रविवार, 26 अप्रैल 2020

मनरेगा के काम गजब सुहाथे


 संगवारी हो जय जोहार,
       गांव गंवई के रहइया अन ,बासी चटनी के खवइया हरन अउ बेरा ढरत ले हकन के कमइया अन, वइसे तो हम गंवईहां मन बर काम के कोनो कमी नई रहय फेर कभू  दू चार दिन बर बेरोजगार हो जथन ,हमर बेरोजगारी दूर करे बर कहव चाहे गांव के विकास बर कहव ता सरकार हर मनरेगा चलावत हे , ए मनरेगा हर सब झन बर मजा होगे हे काबर कतको बेरोजगार ला रोजगार मिल जथे, कतको निरधन ला पइसा मिल जथे , फेर कतको ला तो खड़े होएके पइसा मिलथे, ता कतको हा बइठे बइठे पइसा पाथे, कतको तो बेंदरा कस ए कोती ले ओ कोती घूम घूम के पइसा पात हे, फेर कतको घर में बइठे हे फेर ओखत खाता में पइसा जात हे , मुंड पीरा तको हो जाथे जब पसीना ओगार के कमइया करमइता के पइसा नई मिलय अउ कतको ला हप्ता दू हप्ता के पइसा फोकट में मिल जाथे, आये दिन अखबार मां ए सब पढ़े बर मिलत रहिथे... ए सब के कारण हे लोगन के मानसिकता, सरकार के पइसा हरे हमर का जात हे ,अइसे कहिके जनता, नेता, अधिकारी,कर्मचारी कोनो ध्यान नई देवय , जब काम बिगड़ जाथे त सब एक दूसर ला दोष देथे, ए सब ला देख के थोरिक संसो होथे, सोंचथव कि सब झन अपन जिम्मेदारी समझतेन, सब ईमानदारी ले काम करतेन, ता गांव, समाज, देश के विकास हर होतिस....
मेरी कलम से लेखन अभ्यास के ए कड़ी मां मनरेगा के काम गजब सुहाथे ला पढ़व, गुणव, बतावव.....
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे
सात बजे जाथे अउ आठ बजे घर आथे
फेर कोन जनी एक घंटा में कतेक कोड़ाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

झिन गोठिया घंटा पहर ला
गोदी तो आधा घंटा में कोड़ाथे
पन्दरा मिनट हाजिरी ,पन्दरा मिनट आराम फरमाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे   

कोनो कोड़थे दु इंच ता कोनो कोड़े इंच चार
सासन के फरमान जइसे जम्मो हे बेकार
कोनो निमार के खनथे, ता कोनो रपोट बोहार के आथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

कतको मेट हे फेर सब मटियामेट हे
कोनो मेट अउ सचिव ले ता कोनो पंच सरपंच से सेट हे
कतको डाकबेल मार, कतको हांका पार,
फेर गोदिहारा अपन मन के चलाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

हमर, तुंहर, ओखर ल देख, एती ओती चारो कोती देखाथे
कोनो खड़ेच हे , बइठेच हे कोनो,
हाजिरी में भगवान कस कोनो दरश देखाथे
जांगर थकगे कतको पेशन लेवथे, फेर मनरेगा में काम कमाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

महाघोटाला , गड़बड़झाला मनरेगा के मस्टररोल हे
तरी ले उपर उपर ले तरी सब ढोल में पोल हे
करमइता के पइसा मिलत नइहे,
एक दिन कमाके कतको हप्ता दू हप्ता के पइसा पाथे
तेखरे सेती लोगन ला मनरेगा के काम गजब सुहाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

न रोजगार सहायक गणित जाने ना मेट जाने नापा
गोदिहारा मन नई जाने कइसे धरथे कुदारी रापा
डबरा ला खन के डिपरा ला पाट
रेती मां घलो तरिया कोड़ाथे
आज बंधाके पार काली पानी मां बोहाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे


हमर का जाही पइसा हे सरकार के
माई पिला खाबो बने सबोझिन बरार के
अइसे कहिके सबोझिन बंधा जथे सुनता
इसनेच मां जम्मो के बिगड़ जथे बुता
बाद मां अइसने हा मुड़ पीरा बनाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे

बिगड़े झिन काम बन जाये जम्मो बुता
अखबार-समाचार मां झन होवय फभीता
सुमत ले कमाबो झन देवव-खावव गारी
सब ला समझना हे अपन जुम्मेदारी
करम-इमान के जम्मो फल पाथे
निमान से संगवारी हो मनरेगा के काम गजब सुहाथे




                                                                                      रचनाकार
                                                                                    लिखेश्वर साहू 
                                                                                ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
                                                                          तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 
                                                                                         9669874209



 

20 टिप्‍पणियां:

  1. आपने कविता के माध्यम से मनरेगा के स्थिति के बारे मे कटु व्यंग किया है । जो सराहनीय है।

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  2. बहुत सुंदर भाई वास्तविकता को बयां किये हो

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  5. अच्छा व्यंग है आज की स्थिति में...

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