चिंतनीय एवं सोचनीय विषय है कि इस समय पूरा देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है , देश के बच्चे, बूढ़े नौजवान, महिला, पुरूष सभी इस वायरस के प्रभाव में आते जा रहे है, पूरा देश इस कहर से थर्रा रहा है , कईयों लोग बीमारी से पीड़ित है , कई लोग अकाल मौत के आगोश में समा चुके है । देश के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है कैसे इस समस्या से निपटा जाये , सरकार द्वारा लगातार इस बीमारी से बचने व रोकथाम के लिए निर्देश, जागरूकता संदेश दे रहे है , इस बीमारी ने ऐसा कहर बरपाया है कि लोग त्राहि त्राहि कर रहे है । स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सक भी इस वायरस से निपटने सतत प्रयासरत है। लोगों को हिदायतें दे रहे है अपनी भलाई अपने हाथ इस तथ्य को भी लोग नहीं समझ पा रहे है यह और भी चिंतनीय है। ऐसे में देश की जनता का दुख, कष्ट देख मैं आदिशक्ति, प्रकृति शक्ति से सर्वे सन्तु निरामया की अरजी करता हूं
देख तेरे भक्तों पर हे मां! ये कैसी विपदा आई है
त्राहि त्राहि धरती में हाहाकारी कैसी छाई है
कोरोना दानव बन देश मेa] जन&जन को है घेर रहा
ले आगोश में सबको अपनी] वतन को मेरा पेर रहा
हर&दिन] पल&छिन] घड़ी&घड़ी] दिन&दोपहरी] शाम&रात
नौजवान बच्चे बूढ़s] नर&नारी को दे रहा मात
भान तुम्हे मां है इसका या जान के भी चुप बैठी हो
मां तुझसे मैं पूछ रहा किस कारण तुम हमसे रूठी हो
क्या भक्तों पर दया नहीं या फिर परीक्षा ले रही
दूर करो मां इस संकट को तू लाख परीक्षा ले सही
मां अरजी सुन लो मेरी] कष्ट अपनों को ना दो माता
सर्वे सन्तु निरामया] मां दुःख नहीं अब देखा जाता
तब आदि शक्ति मां कहती है---- हे बालक सुन बात मेरी] सब हालत है हाथ तेरे
ना निकलो घर से बाहर] हूं बेटा मैं साथ तेरे
रखो सफाई अंगों को अपने] वातावरण को स्वच्छ करो
खान&पान वेशाभूषण को] नित नूतन नियमित करो
ना मिलो बेवजह किसी से] मिलने पर संयम व्यवहार करो
करो नमस्ते अभिवादन में सीधे संपर्क से तुम डरो
बैठ कुटुम्ब संग में कुछ दिन सत्संग प्रेमानंद चखो
धीर धरो विश्वास करोे मन में ना शंका रखो
है भलाई इस भांति से] कष्ट सभी के होंगे दूर
स्वस्थ्य सभी शीघ्र ही होंगे] होंगे सब सूख से भरपूर---------
त्राहि त्राहि धरती में हाहाकारी कैसी छाई है
कोरोना दानव बन देश मेa] जन&जन को है घेर रहा
ले आगोश में सबको अपनी] वतन को मेरा पेर रहा
हर&दिन] पल&छिन] घड़ी&घड़ी] दिन&दोपहरी] शाम&रात
नौजवान बच्चे बूढ़s] नर&नारी को दे रहा मात
भान तुम्हे मां है इसका या जान के भी चुप बैठी हो
मां तुझसे मैं पूछ रहा किस कारण तुम हमसे रूठी हो
क्या भक्तों पर दया नहीं या फिर परीक्षा ले रही
दूर करो मां इस संकट को तू लाख परीक्षा ले सही
मां अरजी सुन लो मेरी] कष्ट अपनों को ना दो माता
सर्वे सन्तु निरामया] मां दुःख नहीं अब देखा जाता
तब आदि शक्ति मां कहती है---- हे बालक सुन बात मेरी] सब हालत है हाथ तेरे
ना निकलो घर से बाहर] हूं बेटा मैं साथ तेरे
रखो सफाई अंगों को अपने] वातावरण को स्वच्छ करो
खान&पान वेशाभूषण को] नित नूतन नियमित करो
ना मिलो बेवजह किसी से] मिलने पर संयम व्यवहार करो
करो नमस्ते अभिवादन में सीधे संपर्क से तुम डरो
बैठ कुटुम्ब संग में कुछ दिन सत्संग प्रेमानंद चखो
धीर धरो विश्वास करोे मन में ना शंका रखो
है भलाई इस भांति से] कष्ट सभी के होंगे दूर
स्वस्थ्य सभी शीघ्र ही होंगे] होंगे सब सूख से भरपूर---------
रचनाकार
लिखेश्वर साहू
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 9669874209
Hw ji bane rahis he
जवाब देंहटाएंthanks ji dost...
हटाएंNice
जवाब देंहटाएंthanks ji dost...
हटाएंNice dost
जवाब देंहटाएंdhanywad mere bhai
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