प्रिय पाठक मित्रों ,
नमस्कार आइये शुरू करते है एक नये ‘‘अभ्यास‘‘ का जिनका नाम है ‘‘मेरी कलम से‘‘ लेखन अभ्यास। दोस्तों इस ब्लाॅग के माध्यम से मेरा यह प्रयास रहेगा कि सभी के लिये नई-नई कवितायें छत्तीसगढ़ी व हिन्दी में पढ़ने को मिलता रहे। मेरा प्रयास यह भी रहेगा कि मैं अपनी रचनाओं में सामाजिक संदेशों ,उपलब्धियों, कुरीतियों, पर्यावरण जागरूकता , मानवीय मूल्यों राजनीतिक हलचलों को आपकी रूचियों के अनुसार रखूं ताकि आपको भी पढ़ने में आनंद की अनुुभूति हो। जैसा कि मैंने पहले ही यह बात रख दिया है यह अभ्यास है और अभ्यास में त्रुटियां भी संभव है, त्रुटियों, अनुपयुक्त शब्दों को अवगत कराने की जिम्मेदारी आपकी है । आपको रसिक पाठक के रूप में देखते हुए मैं यह निवेदन करता हूं कि आप अपना कीमती समय निकालकर इन प्रस्तुत अंशों का पठन करें और कुशल समीक्षक के रूप में अपी टिप्पणियां साझा करें।
आपका लिखेश्वर साहू (तो अभ्यास की इस कड़ी में सर्वप्रथम शुरू करते है मां शारदे की वंदना से....)
सरस्वती वंदना
हंस चढ़इया वीणा के बजइया
आजा सभी में तोला भगत पुकारथे
शारदे मां शारदे हमला तैहा ज्ञान दे
ज्ञान के भंडार दाई वीणा वेद धारी
आयेन तोर शरण में दाई करले चिन्हारी
ज्ञान देवइया सरस्वती मइया
करथो गोहार तोला जय हो मां शारदे
शारदे मां शारदे हमला तैहा ज्ञान दे
कंठ मां विराजो मोर आके महतारी
न सुर के पहचान मोला न लय ताल के चिन्हारी
सुर के देवइया लयताल के सिरजइया
आके सभा में दाई तैहा विराज दे
शारदे मां शारदे हम ला तैहा ज्ञान दे
रचनाकार
लिखेश्वर साहू
ग्राम-सौंगा,पोष्ट-गिरौद,
तह-मगरलोड, जिला-धमतरी (छ.ग.) 9669874209
Nice लाइन
जवाब देंहटाएंVery good
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