस जग में चर्चित , रामायण में श्री राजा राम

हाथ उठाकर आओ सब बोले ! जय श्री राम, जय जय श्री राम!

अखिल ब्रम्हांड नायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम।। 




शनिवार, 3 अगस्त 2024

आगे हरेली आगे रे....

सुनव संगी अउ सुजान,

लइका पिचका अउ सियान

मन मां उछाह छागे रे 

आगे हरेली आगे रे 


खेती के औजार आज गा धोवावत हे

महीना भर ले बौरा के आज पूजा पावत हे 

नांगर कोपर अउ दतारी गैंती रापा अउ कुदारी 

श्रम के देवता आरती उतारे हे

आगे रे हरेली आगे रे


फूल पान हुम दीप खरहोरी अउ चिला

मिलजूल  पूजय परसाद पावे माइ-पिला

गली खोर महकत हे लइका मन हा चहकत हे

मनभावन मगन लागे रे

आगे हरेली आगे रे


गांव के बइगा किंजरत हे गली पारा 

धर के मोहाटी मां खोंचत हे लिमडारा

हरियर पावन लागय, रोग राई हर भागय

खुशहाली ह हमाथे रे

आगे हरेली आगे रे 


डोकरा बबा नाती ला मनावत हे

बांस के लकड़ी मां गेड़ी ल खपावत हे

लइका मन घेरी बेरी रचमच रचमच गेंड़ी 

दउड़त मचत जावे रे 

आगे हरेली आगे रे।


बन के बनगोंदली अउ दशमूल के जरी

अहिरा ले बिसाथे, जे होथे रोगहारी

अण्डी रूखवा के पान, गंहू पिसान के लोंदी सान 

मवेशी ला खवाथे रे

आगे हरेली आगे रे


*लिखेश्वर साहू*

*ग्राम सौंगा*

*पोस्ट-गिरौद*

*मगरलोड , धमतरी*

*9669874209*

बुधवार, 10 जनवरी 2024

आग को बढ़ते रहो.. डिस्टरबेंस को by कहो....

एक समय की बात है दो दोस्त थे एक का नाम हितेश और दूसरे का नाम नितेश, दोनों एक ही साथ पढ़ते थे, हितेश बड़े लगन से पढ़ाई किया करता था स्कूल में और घर में भी हितेश समयानुसार सारे कार्य कर लेता था, यथा समय खेलने कूदने और साथियों से मेल जोल भी रखता था। तब नितेश जो हमेशा इधर उधर गपशप की बातें करता था और हमेशा दूसरे को चिढ़ाने का काम करता था, नितेश हमेशा हितेश को किताबी कीड़ा, रट्टू तोता कह चिढ़ाता पर हितेश उनकी बातों को ध्यान नहीं देता था,समय बीतता गया दोनों ने 12 की पढ़ाई पूरी कर ली और आगे की पढ़ाई के लिए शहर चले गए दोनों अब अलग हो चुके थे। वे अपनी अपनी इच्छानुसार आगे बढ़ने लगे थे, हितेश का रवैया जैसा था वैसे बरकरार रहा, नितेश भी अब तक वही रवैया लिए चल रहा था, नितेश की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद से नितेश 3 साल से नौकरी की तलाश में भटक रहा था, और बेरोजगारी की मार झेल रहा था, वे अब निराश हताश से रहने लगे थे , एक सूचना मिली की एक बड़े कंपनी में नौकरी का ऑफर है वे अपने दस्तावेज लेकर इंटरव्यू देने के लिए निकले वहां जाकर वे अपनी बारी के इंतजार में लग गए उम्मीदवारों की लंबी कतार थी, हताश निराश नितेश के चेहरे पर बेचैनी बढ़ती जा रही थी, अचानक उसे पुराने दोस्त हितेश दिखे, नितेश ने उसे आवाज़ दी उनके पास गए उनसे पूछा आप हितेश हो न?हितेश ने भी उन्हें पहचान लिया उसने कहा हा मैं भीं तुम्हे पहचान लिया तुम नितेश हो नितेश ने कहा। मैं यहां इंटरव्यू देने आया हूं और आप भी, हितेश ने मुस्कराया कहा मैं आप से बाद में मिलता हूं और वहां से चला गया, थोड़ी देर बाद नितेश की बारी आई , हितेश को इंटरव्यूअर की खुर्सी पर देख उनके होश उड़ गए, भौंचक्के रह गए, इंटरव्यू ख़त्म होते ही चेहरे पर मायूसी छा गई, हितेश की कंपनी के लिए इंटरव्यू में नितेश फेल हो गया, उसने रोनी सूरत बनाते हितेश की ओर देखा और नौकरी के लिए विनती की 3 साल से नौकरी की तलाश में हूं कही भी नहीं मिल रहा आपकी बड़ी कृपया होगी, हितेश ने कहा देखो नितेश मुझे अपनी कंपनी के लिए ऐसे लोग चाहिए जो एक दूसरे को प्रोत्साहित करें, वे आपस में सहयोग करते हुए काम करें, किसी को उनके काम से डिस्टर्ब ना करे, किसी को उनके मार्ग से विचलित ना करें.. नितेश का सिर शर्म से झुक गया वह मायूस चेहरा लेकर दफ्तर से निकल पड़ा, उन्हें समझ आ चुका था की किसी दूसरे का मजाक बनाना किसी को किसी के काम में डिस्टर्ब करना किसी को बाधा में डालना अच्छी बात नहीं इनसे हमारा ही नुकसान होगा...



लिखेश्वर
9669874209

सोमवार, 8 जनवरी 2024

कृतज्ञता

कितना अद्भुत है ना यह पूरी श्रृष्टि, कितने मनमोहक है ना यहां के नजारे, सुंदर और मनोरम यहां के नजारे हमें आह्लादित करते है, सोचकर देखे हमें बेहतर जीवन जीने के सारे संसाधन यहां मौजूद है, रहने को घर, खाने को फल, पीने का पानी, पहनने को वस्त्र, श्रृंगार के लिए आभूषण,हमारा जीवन कितना आसान और सुखमय हो गया है प्रकृति की कृपा से, देखने के लिए सुंदर दृश्य, सुनने को प्राकृतिक संगीत, सैर करने के लिए मोहक वादियां भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध है, सहयोगी और सुरक्षा के लिए हमारे परिवार और समाज, संगी साथी है, मार्गदर्शन के लिए हमारे  वरिष्ठ जन और शिक्षक लोग है, पूरी की पूरी श्रृष्टि हमें बेहतरीन और सुखद अनुभव दे रही है ऐसे सुखद और सरस अनुकम्पा के लिए हम प्रकृति को, इस ब्रह्मांड को कुछ देना चाहे तो क्या दे सकते है ?है कुछ चीजें अपने पास जो बदले में दिया जा सके जो इन समस्त बहुमूल्य उपहारों के तुल्य हो , नहीं , पर कृतज्ञता का भाव तो रखा ही जा सकता है, हम कृतज्ञता व्यक्त तो कर ही सकते है जिसके लिए न तो रुपिया, पैसा, साधन संसाधन, ना विशेष जगह, ना विशेष समय की आवश्यकता है और ना ही विशेष, शब्दों की आवश्यकता है, हमें बस धन्यवाद देना है उन सब चीजों के लिए जो हमें हमारे जीवन में मिला है, तो आइए धन्यवाद करें.....

धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
सुखद जीवन के लिए धन्यवाद
सुंदर नजरो और नजारों के लिए धन्यवाद
मधुर वाणी के लिए धन्यवाद जिनसे हम खुद को व्यक्त करते हैं 
सुनने के लिए मिले कानों के लिए धन्यवाद जिनसे हम सुंदर नाद सुन पाते है
सहृदयता के लिए धन्यवाद जिनसे हम किसी के प्रति सहृदय हो जाते हैं 
मस्तिष्क व स्मरण शक्ति के लिए धन्यवाद जिनसे हम कुछ याद कर पाते हैं और भूल जाते हैं 
पैरो के लिए धन्यवाद जो हमें इस धरा पर साधे हुए हैं 
हमारे उन हाथों के लिए धन्यवाद जो हमें किसी कार्य को पूरा करता है 
जिव्हा के लिए धन्यवाद बेहतर स्वाद का आनंद देता है 
नासिका के लिए धन्यवाद जो हमे सुंदर और सुगंध की अनुभूति देता है 
त्वचा के लिए धन्यवाद जो हमें सुरक्षा करता है, हमें स्पर्श का अहसास कराता है..
प्रेम और स्नेह के लिए धन्यवाद जिनसे हम एक दूसरे से जुड़ पाते हैं 
विश्वास के लिए धन्यवाद जिनसे हम एक दूसरे के साथ मिलकर कोई काम पूरा कर पाते हैं 
ऊर्जा के लिए धन्यवाद जो हमारे शरीर को और मन को चलाता है 
प्राणवायु के लिए धन्यवाद जिनसे हमारा जीवन हैं..
उन समस्त संसाधनों, समस्त जीवों, प्राणियों, समस्त मानवों, समस्त घटकों , समस्त ग्रहों, नक्षत्रों,  स्वयं के अंतरभावो व समस्त कारकों का धन्यवाद जिनसे यह जीवन सुचारू रूप से चलता है,  और आशा है आगे भी चलता रहेगा....
एक बार पुनः 
धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
मैं कृतज्ञ हूं, मैं आभारी हूं, मैं ऋणी हूं, 
मेरा यह कृतज्ञता और आभार स्वीकार हो....


लिखेश्वर साहू
9669874209