प्रणाम
आप सभी को
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
मां का आशीष आप को मिलता रहे...
प्रत्येक मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक समाज में रहकर विकास करता है, निश्चित रूप से समाज और खुद का विकास करता है, परिवार समाज का छोटा रूप होता है, समाज में सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक उन्नति व विकास हेतु विभिन्न प्रयास किए जाते है, एक दूसरे के परस्पर सहयोग से यह कार्य संपन्न होता है, प्रत्येक व्यक्ति की समाज के प्रति निष्ठा ,समर्पण का भाव, उनके नेक विचार और कार्य समाज में परिवर्तन ला सकते हैं, समाज का प्रत्येक सदस्य कोई न कोई विशेषता , प्रतिभा, रखता है , जो जिस तरीके से समाज की सेवा करना चाहे करता है, अपनी विशेषताओं, दक्षताओं का, अपनी नेतृत्व क्षमता का नेकी और समझदारी से उपयोग करते हुए समाज के उतरोत्तर विकास में अपनी जिम्मेदारी निभाता है, और निभाना भी चाहिए , वह इसीलिए भी जरूरी है कि हम जिस समाज में रहते है वही पर रहकर ही हम अपने और अपने परिवार के लिए एक बेहतर जीवन मूल्य देने की सोचते है, प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि उनके परिवार ,बच्चे अच्छे व्यवहार, अच्छे संस्कार, अच्छे रीति रिवाजों को जाने समझे, अच्छी परंपराओं को जाने, मानवीय मूल्यों को समझे , परिवार में यह सब बातें सभी अपनी समझ व जानकारी अनुसार बताते है ,समझाते हैं और आचरण भी करते है पर ऐसा क्या हो जाता है की जब वही बच्चा समाज के बीच आता है तो उनके आदत,व्यवहार, संस्कार भिन्न हो जाते, सम्मान का भाव, बातें करने का लहज़ा, उपयुक्त बर्ताव, चाल चलन सब बदल जाते है, यह बदलाव कभी सकारात्मक होता है तो कभी नकारात्मक , नकारात्मक बदलाव शायद किसी को भी पसंद नहीं किसी बच्चे का अनुचित व्यवहार जब किसी के साथ होता है तब फिर प्रश्न उठता है कि इस तरीके के व्यवहार के लिए जिम्मेदार कौन है, अधिकतर कह दिया जाता है , बच्चों के मां बाप को समझाना चाहिए ऐसे बच्चों को,इनके मां बाप कुछ नहीं बोलते होंगे इनको, बड़ा ही उद्दंड बालक हो गया है, पर ये रवैया आई कहां से, उन्हें ये संस्कार मिले कहां से सोचिए और गंभीरता से सोचिए..
अधिकतर लोगों को गली मोहल्ले चौक चौराहे जहां पर बच्चे खेल रहे होते है उनके सामने कभी कभी उनके साथ ही अभद्र व्यवहार करते देखे जा सकते है, गंदी गलियां उन्हें दे देते है, या उनके सामने ही किसी की मां बहन जैसे अश्लील गालियां , दी जाती है, अब इन सभी व्यवहारों का उन अबोध बालकों का प्रभाव क्या होगा, और वे सभी बच्चों जो कुछ जानने समझने लगे है उन्हें लगता है की बड़े लोग जो कर रहे है वे सही है, वे फिर अनुकरण करने लगते है, कोई भी कार्य ऐसे ही सीखा जाता है देखकर, सुनकर और फिर उनका प्रयोग कर गंदी भाषाओं, गंदे व्यवहार घरों में तो नहीं किया जाता, ये तो घर के बाहर ही चौक चौराहे, बाजारों कही पर भी हो जाता है, इसके जिम्मेदार कौन? देखिए हम इस बात से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते है की हमारा प्रत्येक कार्य व्यवहार समाज में अमूल चूल परिवर्तन करता है, हमारा प्रत्येक कार्य अच्छे और बुरे परिवर्तन लाते है, समाज में रहते हुए हमारा रवैया कैसा है, इन्हें प्रत्येक व्यक्ति सोचे समझे, उपयुक्त सुझाव, दे सलाह दे,
समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वे अपने समाज के प्रत्येक बच्चों को बेहतर संस्कार, बेहतर सीख दे ताकि आने वाले पीढ़ी बेहतर नागरिक और बेहतर सामाजिक प्राणी बन सके, बिलकुल इस बात से यह सोचकर पीछे न हटे की बच्चों को बेहतर संस्कार देना सिर्फ मां बाप का कर्तव्य है , इन्हें सामाजिक चुनौती स्वीकार करें समाज के लोग इस बात से अवगत हो जाए की हमें हमारे समाज को बेहतर नागरिक की जरूरत है, और आने वाले प्रत्येक नागरिक को हम ही अच्छे संस्कारों, अच्छे विचारों से पुष्ट करेंगे, बेहतर नेतृत्व प्रदान करेंगे..
आशा है सभी को यह लेख समझ आए, समझना सभी चाहते है विशेष बातों की जानकारी के मिले बिना उन बातों की जानकारी व समझ पाना मुश्किल है,
जानकारी मिलने पर सोच विचार किया जा सकता है, सुधार के प्रयास भी किए जा सकते है....
सोच बदले, समाज बदले
जिस तरीके से समाज की सेवा कर सको करते रहो...
बदलाव का मेरा एक प्रयास....
लिखेश्वर साहू
9669874209
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