मैंने शहर देखा है मैंने शहर देखा है
गांव से दूर ,
शोर गुल से भरपूर
स्वच्छ पानी को तरसता
उद्योगेा से धूल बरसता
लोगेां में प्रदूषण का कहर देखा है.
मैंने शहर देखा है
बिजली की कमी नही ,
सुविधा का मोहताज नहीं
यही है एक वजह
जहां चांदनी रात की जगह
बिजली के बल्बों से चमकता वो रात का पहर देखा है
मैंने शहर देखा है
शहर की नालियों में ,
‘म्युनिसिपल’ की गाडियों में
शराब की दुकान में
लोगेां की जुबान में
भरा मैंने वो जहर देखा है
मैंने शहर देखा है
भीड़ होते हुए भी तनहाई है,
ये कैसी पहुनाई है
पता नहीं कौन, कौन है
सभी चुप सभी मौन है
अविश्वास से भरा वो नगर देखा है
मैंने शहर देखा है
सरपट दौड़ती वो गाड़ियां
वो मोटरसाइकिल की खिलाड़ियां
वो स्टंट के जाबांज
वो पों पे की आवाज
कठिनाइयों भरा वो डगर देखा है
मैंने शहर देखा है
वो मौसम त्यौहारों का
वो हुस्न बहारों का
ईद,क्रिसमस, होली के रंगो में,
हिदु,मुसलमान,सिख ,इसाई के दंगों में
बरसता वो कहर देखा है
मैंने शहर देखा है
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद
तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.)
9669874209

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