बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

बच्चों का खेल में बड़ो का झगड़ा

बच्चे खेल रहे थे, आपस में बातें भी कर रहे थे, बड़े सुंदर सुंदर प्यारे प्यारे बच्चे, शरारत भरे उनके खेल बड़ा ही मनमोहक, रेत से घर बनाना, रेत ऊपर से नीचे गिराना, हवा चल रही थी, हवा के झोंको से रेत के कुछ कण एक बच्चे के आंख में चला गया, बच्चा रोने लगा आंख को खोलता, बंद करता अपने हाथों से आंखो को रगड़ता, बच्चे की रोने की आवाज पास के मकान में गृहकार्य करती हुई एक स्त्री के कानों पर पड़ी उसे लगा बाहर कोई रो रहा है, खिड़की से झांककर देखा तो दौड़ती दौड़ती घर से बाहर आई शायद रो रहा बच्चा उनका ही हो, चिल्लाते हुए वो आई किसने मारा कौन है वो जिनको मेरे बच्चे का खेलना पसंद नहीं आया, खेलना है तो शांति से खेलो ना ऐसे मारा पीटी क्यों कर रहे हो,
आकर उसने अपने बच्चे से पूछा क्यों रो रहे हो, बच्चा आंख रगड़ रहा था, महिला आंख में रेत देखकर महिला परेशान हो गई, गुस्से से उसने पुछा किसने मेरे बेटे के आंखो पर रेत डाला ,बच्चे ने उंगली उठाकर एक बच्चे की तरफ इशारा किया , बस क्या था फिर महिला बड़बड़ाती हुई पड़ोस के मकान में पहुंच गई और और भला बुरा कहने लगी, कहने लगी सम्हाल के रख अपने बच्चे को , किसी को भी मारता रहता है देखो तो क्या हाल कर दिया मेरे बच्चे का, कितना रो रहा है, आंख में रेत डाल दिया, उनकी बात सुनकर इनको भी गुस्सा आया कान मरोड़ते अपने बेटे का उसने पुछा की क्या ये जो बोल रही है वो सच है, बच्चे ने बोला मैंने कुछ नहीं किया, बस क्या था फिर वो महिला भी अपने बेटे को बेकसूर जान भीड़ गई, तू क्या सोच के बोलती है, मेरे बेटे को झगड़ालू बोलती है, उसे बदमाश समझती है, मेरे दरवाजे चढ़ मुझसे लड़ने आई है, झगड़ालू औरत, लड़ने और झगड़ने में तुम्हें मजा आता है, कोई काम धाम नहीं क्या तेरे घर जो हमेशा झगड़ने में लगी रहती है, ऐसा सुनते ही पहली महिला का माथा गरम हुआ, उसने फिर उन्हें गाली देना शुरू कर दिया, काली कलूटी जैसी तेरी शकल वैसी तेरी अकल, कुछ भी बोलती है, मुझे झगड़ालू बोलती है, मुझे काम नहीं बोलती है, दिन भर तो तू दरवाजे में बैठ क्या करती है, क्या दरवाजे में बैठ तू दिन भर काम करती है, गाली में आने जाने वाले लोगों को गिनती रहती है, पहली महिला के ताने सुनकर दूसरी महिला का फिर शुरू हुआ उसने कहा, अरे जा जा मोटी भैंस कहीं की, तेरी बुद्धि तो भैंस जैसी मोटी है, तू क्या करती है दिन भर मोबाइल में, पटर पटर लगी रहती हो,और फुर्सत मिल गया तो इसके बारे में उसके बारे चारी चुगली में लगी रहती हो और मुझे बोलती हो , बस क्या था बात बढ़ता जा रहा था, इतने में उसका पति अंदर से आया उनका बल और बढ़ गया उसने दो कदम आगे निकल कर उंगली दिखाकर गाली गलौज शुरू कर दी, सामने से जवाब मिला अपने घरवाले को बुला लाई झगड़ने वो भी क्या कर लेगा देखती हूं, अजी सुनो तो आओ देखो देखो इन लोगों को, पति पत्नी मिलकर मुझे झगड़ा कर रहे है, मुझे मारने के लिए आए है, ऐसा कह खींचते हुए अपने पति को ले आई बात बढ़ गई, आस पास खड़े लोगों ने भी अपने अपने तरफ खाद पानी देना शुरू किया, अरे देख तो तुझे उसने ऐसा कहा, जा तू जा तो देख उनको उनकी हिम्मत की तेरे रहते तेरी पत्नी को ऐसा बोले,फिर क्या था दोनों के पतियों ने भी हल्ला शुरू कर दिया एक ने दूसरी की पत्नी की बुराई दूसरे ने पहले पत्नी की बुराई की आसपास के लोग दर्शक बन देखने लगे, एक ने शांत कराने की कोशिश की बात नहीं बनते देख उसने वहां से अपना रास्ता चल दिया,  कुछ लोग आग में घी डालने का काम करने लगे, बात मारा पीटी में आ पहुंची, हाथ मुक्को से दोनों तरफ दे दनादन शुरू दोनों तरफ के बच्चे रो रहे थे , जिनके आंख में रेत घुसा था  हाथापाई करते बच्चे को और जोर से लग गया , बच्चा और जोर से रोने लगा, दोनों परिवारों में लड़ाई बढ़ गई थी आवाज सुनकर समाज के मुखिया लोग पहुंचे जैसे तैसे करके उन्होंने दोनों परिवारों को शांत कराया, मुखिया ने पूछा तो पहली महिला ने बताया इनके बच्चे ने मेरे बेटू को रुला दिया, एक ने कहा मेरे बेटे ने कुछ नहीं किया, वही फिर शुरू दोनो महिला लड़ने, मुखिया ने जोर से चिल्लाया और कहा बंद करो लड़ने, पहले ये तो बताओ तुम दोनों ने देखा क्या अपने बच्चों को रोते रुलाते , दोनों ने कहा नहीं, तो मुखिया ने कहा देखो बच्चे है, बच्चे आपस में खेलते दौड़ते भागते है, खेल में हार जीत होती है, कुछ बच्चे हारते है कुछ जीत जाते है , कभी कभी हारने वाला बच्चा रो पड़ता है, जितने वाला खुशी मनाता है, पहली महिला ने कहा पर मेरे बच्चे के आंख में रेत डाल दिया था इस बच्चे ने, मुखिया ने कहा रूको थोड़ा, बच्चों बताओ कौन कौन तुम्हारे साथ खेल रहे थे,उन बच्चों को अपने साथ मुखिया ने बिठाया बड़े प्यार से पूछा फिर एक बच्चे ने बताया हम सभी खेल रहे थे, रेत उड़ा और इनकी आंख में घुस गया, फिर ये रोने लगा, चिल्लाती हुई आंटी आई और इसके घर चली गई, फिर झगड़ा होने लगा, मुखिया ने समझाया देखो बात बहुत बड़ी नहीं है, रेत हवा में उड़कर आंख में पड़ा तो बच्चा रोने लगा, बच्चा है रोएगा ही, तुम्हें चुप कराना चाहिए था, बच्चों को समझा देती ऐसा मत खेलो, अपने बच्चे के आंख को धो देने के बजाय समझाने चली गई, और तुम भी जब तुम्हारे घर आई तो तुम अपने बच्चे के बिना गलती के भी इनसे माफी मांग कर कह सकती थी की बच्चा है हो गया होगा, मैं समझा दूंगा, अगली बार ऐसा नहीं होगा तो बात वही शांत हो जाता पर ऐसा नहीं करके झगड़ना शुरू कर दिए, छोटी बात को आपने बड़ा बना दिया, मुखिया के समझाने से दोनो ने ही अपनी गलती के लिए माफी मांग अगली बार ऐसा नहीं होने का वादा किया, मामला शांत हो गया पर दो परिवारों का मनभेद बना ही रह गया....

देखिए ऐसे ही होती है हमारे आसपास की भी कुछ घटनाएं जो छोटी छोटी बातों को विवादों, झगड़ो और पारिवारिक दुश्मनी में बदल देती है, हमें अपनी सोच, और समझ को बदलनी होगी, हमें अपने मुंह से निकलने वाले शब्दों को समझना होगा हम क्या बोल रहे है, हमारे बोलने का अर्थ क्या होगा, उसका प्रभाव सामने वाले पर क्या होगा, क्या इससे उसको अच्छ लगेगा, मामला सुलझेगा की उलझ जायेगा , यह प्रत्येक को समझना होगा, सामाजिक सद्भावना ,आपसी सहयोग एक दूसरे का सम्मान बना रहे ऐसे, मधुर वचन बोले , मधुर व्यवहार करें....



लिखेश्वर साहू
9669874289

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