शनिवार, 16 मई 2020

ये कइसन हाेथे आज

जम्मो पढ़ईया गुणईया संगवारी मन ला जय जोहार हे..

              ये कइसन होथे आज समारू.. संगवारी हो ए कविता मां आज के सामाजिक,राजनितिक दशा रखे के परयास करत हंव, आज गांव ,समाज, में अइसन परिस्थिति देखे सुने बर मिलथे. संगवारी हो कविता ला पढ़व, गुनव , समझव अउ शेयर करव अउ हां ए कविता मं कहूं खंगे होही, कहूं बढ़के लिखाय होही एला बताय बर मत भुलांहू.....           
 
            ये कइसन होथे आज ? समारू कुछ समझ नई आये !
            कोन रद्दा मां रेंगत हे मनखे, कोन हा रद्दा देखाये?
                 








बंद मुंहु हे,कान मुंदाये, आंखी मां टोपा बंधाये
आज के मनखे गांधी बेंदरा के उलटा अरथ बताये              
गांधी कहिस हे बुरा मत देखव, बुरा कहव झन सुनव
होवन दे दुनिया में जे होवत हे , रद्दा अपन रेंगव
मनखे जोड़े गजब के हाना कइथे ज्ञानी मन बताये हे       
नशा पान कर गद्दी बइठे दुनिया ल इही समझाये
जो होवत हे अच्छा होवत हे जो होही अच्छा होही
मंय कहिथंव फेर कब तक दुनिया मं अइसन घटना होही?

लबरा, चोरहा, मंदहा, गंजहा बनके चतुर सुजान
आज कइसे ज्ञान बताथे बन गेहे सियान
कहिथे बात गांव विकास के ए विकास का होथे ?
चोरी होवत हे भुईयां घलो हा, का सियान मन सोथे ?   
नारी बनगे बिचारी खोवत हे मान सम्मान
चल जवाब ला देबे आके कहां लुकाये सियान?

बुड़त हे बस्ती मंद मउहां में लईका लईका होवत नशेड़ी
तै विकास बर सियान बने हस का ? फेर का बंधाये हे बेड़ी ?
लईका मन पढ़ई छोड़त हे धरत हे अनित के रद्दा
गली खोर मां उछरत रेंगे बकत हे गंदा गंदा
दाई बहिनी के इज्जत हा फोकट मं नई हे आये
कोन समझाये ये लोगन ला जब सियान हबे बउराये

दिखथे पईसा , देखाथे पईसा होगे हे हाय पईसा
मिलगे पईसा, खाके अइड़सा बनके बइठे भईंसा
कतको बोल कतको समझाले तभो समझ नई आये
भइंसा के आघू बिन बजा फेर भईंसा रहे पघुराये
बिन पईसा वाला काम नई होवे ,कछु नई होवय सेवा
तुरते काम होवत हे इहां जब मिलत हे मेवा
.

जब तक अंधेरगरदी विचार अइसन, ए दुनिया में होही
अंधरा में कनवा राजा होही, परजा जम्मो रोही
चलव रे भईया जागव ,अब अइसन नई करना हे
मिल जुल के सुमत ले हमला विकास के रद्दा धरना हे


                                                                                      लिखेश्वर साहू 
                                                                                 ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
                                                                          तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 
                                                                                         9669874209







 

बुधवार, 6 मई 2020

छत्तीसगढ़ी कविता


कतको झिन ला देखेंव मैंहर अतेक़ समझदार हे
बिगन मास्क के कोरोना से लड़े बर तैयार हे
ऐती ओती मत जाव, घेरी बेरी सरकार चेतावथे ,
फेर हुशियार मन एक नई सुने़, जेती नी जाना हे उहितीच जावथे
कतको बरजिस़, कतको हरजिस ,चाैंक में नी सकलाना हे
हम सब ला मिल के कोरोना ला भगाना हे
जनता समझदार हे सब समझगे
सरकार के बात कागज मं अरहजगे
चाैंक चाैराहा में जम्मो सकलावथे
जम्मोझन मिलजुल के कोरोना ला भगावथे
लाॅकडाउन हा मजा होगे ,आलसी अउ अलाल बर,
सजा होगे एहा करमइता रामलाल बर
जेब होगे खाली ,घर में बाई हा खिसियावथे
घर में खुसरे खुसरे चांउर दार हा सिरावथे
लाॅकडाउन में सरकार के नियम कइसा कइसा
फोकट में चांउर ,नून, फोकट में पइसा
थोरको होगे कमी ,नियम कानून ला बतावथे
अपन जिम्मेदारी समझत नइहे
दूसर ला सिखावथे
लाॅकडाउन में सब बेरोजगार हे
बिना पइसा के सब हाहाकार हे
सरकार ला होगे बड़े जिम्मेदारी
एक डहर कोरोना, ता दूसरा बेरोजगारी
बेरोजगारी दूर करे बर ,मनरेगा खोलवाइस
खुलगे गोदी जम्मो एके जगह जुरियाइस
कम नई होहे अभी कोरोना के खतरा
पहिनव मास्क, एके जगा मतरा
कहां मानत हे कोनो कखरो बात ला
कोन हा धोवत हे साबुन में अपन हाथ ला
सुन जी समारू़, तहू सुन जी फिरता
सबके सुवास्थ अउ रोजगार के सरकार ल हे चिंता
फिकर हेाही तुंहला, कहूं अपन परिवार के स्वास्थ्य के
पहिरव मास्क़,एक-दूसर ले दूरी रखव पांच हाथ के
तभे तो भगाबो हमन कोरोना महामारी
गांव, समाज, देश सुरक्षित रहय संगवारी                 







                                                                                      लिखेश्वर साहू 
                                                                                 ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
                                                                          तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 
                                                                                         9669874209