पाठक संगवारी मन ला जय जोहार
प्रस्तुत हे मोर छोटे से प्रयास.....
बासी चटनी के खवइया मँय गँवइहा अँव गा
पेज पसिया के पिवईया मँय गंवइहा अँव गा
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अन्न उपजावव मँय का नदिया कछार म
सगरो जग के मँय पालन करइया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
गांवव गीत सुघर बइठे तरिया के पार म
बंशी के तान सुनले नरवा नदिया के पार म
धेनु के चरइया मँय कन्हैया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
माड़ी ले पटकु पागा परय मोर माथ म
जग के तकदीर हा हवय मोर हाथ म
सरम, करम ले मँय जग के सिरजइया अँव गा
बासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
अख्खड़ अनगढ़हा कतको कहिथे अज्ञानी
कखरो बर देहाती हम तो सीधवा परानी
कहि ले ता कहानी सुने ददरिया अँव गाबासी चटनी के खवइया मँय गंवइहा अँव गा
पेज पसिया के पिवईया मँय गंवइहा अँव गा
लिखेश्वर साहू
ग्राम -सौंगा, पोष्ट-गिरौद
तह-मगरलोड़, 9669874209


सुग्घर अकन बने गांव के गवइन्हा
जवाब देंहटाएंहौ गा कन्हैया
हटाएंबहुत सुंदर भाई
जवाब देंहटाएंधन्यवाद भईया जी
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर भाईजी
जवाब देंहटाएंTHANKU
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