जय जोहार संगवारी हो ,
वइसे तो उवत सुरूज हर सबो संसार मां अंजोर बगराथे अउ एखर उजियार मां सबो पराणी अपन बुता मां लग जाथे अइसन में सबो जगह के अलग अलग दृश्य देखे बर मिलथे कतका मनोरम लागथे बिहनिया के बेरा, फेर हमर गंवई गांव के बिहान के चित्रण ही अलग होथे, त लेवव संगवारी हो आज के ए कड़ी मं उही बिहान के चित्रण....
वइसे तो उवत सुरूज हर सबो संसार मां अंजोर बगराथे अउ एखर उजियार मां सबो पराणी अपन बुता मां लग जाथे अइसन में सबो जगह के अलग अलग दृश्य देखे बर मिलथे कतका मनोरम लागथे बिहनिया के बेरा, फेर हमर गंवई गांव के बिहान के चित्रण ही अलग होथे, त लेवव संगवारी हो आज के ए कड़ी मं उही बिहान के चित्रण....
उवत सुरूज के अंजोर
होगे गांव गली खोरहोगे गांव गली खोर संगवारी
होगे गांव गली खोर
- होवत बिहनिया सुरूज जगमगावय
चिंउ चिंउ चिंउ चिंउ चिरइया करे शोर
गांव गली अउ खोर खोर
- ओस के बुंद सुग्घर पेड़ के पतइया में
सुग्घर भौंरा कस मन झूमे मोर
गांव गली अउ खोर खोर
- भुइयां के भगवान करम के गीत गावय
गुंजे किलकारी लइका के चहुं ओर
गांव गली अउ खोर खोर
- चउंक मां लइका मन खेलत हावे बांटी
गुंजगे जम्मों डहर जम्मो ओर-छोर
होगे गांव गली खोर....
रचनाकार
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 9669874209
Nice brother likhu.... Dpk
जवाब देंहटाएंThanks deepak bhai
हटाएंबहुत सुघ्घर जी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंबहुत बढ़िया, गुरुजी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद हीरा
हटाएंSunder Sahu ji
जवाब देंहटाएं1 no.
जवाब देंहटाएंthanks
हटाएं