देश मेरा गणतंत्र है
परवश होकर के बहता है रक्त पर
मन भी सभी का परतंत्र है
कहते सभी मां भारती.....
देश मेरा गणतंत्र है
संविधान के बाबा ने था जो हमें पाठ पढ़ाया
रखकर वो किताबे किसी नें मेज में आज सजाया
एकाग्रचित्त हो पढ़ता जैसे पंडित का वो मंत्र है
कहते सभी मां भारती.....
देश मेरा गणतंत्र है
मुंह मत खोलो बोले है, नेता और अधिकारी
जनता मांगे हक अपना बनकर आज भिखारी
हक छीने है जो जनता से कैसा आज का तंत्र है
कहते सभी मां भारती.....
देश मेरा गणतंत्र है
जकड़ चुके है युवा आज चंगुल में ऐसे महानुभावों के
बोल रहे है बोली वे भी अपने अपने आकाओं के
नशा पान में लिप्त हो चुके ,भ्रष्ट नेताओं का षडयंत्र है
कहते सभी मां भारती.....
देश मेरा गणतंत्र है
दल उनके मिथ्या बकते हैं अपनी दल सच कहती है
प्रपंच पाखंडी कर्म में वे है, निज कर्म में धर्म की गंगा बहती है
कोरी बातें कहने की लगती देश मेरा स्वतंत्र है
कहते सभी मां भारती
देश मेरा गणतंत्र है
कैसे सीखेंगे बच्चे अपने संविधान की बातों को
जो न कभी उद्गार सके अपने मन की जज्बातों को
कोरी बधाई गणतंत्र दिवस में, असल बात सब अत्र तत्र है
कहते सभी मां भारती.....
देश मेरा गणतंत्र है
कैसे कहूं मां भारती देश मेरा गणतंत्र है

बहुत सुंदर साहू जी
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंशानदार गुरूजी
जवाब देंहटाएंअविष्मार्निया गुरु जी।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर भाई
जवाब देंहटाएंआप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद जी
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रयास ।अच्छी कविता के लिए साधुवाद।
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Vah kay baat likhi he manna parega
जवाब देंहटाएंdhanyvad ji
हटाएंबहुत बहुत बधाई हौंसला के लिये बहुत अच्छा लिखे हो 🙏🌷
जवाब देंहटाएंdhanywad ramsing bhaiya
जवाब देंहटाएंBahut Badiya bhai
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